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Jammu News: रेडियो दिवस पर सुरों से समझा संवाद का विज्ञान
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प्रोफेसर पंकज माला शर्मा का स्वागत करते क्षेत्रीय निदेशक डाक्टर दिलीप कुमार व अन्य स्रोत - आ
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- आईआईएमसी जम्मू में संगीत और संवाद की भूमिका पर विशेष व्याख्यान
- पंचतत्व, वेद और आधुनिक मीडिया के रिश्ते पर छात्रों से हुआ संवाद
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। विश्व रेडियो दिवस के मौके पर शुक्रवार को भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) जम्मू में संगीत और संवाद के गहरे संबंध को समझाने के लिए विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय कला परंपरा, वेदों की संवाद शैली और आज के रेडियो व जनसंचार माध्यमों के बीच के रिश्ते पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम संस्थान की सांस्कृतिक समिति अस्मिता की ओर से आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के संगीत विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर पंकज माला शर्मा रहीं। उन्होंने पंच तत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश की अवधारणा को समझाते हुए बताया कि भारतीय संगीत और कला की जड़ें इन्हीं तत्वों से जुड़ी हैं। संगीत समय के साथ बदलता जरूर है लेकिन उसकी मूल भावना और प्रभाव हमेशा बना रहता है। प्रो. शर्मा ने मंत्र, कविता और ऋचा के अर्थ और उनकी उत्पत्ति पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम की शुरुआत में कार्यक्रम प्रभारी डाक्टर विनीत कुमार झा उत्पल ने अतिथि का परिचय देते हुए रेडियो दिवस के महत्व पर बात रखी। आईआईएमसी के क्षेत्रीय निदेशक डाक्टर दिलीप कुमार ने डिजिटल दौर में भी रेडियो और ध्वनि आधारित माध्यमों की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और छात्रों से भारतीय सांस्कृतिक विरासत से सीख लेने का आह्वान किया। व्याख्यान के बाद हुए प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने संगीत, संस्कृति और संवाद को लेकर अपने विचार और सवाल साझा किए। इस अवसर पर प्रोफेसर अनिल सौमित्र भी मौजूद रहे।
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- पंचतत्व, वेद और आधुनिक मीडिया के रिश्ते पर छात्रों से हुआ संवाद
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। विश्व रेडियो दिवस के मौके पर शुक्रवार को भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) जम्मू में संगीत और संवाद के गहरे संबंध को समझाने के लिए विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय कला परंपरा, वेदों की संवाद शैली और आज के रेडियो व जनसंचार माध्यमों के बीच के रिश्ते पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम संस्थान की सांस्कृतिक समिति अस्मिता की ओर से आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के संगीत विभाग की पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर पंकज माला शर्मा रहीं। उन्होंने पंच तत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश की अवधारणा को समझाते हुए बताया कि भारतीय संगीत और कला की जड़ें इन्हीं तत्वों से जुड़ी हैं। संगीत समय के साथ बदलता जरूर है लेकिन उसकी मूल भावना और प्रभाव हमेशा बना रहता है। प्रो. शर्मा ने मंत्र, कविता और ऋचा के अर्थ और उनकी उत्पत्ति पर भी प्रकाश डाला।
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कार्यक्रम की शुरुआत में कार्यक्रम प्रभारी डाक्टर विनीत कुमार झा उत्पल ने अतिथि का परिचय देते हुए रेडियो दिवस के महत्व पर बात रखी। आईआईएमसी के क्षेत्रीय निदेशक डाक्टर दिलीप कुमार ने डिजिटल दौर में भी रेडियो और ध्वनि आधारित माध्यमों की प्रासंगिकता को रेखांकित किया और छात्रों से भारतीय सांस्कृतिक विरासत से सीख लेने का आह्वान किया। व्याख्यान के बाद हुए प्रश्नोत्तर सत्र में छात्रों ने संगीत, संस्कृति और संवाद को लेकर अपने विचार और सवाल साझा किए। इस अवसर पर प्रोफेसर अनिल सौमित्र भी मौजूद रहे।
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