जम्मू-कश्मीर: बंद होने की कगार पर खड़े एफएसएल को फिर जिंदा करने की कवायद
एफएसएल श्रीनगर के बायोलॉजी सेरोलॉजी उप निदेशक शाहुल अहमद को जम्मू में बायोलॉजी सेरोलॉजी एक्सपर्ट बनाकर भेजा गया है। राइटिंग के एक्सपर्ट पहले से मौजूद हैं।
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फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी(एफएसएल) जम्मू को फिर से पुराने ढर्रे पर लाने की कवायद शुरू कर दी गई है। अलग-अलग एक्सपर्ट की कमी से जूझ रहे एफएसएल में एक्सपर्ट लाने का काम शुरू कर दिया गया है। एक हफ्ते में दो एक्सपर्ट तैनात कर दिए गए हैं। इससे कई मामलों की जांच फिर से शुरू हुई है।
माना जा रहा है कि अगले एक महीने में सभी एक्सपर्ट के साथ एफएसएल पूरी तरह से काम करने लगेगा। जानकारी के अनुसार एफएसएल के पास सिर्फ हैंडराइटिंग का एक्सपर्ट ही मौजूद था। जबकि बायोलॉजी, सेरोलॉजी, नारकोटिक्स, केमिकल, एक्सस्लोसिव, डाक्यूमेंट, फिंगर प्रिंट, ब्लैस्टिक और लाई डिटेक्ट के एक्सपर्ट नहीं थे।
इसकी वजह से इन सभी से संबंधित मामले चंडीगढ़ एफएसएल और श्रीनगर एफएसएल भेजे जा रहे थे। अब गृह विभाग ने चार विभागों के एक्सपर्ट को तैनात कर दिया गया है। दिसंबर 2020 में रिटायर होने वाले नारकोटिक्स और केमिकल के एक्सपर्ट उप निदेशक पवन कुमार अबरोल को फिर से संबंधित विभाग का एक्सपर्ट नियुक्त किया गया है। एक साल तक उनकी सेवाएं ली जाएंगी।
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पांच सौ से ज्यादा मामले लंबित
जानकारी के अनुसार एफएसएल में इस समय विभिन्न तरह के 500 से अधिक मामले जांच के लिए लंबित पड़े हुए हैं। इनमें अधिकतर मामले नारकोटिक्स और केमिकल के हैं। एक्सपर्ट आने से अब इन मामलों की जांच तेजी से हो सकेगी। इसके पहले मामलों को जांच के लिए चंडीगढ़ और श्रीनगर एफएसएल भेजा जा रहा था।.