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एक और पूर्व मंत्री ने छोड़ा महबूबा का साथ, अब तक दर्जनभर पूर्व विधायक दे चुके हैं इस्तीफा
Sun, 06 Jan 2019 01:42 PM IST
राजेश सैनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: राजेश सैनी
Updated Sun, 06 Jan 2019 01:42 PM IST
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महबूबा मुफ्ती
- फोटो : फाइल
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जम्मू-कश्मीर में पीडीपी का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को एक अन्य पूर्व मंत्री जावेद मुस्तफा मीर ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने शनिवार को कहा, “मैंने पीडीपी से इस्तीफा दे दिया है। यह मेरा व्यक्तिगत फैसला है और मैं इस वक्त इस पर और ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा।” उन्होंने भविष्य की अपनी योजना के बारे में कुछ नहीं कहा। बता दें मीर को 2015 में मुफ्ती मोहम्मद सईद नीत पीडीपी-भाजपा सरकार में राजस्व मंत्री के तौर पर शामिल किया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद जब महबूबा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उन्हें कैबिनेट में नहीं रखा गया। इस कारण से मीर और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ने लगे थे। वह गठबंधन की सरकार बनने के बाद से उसमें पीडीपी की भूमिका का आलोचना करते रहे हैं।
हालांकि कुछ महीनों के बाद कैबिनेट के विस्तार में जावेद को दोबारा से मंत्री बनाया गया। सूत्रों का कहना है कि अभी और कई नेता पार्टी का दामन छोड़ सकते हैं। ऐसे में महबूबा के लिए आगामी लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
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पूर्व मंत्री इमरान रजा अंसारी के पार्टी छोड़ने के साथ शुरू हुआ यह सिलसिला जारी है। अब तक डा. हसीब द्राबू समेत लगभग एक दर्जन पूर्व विधायक व पार्टी नेता पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। दरअसल सरकार गिरने के बाद से पार्टी में जबर्दस्त अंतर्कलह है।
कई नेता खुलेआम पार्टी नेतृत्व पर तानाशाही रवैया अपनाने तथा परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगा चुके हैं। कई ने तो गठबंधन टूटने के लिए महबूबा को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया।
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पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के निधन के बाद जब महबूबा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उन्हें कैबिनेट में नहीं रखा गया। इस कारण से मीर और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ने लगे थे। वह गठबंधन की सरकार बनने के बाद से उसमें पीडीपी की भूमिका का आलोचना करते रहे हैं।
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हालांकि कुछ महीनों के बाद कैबिनेट के विस्तार में जावेद को दोबारा से मंत्री बनाया गया। सूत्रों का कहना है कि अभी और कई नेता पार्टी का दामन छोड़ सकते हैं। ऐसे में महबूबा के लिए आगामी लोकसभा तथा विधानसभा चुनाव में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
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पूर्व मंत्री इमरान रजा अंसारी के पार्टी छोड़ने के साथ शुरू हुआ यह सिलसिला जारी है। अब तक डा. हसीब द्राबू समेत लगभग एक दर्जन पूर्व विधायक व पार्टी नेता पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। दरअसल सरकार गिरने के बाद से पार्टी में जबर्दस्त अंतर्कलह है।
कई नेता खुलेआम पार्टी नेतृत्व पर तानाशाही रवैया अपनाने तथा परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगा चुके हैं। कई ने तो गठबंधन टूटने के लिए महबूबा को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया।