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तालाबों अस्तित्व तो लगभग खत्म होने की कगार पर
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मरालिया गांव में छह कनाल का तलाव रह गया ढाई कनाल का
- फोटो : RSPURA
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आरएस पुरा। उपजिले के ग्रामीण क्षेत्र में वर्षों पुराने तालाबों का अस्तित्व लगभग खत्म होने की कगार पर है। प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। हालांकि हर माह किसी न किसी गांव से तालाबों पर कब्जे किए जाने की शिकायतें मिलती हैं। इसके बावजूद दूसरे तालाबों को खाली कराने व जल संरक्षण करने की योजना होने पर भी अनदेखी की जा रही है।
उपजिले में कई स्थानों पर तालाबों की भूमि पर अवैध कब्जे कर वहां पर बडे़- बडे़ भवनों का निर्माण होने पर प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीण क्षेत्र में जो तालाब रह गए हैं वह भी नाम के है। मीरां साहिब ब्लॉक के अधीन गांव मेहशिया में 3.13 कनाल का तालाब अब 1.15 कनाल का राजस्व रिकार्ड में बचा है। तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा किए जाने पर संबंधित ग्रामीणों द्वारा एसडीएम को शिकायत करने पर कब्जा हटवाने की मांग पर अब वह फाइल जिलाधीश जम्मू के कार्यालय में भेजी गई है। इसी प्रकार गांव मरालिया में छह कनाल का तालाब अब मात्र ढाई कनाल रह गया है।
बैक टू विलेज-टू में ग्रामीणों ने तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा करने पर संबंधित अधिकारी को अवगत कराए जाने पर राजस्व पैमाइश कराई। ग्रामीण क्षेत्र में संबंधित गांव की पंचायत के प्रतिनिधियों का कार्य है कि वह तालाबों की भूमि पर अवैध कब्जा करने पर प्रशासन को इसकी जानकारी मुहैया कराए, लेकिन ऐसा नहीं किया जाता। जम्मू-कश्मीर पीपल सेक्युलर फोरम के प्रधान कुंदन लाल शर्मा का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के तालाब संबंधित पंचायत के अधीन होने चाहिए, ताकि इनका रख-रखाव हो सके। ऐसा नहीं होने पर तालाबों की भूमि पर कब्जा कर अवैध निर्माण न हो सके। प्रमुख तालाब अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट व शासन के आदेश के बाद भी तालाबों पर कब्जों की अनदेखी से प्रशासनिक कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा है।
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भूगर्भ विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2004 में हुए सर्वेक्षण में भूगर्भ जल की स्थिति 89107.99 हेक्टेयर मीटर पाई गई थी। भूगर्भ जल विकास दर का आकलन 49.38 हेक्टेयर मीटर किया गया। भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन तथा जल संरक्षण की अनदेखी से जलस्तर में लगातार गिरावट हो रही है। इन स्थलों पर जल स्तर में गिरावट के खुले संकेत मिल रहे हैं। जल संरक्षण के प्रमुख स्रोतों पर हो रहे कब्जों की अनदेखी से पानी की समस्या विकराल होती जा रही है। कई कस्बों व गांव में तालाबों का अस्तित्व तो लगभग खत्म हो चुका है। तालाब की भूमि पर धड़ल्ले से कब्जे हो रहे हैं। तालाबों की भूमि पर पक्के निर्माण होने से अस्तित्व खतरे में हैं।
बुजुर्ग अमरनाथ का कहना है कि सरकार की ओर से जल संरक्षण करने के लिए कई योजनाएं बनाई गई हैं। हालत यह है कि जमीनी स्तर पर अब तालाब कागजों में ही हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकार्ड में तालाबों की भूमि की पैमाइश कराई जाए ताकि सच्चाई का पता लगाए जाने के साथ तालाबों के अस्तित्व को बचाया जा सके, जिससे आने वली पीढ़ी की पानी की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
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उपजिले में कई स्थानों पर तालाबों की भूमि पर अवैध कब्जे कर वहां पर बडे़- बडे़ भवनों का निर्माण होने पर प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीण क्षेत्र में जो तालाब रह गए हैं वह भी नाम के है। मीरां साहिब ब्लॉक के अधीन गांव मेहशिया में 3.13 कनाल का तालाब अब 1.15 कनाल का राजस्व रिकार्ड में बचा है। तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा किए जाने पर संबंधित ग्रामीणों द्वारा एसडीएम को शिकायत करने पर कब्जा हटवाने की मांग पर अब वह फाइल जिलाधीश जम्मू के कार्यालय में भेजी गई है। इसी प्रकार गांव मरालिया में छह कनाल का तालाब अब मात्र ढाई कनाल रह गया है।
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बैक टू विलेज-टू में ग्रामीणों ने तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा करने पर संबंधित अधिकारी को अवगत कराए जाने पर राजस्व पैमाइश कराई। ग्रामीण क्षेत्र में संबंधित गांव की पंचायत के प्रतिनिधियों का कार्य है कि वह तालाबों की भूमि पर अवैध कब्जा करने पर प्रशासन को इसकी जानकारी मुहैया कराए, लेकिन ऐसा नहीं किया जाता। जम्मू-कश्मीर पीपल सेक्युलर फोरम के प्रधान कुंदन लाल शर्मा का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र के तालाब संबंधित पंचायत के अधीन होने चाहिए, ताकि इनका रख-रखाव हो सके। ऐसा नहीं होने पर तालाबों की भूमि पर कब्जा कर अवैध निर्माण न हो सके। प्रमुख तालाब अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट व शासन के आदेश के बाद भी तालाबों पर कब्जों की अनदेखी से प्रशासनिक कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा है।
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भूगर्भ विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2004 में हुए सर्वेक्षण में भूगर्भ जल की स्थिति 89107.99 हेक्टेयर मीटर पाई गई थी। भूगर्भ जल विकास दर का आकलन 49.38 हेक्टेयर मीटर किया गया। भूगर्भ जल के अंधाधुंध दोहन तथा जल संरक्षण की अनदेखी से जलस्तर में लगातार गिरावट हो रही है। इन स्थलों पर जल स्तर में गिरावट के खुले संकेत मिल रहे हैं। जल संरक्षण के प्रमुख स्रोतों पर हो रहे कब्जों की अनदेखी से पानी की समस्या विकराल होती जा रही है। कई कस्बों व गांव में तालाबों का अस्तित्व तो लगभग खत्म हो चुका है। तालाब की भूमि पर धड़ल्ले से कब्जे हो रहे हैं। तालाबों की भूमि पर पक्के निर्माण होने से अस्तित्व खतरे में हैं।
बुजुर्ग अमरनाथ का कहना है कि सरकार की ओर से जल संरक्षण करने के लिए कई योजनाएं बनाई गई हैं। हालत यह है कि जमीनी स्तर पर अब तालाब कागजों में ही हैं। उन्होंने कहा कि राजस्व रिकार्ड में तालाबों की भूमि की पैमाइश कराई जाए ताकि सच्चाई का पता लगाए जाने के साथ तालाबों के अस्तित्व को बचाया जा सके, जिससे आने वली पीढ़ी की पानी की जरूरतों को पूरा किया जा सके।