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यूरोपियन संघ का कश्मीर दौराः देश में सियासी घमासान और घाटी में पत्थरबाजी सहित कई बड़ी बातें

Tue, 29 Oct 2019 05:29 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 29 Oct 2019 05:29 PM IST
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European Union team reach Kashmir, Stoning took place in many parts of Srinagar
यूरोपियन संघ का प्रतिनिधिमंडल

यूरोपियन संघ के 28 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल घाटी के जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए एक दिवसीय दौरे पर श्रीनगर पहुंचा। यूरोप प्रतिनिधिमंडल में इटली, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस और पोलैंड के एमपी शामिल हैं। यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल के घाटी पहुंचने पर एक ओर देश की सियासत में तूफान आया तो वहीं अराजकतत्वों ने एक बार फिर माहौल खराब करने की कोशिश की।

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जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में नटीपोरा, सौरा, एचएमटी समेत विभिन्न इलाकों में नारेबाजी करते हुए जुलूस निकालने का प्रयास किया साथ ही वाहनों पर पथराव भी किया। इस दौरान हालात पर काबू पाने के लिए सुरक्षाबलों को बल प्रयोग करना पड़ा। इस हिंसक घटना में चार लोगों के जख्मी होने की सूचना है।
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यूरोपियन संघ को एयरपोर्ट से कड़ी सुरक्षा के बीच लंच के लिए ले जाया गया है। इसके बाद सेना के 15 कोर के मुख्यालय में इस दल को कश्मीर घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देने में पाकिस्तान की भूमिका सहित कई जानकारियां दी गईं। वहीं ईयू सांसदों के कश्मीर दौरे पर सियासत तेज हो गई है। 
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प्रतिनिधिमंडल को आम जनता और सियासी नेताओं से मिलने की अनुमति दी जाए- नेशनल कांफ्रेंस

नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने मांग की है कि इस प्रतिनिधिमंडल को आम जनता और सियासी नेताओं से मिलने की अनुमति दी जाए। दूसरी ओर कांग्रेस ने कहा है कि अगर निमंत्रण मिला तो पार्टी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर सकती है। 

अनंतनाग से नेकां सांसद हसनैन मसूदी ने अमर उजाला के साथ फोन पर बातचीत में कहा कि, यह एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन यह तभी फायदेमंद होगा जब प्रतिनिधिमंडल को आम लोगों के साथ, सिविल सोसायटी राजनीतिक पार्टी के नेताओं से भी मिलने दिया जाए। वहीं जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के ट्विटर अकाउंट से उनकी बेटी ने ट्वीट किया है कि यह प्रतिनिधिमंडल जम्मू-कश्मीर के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों से क्यों नहीं मिल सकता। 

ऐसे में दो स्थितियां पैदा होती हैं और वह यह हैं कि अगर प्रतिनिधिमंडल कहता है कि हालात सामान्य है तो केंद्र को सियासी कैदियों को छोड़ने के साथ-साथ इंटरनेट बहाल करना होगा और अगर वो यह कहता है कि हालात सामान्य नहीं है तो ऐसे में केंद्र के दावे झूठे साबित हो सकते हैं। 

ट्वीट में आगे लिखा है कि अगर इस 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को इजाजत दी जा सकती है तो फिर इससे पहले अमेरीकी सेनेटर के प्रतिनिधिमंडल को क्यों नहीं अनुमति दी गई। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि उन्हें आम जनता, मीडिया और सिविल सोसायटी के सदस्यों से मिलने दिया जाएगा। इससे कश्मीर और शेष दुनिया के बीच पर्दा उठ जाएगा। 

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