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रोजगार: दो साल में 7 लाख युवा हुए कृषि क्षेत्र में शामिल, दूध उत्पादन में पंजाब को दूध सप्लाई कर रहा जम्मू-कश्मीर

Wed, 15 Dec 2021 11:41 AM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: करिश्मा चिब Updated Wed, 15 Dec 2021 11:41 AM IST
सार

कृषि उत्पादन निदेशालय की ओर से क्वालिटी काउंसिल आफ इंडिया के सहयोग से औषधीय पौधों के उत्पादन पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

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Employment: 7 lakh youth joined in two years, involved in agriculture, Jammu-Kashmir supplying milk to Punjab in milk production
जम्मू-कश्मीर कृषि

विस्तार

दो साल में कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में 7 लाख युवाओं को रोजगार प्रदान किया गया है। यही नहीं, जम्मू-कश्मीर तेजी से दूध उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बन रहा है। इसकी जानकारी दूध उत्पादों की पहली कांफ्रेंस में दी गई। कृषि उत्पादन विभाग के आयुक्त सचिव नवीन चौधरी ने इसे लेकर उच्च स्तरीय बैठक की। 

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उन्होंने  किसानों विशेषकर बड़े डेयरी उत्पादकों से केवल दूध उत्पादन के बजाय मूल्य संवर्धन पर अधिक ध्यान देने का आग्रह किया। कहा कि फैक्ट्रियां दूध उत्पाद में मक्खन, घी आदि बना सकते हैं, जहां वे सरकार की परवाज योजना का लाभ भी उठा सकते हैं, जिसके तहत वे अपनी उपज को कम से कम समय में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भेज सकते हैं।
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दूध उत्पादन में वृद्धि का श्रेय एकीकृत डेयरी विकास योजना (आईडीडीएस) को देते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर अब पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों को दूध निर्यात कर रहा है और कहा कि आईडीडीएस के तहत अतिरिक्त 20 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिससे डेयरी किसानों को बड़े पैमाने पर लाभ होगा। बता दें कि उक्त कांफ्रेंस पशु पालन विभाग की ओर से आयोजित की गई। 
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उधर, कृषि उत्पादन निदेशालय की ओर से क्वालिटी काउंसिल आफ इंडिया के सहयोग से औषधीय पौधों के उत्पादन पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य औषधीय पौधों में अच्छी कृषि पद्धतियों (जीएपी) और अच्छे वन संग्रह प्रथाओं (जीएफसीपी) को प्रोत्साहित करना था।


यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: कैंसर संस्थान जम्मू मार्च 2022 तक होगा कार्यात्मक, अगले 3 से 4 माह में टीकाकरण से छूटे बच्चों को किया जाएगा कवर

विभाग के संयुक्त सचिव ए एस रीन ने एएस रीन ने एलोपैथिक दवाओं पर आयुर्वेदिक चिकित्सा के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला और औषधीय पौधों की खेती को अच्छी आय पैदा करने वाला उद्यम करार दिया। उन्होंने भाग लेने वाले किसानों से औषधीय पौधों की खेती के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानने के लिए प्रशिक्षण का पूरा लाभ उठाने और साथी किसानों के साथ कार्यक्रम में प्राप्त ज्ञान को साझा करने का आग्रह किया।

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