जम्मू-कश्मीर: सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ में तीन आतंकी ढेर, चार सुरक्षाकर्मी घायल, एक जवान शहीद
- सेना ने मार गिराए तीन आतंकवादी
- मुठभेड़ में चार सुरक्षाकर्मी घायल
- दो आतंकियों के छिपे होने की आशंका
विस्तार
जम्मू-कश्मीर के रामबन में बटोट-डोडा रोड इलाके में शनिवार सुबह सुरक्षाबलों ने आतंकियों की मौजूदगी की सूचना पर इलाके की घेराबंदी की। आतंकियों ने खुद को घिरा हुआ देख सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। जिसके बाद दोनों तरफ से फायरिंग शुरू हुई। दोनों ओर से फायरिंग जारी है। इस मुठभेड़ में सेना ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया है। वहीं एक जवान शहीद हो गया और चार सुरक्षाकर्मी घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि अभी दो आतंकी छिपे हुए हैं। सेना की ओर से कई बार आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी गई है। लेकिन दोनों आतंकी रुक-रुककर फायरिंग कर रहे हैं। सेना की ओर से जवाबी कार्रवाई की जा रही है।
भारतीय सेना के प्रवक्ता कर्नल देवेंद्र आनंद ने बताया कि आज यानी कि शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे दो व्यक्तियों ने बटोट-डोडा रोड पर एक नागरिक के वाहन को रोकने की कोशिश की। वाहन चालक को दोनों के हाव-भाव और हुलिये पर संदेह हुआ। उसने इस मामले की जानकारी पास के ही सेना पोस्ट को दी। भारतीय सेना के जवानों ने तुरंत दोनों संदिग्ध आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी।
भारी बारिश के चलते ऑपरेशन रोका गया। सेना, सीआरपीएफ और एसओजी की संयुक्त टीम ने पूरे इलाके को चारों ओर से घेर लिया है। ताजा जानकारी के मुताबिक बारिश थमते ही सेना ने फिर से ऑपरेशन शुरू कर दिया है। कस्बे के एक घर में आतंकी घुसे हुए हैं। दोनों ओर से फायरिंग जारी है।
रामबन के बटोट इलाके में एक स्थानीय नागरिक ने बताया कि सिविल ड्रेस और हाथों में बंदूक लिए तीन आतंकी पड़ोस के घर में घुसे। इस दौरान उस परिवार के सभी सदस्य बाहर आ गए। बताया कि आतंकियों ने घर के मालिक को उनके ही घर में कैद कर लिया है। कहा कि सेना के जवानों ने हम लोगों को बचाया।
तीन आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। सुरक्षा बल इलाके में ऑपरेशन चला रहे हैं।- डीआईजी सीआरपीएफ पीसी झा, बटोट रामबन
सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकियों पर बेहद सख्त शिकंजा कसा है
सुरक्षा एजेंसियों के पास मौजूद इनपुट के अनुसार, घाटी में फिलहाल 300 आतंकी सक्रिय हैं। ओजीडब्ल्यू की संख्या छह हजार से अधिक है। यह ओजीडब्ल्यू ही आतंकियों को मदद पहुंचाने के साथ घाटी में हिंसा तथा पत्थरबाजी को भी बढ़ावा देते हैं।