जेल से बाहर आए जम्मू के चुलबुल पांडे
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जम्मू के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट नाम से फेमस सब इंस्पेक्टर शिव कुमार उर्फ सोनू और उनके पीएसओ मोहम्मद अयूब को आखिरकार जमानत मिल गई।
फर्जी मुठभेड़ के आरोप में ट्रायल का सामना कर रहे सोनू और अयूब को भद्रवाह के प्रिंसिपल सेशन जज एमके शर्मा ने जमानत दी।
सीनियर एडवोकेट सुनील सेठी और एडवोकेट परिमोक्ष सेठ की दलीलें सुनने और मामले में दर्ज बयानों पर गौर करने के बाद प्रिंसिपल सेशन जज ने दोनों को जमानत प्रदान करते हुए एक-एक लाख रुपये का बांड भरने के निर्देश दिए।
जम्मू-कश्मीर से बाहर जाने पर रोक
प्रिंसिपल सेशन जज ने आदेश दिया कि बिना अदालत की पूर्व इजाजत के वे जम्मू-कश्मीर की हद से बाहर नहीं जाएंगे तथा अभियोजन पक्ष के गवाह को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे, साथ ही केस की प्रत्येक सुनवाई पर अदालत में पेश होंगे।
पुलिस केस के अनुसार सब इंस्पेक्टर शिव कुमार शर्मा जेएंडके पुलिस के स्पेशल आपरेशन ग्रुप किश्तवाड़ में इंचार्ज और मोहम्मद अयूब उनके पीएसओ थे।
दोनों पर आरोप है कि उन्होंने आउट आफ टर्न प्रमोशन पाने, आर्थिक लाभ और पुलिस महकमे व जनता में शोहरत पाने के लिए अरशद अहमद तथा मोहम्मद आरिफ नायक के साथ मिलकर फर्जी मुठभेड़ की योजना बनाई।
143 कारतूस और चीनी हैंड ग्रेनेड
दो कश्मीरी युवकों को योजना में शामिल किया गया और पुलवामा निवासी मुजफ्फर अहमद को किश्तवाड़-डोडा क्षेत्र में सक्रिय आतंकी घोषित किया।
आरोपी अब्दुल राशिद को दबाव डालकर योजना में शामिल किया गया, ताकि वह योजना के लिए युवकों की व्यवस्था कर सकें। बाद में राशिद सरकारी गवाह बन गया। आरोप है कि 14 अप्रैल 2013 को शिव कुमार शर्मा ने राशिद को किश्तवाड़ बुलाया।
15 अप्रैल को उसे एक बैग सौंपा, जिसमें एक पिस्टल, मैगजीन, कारतूस, एके 56 राइफल, तीन मैगजीन, 143 कारतूस और चीनी हैंड ग्रेनेड थे। राशिद को बैग लेकर कहारा जाने को कहा गया।
ग्रेनेड फेंके जो फटे नहीं
अब्दुल राशिद ने मोहम्मद रफी को पिस्टल व गोलियां, अख्तर हुसैन को एके 56 और गोलियां तथा दोनों कश्मीरी युवकों को हैंड ग्रेनेड दिए। आरोपियों ने 27 व 28 अप्रैल की रात ठाठरी थाने पर ग्रेनेड फेंके जो फटे नहीं।
इस संबंध में ठाठरी थाने में केस दर्ज किया गया। जांच के दौरान आरोपी रफी पकड़ा गया। पूछताछ में आरोपी ने सारी कहानी पुलिस को बताई। साथ ही उनकी निशानदेही पर हथियार भी बरामद कर लिए गए।
फेंके गए ग्रेनेड सीजेएम डोडा के निर्देश पर निष्क्रिय किए गए। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया।