फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Election 2024 : Buildings were made in the name of health service but no staff in jammu kashmir

चुनाव: स्वास्थ्य के नाम पर इमारतें मिलीं पर स्टाफ नहीं, अब दर्द दे रहे नेताओं के वादे, पढ़ें ये खास रिपोर्ट

Wed, 17 Apr 2024 06:10 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Wed, 17 Apr 2024 06:10 PM IST
सार

जम्मू संभाग के 10 जिलों की बात करें तो यहां स्वास्थ्य विभाग के अधीन 1931 विभिन्न सरकारी चिकत्सा केंद्र हैं। इनमें 2000 डॉक्टरों के पद सृजित हैं और 1300 के करीब पद भरे हैं। 5200 के करीब गैर राजपत्रित चिकित्सा कर्मचारियों के पद हैं जिनमें से 3800 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें करीब 1400 पद रिक्त पड़े हैं। 

विज्ञापन
Election 2024 : Buildings were made in the name of health service but no staff in jammu kashmir
जम्मू हड्डी एवं जोड़ अस्पताल - फोटो : संवाद

विस्तार

प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचा सुधारने के सरकारों ने वादे तो किए लेकिन जमीनी स्तर पर अभी काफी कुछ करना बाकी है। कई प्रतिष्ठित स्वास्थ्य परियोजनाओं को अपर्याप्त चिकित्सा स्टाफ के साथ ही शुरू कर दिया गया है। नतीजतन मरीजों को तमाम मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) होते हुए भी बेहतर इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा है। नेताओं के वादे अब लोगों को दर्द दे रहे हैं।

विज्ञापन


जम्मू संभाग के 10 जिलों की बात करें तो यहां स्वास्थ्य विभाग के अधीन 1931 विभिन्न सरकारी चिकित्सा केंद्र हैं। इनमें 2000 डॉक्टरों के पद सृजित हैं और 1300 के करीब पद भरे हैं। 5200 के करीब गैर राजपत्रित चिकित्सा कर्मचारियों के पद हैं जिनमें से 3800 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें करीब 1400 पद रिक्त पड़े हैं। 
विज्ञापन


कश्मीर संभाग के भी 10 जिलों में 2102 विभिन्न चिकित्सा केंद्र हैं। यहां भी लगभग सभी जिलों में स्टाफ की कमी है। प्रदेश में ऐसे कई अस्पताल हैं जिनके शुरू होने के महीनों बाद भी आपरेशन थियेटर तक चालू नहीं हो पाए हैं। जम्मू शहर तक के अस्पताल इस तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। ग्रामीण और सुदूर इलाकों में तो स्वास्थ्य सुविधाएं और भी खराब हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

छह माह पूर्व जम्मू के महेशपुरा चौक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल शुरू किया था। तब लोगों को लगा था कि हड्डी व जोड़ों की समस्याओं का इलाज स्थानीय स्तर पर हो जाएगा लेकिन इस अस्पताल में अभी तक आपरेशन थियेटर तक शुरू नहीं हो पाए हैं। 

अस्पताल शुरू करने से पहले 389 पदों को सृजित करने का प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन इसे जीएमसी से आर्थो और दूसरे यूनिटों के स्टाफ से चलाया जा रहा है। 182 बिस्तर के अस्पताल में मौजूदा समय में 42 लोगों का ही स्टाफ है। न यहां सर्जरी शुरू हो पाई है और न ही सिटी स्कैन व डिजिटल एक्सरे। अस्पताल के सात में से एक भी आपरेशन थियेटर स्टाफ की कमी से शुरू नहीं किया जा सका है। यहां रोजाना 400 की ओपीडी है। चार तल के अस्पताल में पहले तल को छोड़ अन्य में वार्ड लगभग बंद पड़े हैं।

जच्चा-बच्चा अस्पताल में 350 पद मंजूर, 125 की ही कर पाए भर्ती

इसी तरह जच्चा-बच्चा अस्पताल (एमसीएच) गांधीनगर के लिए करीब 350 पद मंजूर किए गए थे लेकिन 125 की ही भर्ती हो पाई। स्टाफ के अभाव में 200 बिस्तर वाले इस अस्पताल में 50 से 60 प्रतिशत बेड खाली रहते हैं। अस्पताल में रोजाना 5 से 7 प्रसव ही हो पाते हैं। अस्पताल के पास अपना कोई ब्लड बैंक तक नहीं है। 

45 तक स्थायी नर्सिंग स्टाफ तैनात हैं जबकि अन्य स्टाफ को जीएमसी या संबद्ध अस्पतालों से लाकर काम चलाया जा रहा है। यहां निक्कू- पिक्कू यूनिट तो है लेकिन स्टाफ न होने से लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसी तरह से पिछले साल रेशम घर स्थित राज्य कैंसर संस्थान में ओपीडी शुरू की गई थी लेकिन रेडियोथेरेपी की सुविधा न होने के मरीजों को जीएमसी जम्मू में भर्ती होना पड़ रहा है। यहां 192 चिकित्सा स्टाफ के पद मंजूर किए गए थे, लेकिन हैं केवल 90। इसमें 28 ही स्थायी नर्सिंग स्टाफ है।

जम्मू संभाग में 36 प्रतिशत तक मेडिकल अफसरों के पद खाली

जम्मू संभाग के दस जिलों के चिकित्सा केंद्रों में दो हजार से अधिक डॉक्टरों के पद सृजित हैं। इनमें 30 प्रतिशत से अधिक पद खाली पड़े हुए हैं। मेडिकल अफसरों के 1390 पदों में से करीब 500 (36 प्रतिशत) खाली हैं। एक दशक से अधिक समय से डेंटल सर्जन का पद सृजित नहीं हो पाया है। संभाग के कुछ ही स्वास्थ्य केंद्रों पर त्वचा विशेषज्ञ कार्यरत हैं, जबकि अन्य जगहों पर फिजिशियन से काम चलाया जा रहा है। स्पेशियलिटी में 464 में से 150 से अधिक पद खाली हैं।

संबद्ध अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के प्रयास कर रहे

बोन एंड ज्वाइंट अस्पताल में शीघ्र आपरेशन थियेटर शुरू करने की तैयारी की जा रही है। अस्पताल में स्थायी पदों को सृजित करने के लिए सरकार को लिखा गया है। एमसीएच गांधीनगर में भी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। राज्य कैंसर संस्थान में कई अत्याधुनिक मशीनों को शीघ्र शुरू किया जाएगा। --जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष गुप्ता

मोदी सरकार ने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाया

मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाया है। टेलीमेडिसिन, रोगी पंजीकरण, स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक पहुंच, स्वास्थ्य सेवा अब नागरिकों की उंगलियों पर है। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को और बेहतर बनाने के लिए सरकारी व निजी प्रतिष्ठानों को बढ़ावा दिया जा रहा है। डॉक्टर्स और बाकी चिकित्सा कर्मियों की संख्या बढ़ाने के लिए नर्सिंग सीटें, एमबीबीएस, एमडी आदि सीटें बढ़ाई गई हैं। - डॉ. प्रदीप महोत्रा, प्रदेश मीडिया प्रमुख, भाजपा

आधी अधूरी तैयारियों में शुरू किए जा रहे स्वास्थ्य प्रोजेक्ट

स्टाफ के अभाव में नई स्वास्थ्य परियोजनाओं को आधी-अधूरी व्यवस्थाओं में शुरू कर दिया गया है। नए मेडिकल कॉलेजों में स्टाफ की भारी किल्लत है। छोटे से उपचार के लिए भी मरीजों को शहरी अस्पतालों में भेजा जा रहा है। प्रधानमंत्री के उद्घाटन के बाद भी अभी तक एम्स में ओपीडी और दूसरी सेवाएं शुरू नहीं की जा सकी हैं। नए प्रोजेक्टों में पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ नहीं है। -रवींद्र शर्मा, कांग्रेस प्रवक्ता

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed