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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Eight million tourists return from Katra every year, how business will shine

कटरा से हर साल लौट जाते हैं 80 लाख पर्यटक, कैसे चमकेगा कारोबार

Sun, 24 Nov 2019 03:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा ओमपाल संब्याल/अमित वर्मा, जम्मू
ओमपाल संब्याल/अमित वर्मा, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 24 Nov 2019 03:43 AM IST
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Eight million tourists return from Katra every year, how business will shine
mata vaishno devi darbar - फोटो : अमर उजाला

कश्मीर के हालात से मुश्किल दौर में गुजर रहे जम्मू के कारोबार को चमकाने के लिए वर्षों बाद भी कोई योजना सिरे नहीं चढ़ सकी है। जम्मू से महज 45 किलोमीटर दूर कटरा में मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए हर साल औसतन 80 लाख श्रद्धालु आते हैं। लेकिन उन्हें जम्मू तक लाने में सरकारी अमला पूरी तरह नाकाम रहा है। 

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जम्मू शहर और इसके आसपास पर्यटकों को रोकने के लिए कोई खास व्यवस्था नहीं है। जम्मू में न स्थानीय टूरिस्ट सर्किट बन सका है और न ही नए पर्यटन स्थल विकसित हो सके हैं। शहर की ऐतिहासिक  धरोहरों और मंदिरों तक भी सैलानी नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में कश्मीर में हालात बिगड़ते ही पर्यटन कारोबार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट आ जाता है।
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वैष्णो देवी जाने वाले ज्यादातर श्रद्धालु ट्रेन से सीधे कटड़ा पहुंचते हैं। सड़क मार्ग से जाने वाले श्रद्धालु भी सीधे कटड़ा ही निकल जाते हैं। आजकल भी हजारों लोग वैष्णो देवी पहुंच रहे हैं, लेकिन जम्मू शहर में कारोबार रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। 
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जम्मू होटल्स एंड लॉजेस एसोसिएशन के चेयरमैन इंदरजीत खजूरिया कहते हैं- वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं को जम्मू लाने की व्यवस्था हो जाए तो 12 महीने अच्छा कारोबार हो सकता है, लेकिन इस पर सरकारें गंभीर नहीं है। 

रघुनाथ बाजार में ड्राई फ्रूट्स के कारोबारी रोहित शर्मा और  सुपर मार्केट संचालक एसके अग्रवाल के अनुसार, जितना कारोबार वैष्णो देवी श्रद्धालुओं पर निर्भर है, वो कश्मीर के हालात से प्रभावित नहीं होता। यदि इन श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के लिए सरकार कदम उठाए तो जम्मू की तस्वीर बदल सकती है।

कारोबारियों ने कहा, दशकों से जम्मू में खास बदलाव नहीं लाया

रघुनाथ बाजार के कारोबारी गुलशन महाजन ने कहा कि जम्मू पुराना व ऐतिहासिक शहर है, लेकिन इसे पर्यटन के लिहाज से विकसित करने के लिए संबंधित विभागों और सरकारों ने कुछ खास नहीं किया है। जम्मू में सभी प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट लंबित पड़े हुए हैं। बाजारों की सजावट के लिए दूसरे राज्यों की तर्ज पर कहीं गेट स्थापित नहीं किए गए हैं। पहले झिड़ी मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालु जम्मू आते थे, लेकिन अब उन्हें भी बाहर से सीधे झिड़ी भेज दिया जाता है। उन्होंने ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। 

एक अन्य कारोबारी विनय शर्मा ने कहा कि कटड़ा तक अधिकतर ट्रेनों के सीधे चलने से जम्मू का कारोबार प्रभावित हुआ है। इससे यात्री और पर्यटक सीधे सफर कर रहे हैं। इसके लिए जम्मू में भी कुछ ट्रेनों की सीधी बुकिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। बस स्टैंड मल्टी स्टोर पार्किंग प्रोजेक्ट कई सालों से पूरा नहीं हो पाया है। इसके अलावा अन्य प्रोजेक्टों को भी गति मिलने का इंतजार है। 

कारोबारी आशीष गुप्ता कहते हैं कि सरकार को जम्मू में पर्यटकों को दो से तीन दिन रोकने के लिए उचित प्रयास करने चाहिए। इसके लिए जम्मू में आकर्षित स्थल विकसित किए जाएं। सरकार का उदासीनता रवैये से पर्यटकों के न पहुंचने से जम्मू का कारोबार भी प्रभावित है। 

कारोबारी सूरज प्रकाश गुप्ता का कहना है कि जम्मू के प्रतिष्ठित प्रोजेक्टों को गति सिर्फ कागजों में न दी जाए, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर अमल में लाया जाए। पर्यटकों के लिए जम्मू में नया कुछ लाने की जरूरत है। आज भी कई सालों बाद जम्मू पहुंच रहा पर्यटक यही कह रहा है कि यहां कुछ खास बदलाव नहीं हुआ है। वहीं, टैक्सी चालकों का कहना है कि जम्मू से 45 किलोमीटर दूर लाखों श्रद्धालु आते हैं लेकिन सरकार उन्हें जम्मू लाने के लिए कुछ नहीं कर रही है। टैक्सी चालक अपने स्तर पर पर्यटकों को जम्मू के आसपास इलाकों में ले जाते हैं। इन्हीं प्रयासों से रियासी के शिवखोड़ी में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है।

जम्मू और आसपास के क्षेत्र को विकसित किया जा रहा है, ताकि पर्यटकों को यहां तीन दिनों तक रोका जा सके। सुचेतगढ़ बॉर्डर को वाघा बार्डर की तर्ज पर विकसित करने की योजना है। मानसर, सुरईंसर में बोटिंग शुरू की जा रही है। मुबारक मंडी के जीर्णोद्धार कार्य को शीघ्र मुकम्मल कर पर्यटकों को यहां लाया जाएगा। नगरोटा में एडवेंचर पार्क  विकसित किया जा रहा है। परमंडल, उत्तरवाहिनी को धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है।  
- दीपिका शर्मा, निदेशक, पर्यटन

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