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खैर की लकड़ी की अवैध कटाई जोरों पर

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घगवाल (सांबा)। तहसील घगवाल के पहाड़ी व कंडी क्षेत्रों में वनों में खैर की लकड़ी की अवैध कटाई का सिलसिला बदस्तूर जारी है। वन विभाग मूकदर्शक बना है। वन विभाग यह कहकर अपना पल्लू झाड़ लेता है कि वह उन्हीं क्षेत्रों से कटाई की अनुमति देते हैं जो लोगों की मिलकियत हो। इनके दस्तावेजों की जांच राजस्व विभाग के अधिकारी करते हैं। उसके बाद ही वन विभाग अनुमति देता है।
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खैर की लकड़ी की कटाई में असली खेल वन कटाई माफिया यह करता है कि थोड़ी सी जमीन की मिलकियत होती है। उसकी आड़ में कस्टोडियन व सरकारी जमीन से भी लकड़ी की कटाई कर लाखों का मुनाफा कमाकर संबंधित विभाग के अधिकारी की जेबें गर्म करते हैं। कोई भी विभाग इस वन कटाई माफिया पर कार्रवाई नहीं करता है।
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बता दें कि तहसील घगवाल के सांदी गांव, सुराडा गांव, दस्सियां गांव व आदि क्षेत्रों में अवैध रूप से वन विभाग व कस्टोडियन विभाग की जमीन से खैर की लकड़ी की कटाई जोरों से चल रही है।
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सरकारी जमीन से लकड़ी की कटाई की अभी कोई शिकायत नहीं पहुंची है। फिर भी तहसीलदार को जांच के बारे में कहा जाएगा।
-रामकेश शर्मा, एसडीएम, घगवाल
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नोनाथ पंचायत में वनों की कटाई जोरों पर
घगवाल (सांबा)। नोनाथ पंचायत के सांदी गांव में इन दिनों वनों की कटाई जोरों पर है। प्रतिबंधित खैर की लकड़ी सरकारी बड़े पैमाने पर काटी जा रही है। इस संबंध में जिला वन अधिकारी सोम राज खजूरिया ने बताया कि उनके पास सरकारी भूमि से खैर की कटाई की कोई शिकायत नहीं आई है। विभाग एसआरओ के तहत अनुमति देता है। इसमें राजस्व विभाग भूमि की शिनाख्त करता है। फिर अनुमति दी जाती है।
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