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Jammu News: किताब विवाद के बाद जेकेबोस-एससीईआरटी में स्थायी प्रमुख नहीं होने पर उठे सवाल
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नोट - अलगाववादी किताबों वाले लोगो के साथ
- जेकेबोस में मार्च 2025 से और एससीईआरटी में जनवरी 2020 से नियमित प्रमुख नहीं
- एबीवीपी ने कहा, स्थायी नेतृत्व नहीं होने से फैसलों में देरी और जवाबदेही दोनों प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में विवादित किताबों का मामला सामने आने के बाद अब शिक्षा व्यवस्था की दूसरी खामियां भी सामने आने लगी हैं। किताबों के चयन और निगरानी पर उठे सवालों के बीच अब जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (जेकेबोस) और जम्मू-कश्मीर स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) में लंबे समय से नियमित प्रमुख नहीं होने का मुद्दा भी चर्चा में है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कहा है कि स्कूल शिक्षा की दो सबसे अहम संस्थाएं लंबे समय से स्थायी नेतृत्व के बिना चल रही हैं। ऐसे में समय पर फैसले लेना और जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है।
एबीवीपी के प्रदेश सचिव सनक श्रीवत्स ने कहा कि जेकेबोस में चेयरपर्सन का पद मार्च 2025 से खाली है। एससीईआरटी जनवरी 2020 से नियमित प्रमुख के बिना काम कर रहा है। जेकेबोस में गुलाम हसन शेख इंचार्ज चेयरपर्सन का कार्यभार संभाल रहे हैं जबकि स्कूल शिक्षा निदेशालय, जम्मू के निदेशक नसीम जावेद चौधरी के पास एससीईआरटी के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी है। स्कूल शिक्षा से जुड़े सबसे अहम फैसले लेने वाले इन दोनों संस्थानों का इतने लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था के भरोसे चलना चिंता का विषय है। इससे कई अहम फैसलों में देरी हो रही है और जवाबदेही भी प्रभावित हो रही है। विवादित किताबों के मामले ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं।
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स्कूल शिक्षा के बड़े फैसले यहीं से होते हैं
जेकेबोस बोर्ड परीक्षाओं, पाठ्यक्रम, स्कूलों को संबद्धता देने और परीक्षा सुधार जैसे काम देखता है। वहीं एससीईआरटी पाठ्यक्रम तैयार करने, पाठ्यपुस्तकों के विकास, शिक्षक प्रशिक्षण और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने का काम करता है। इन दोनों संस्थानों से लिए गए फैसले पूरे स्कूल शिक्षा तंत्र को प्रभावित करते हैं। एबीवीपी ने सरकार से दोनों संस्थानों में योग्यता और अनुभव के आधार पर जल्द नियमित प्रमुख नियुक्त करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे फैसले समय पर होंगे और शिक्षा व्यवस्था में जिम्मेदारी तय करना भी आसान होगा।
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- जेकेबोस में मार्च 2025 से और एससीईआरटी में जनवरी 2020 से नियमित प्रमुख नहीं
- एबीवीपी ने कहा, स्थायी नेतृत्व नहीं होने से फैसलों में देरी और जवाबदेही दोनों प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में विवादित किताबों का मामला सामने आने के बाद अब शिक्षा व्यवस्था की दूसरी खामियां भी सामने आने लगी हैं। किताबों के चयन और निगरानी पर उठे सवालों के बीच अब जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (जेकेबोस) और जम्मू-कश्मीर स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) में लंबे समय से नियमित प्रमुख नहीं होने का मुद्दा भी चर्चा में है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कहा है कि स्कूल शिक्षा की दो सबसे अहम संस्थाएं लंबे समय से स्थायी नेतृत्व के बिना चल रही हैं। ऐसे में समय पर फैसले लेना और जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है।
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एबीवीपी के प्रदेश सचिव सनक श्रीवत्स ने कहा कि जेकेबोस में चेयरपर्सन का पद मार्च 2025 से खाली है। एससीईआरटी जनवरी 2020 से नियमित प्रमुख के बिना काम कर रहा है। जेकेबोस में गुलाम हसन शेख इंचार्ज चेयरपर्सन का कार्यभार संभाल रहे हैं जबकि स्कूल शिक्षा निदेशालय, जम्मू के निदेशक नसीम जावेद चौधरी के पास एससीईआरटी के निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी है। स्कूल शिक्षा से जुड़े सबसे अहम फैसले लेने वाले इन दोनों संस्थानों का इतने लंबे समय तक अस्थायी व्यवस्था के भरोसे चलना चिंता का विषय है। इससे कई अहम फैसलों में देरी हो रही है और जवाबदेही भी प्रभावित हो रही है। विवादित किताबों के मामले ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं।
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स्कूल शिक्षा के बड़े फैसले यहीं से होते हैं
जेकेबोस बोर्ड परीक्षाओं, पाठ्यक्रम, स्कूलों को संबद्धता देने और परीक्षा सुधार जैसे काम देखता है। वहीं एससीईआरटी पाठ्यक्रम तैयार करने, पाठ्यपुस्तकों के विकास, शिक्षक प्रशिक्षण और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने का काम करता है। इन दोनों संस्थानों से लिए गए फैसले पूरे स्कूल शिक्षा तंत्र को प्रभावित करते हैं। एबीवीपी ने सरकार से दोनों संस्थानों में योग्यता और अनुभव के आधार पर जल्द नियमित प्रमुख नियुक्त करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि इससे फैसले समय पर होंगे और शिक्षा व्यवस्था में जिम्मेदारी तय करना भी आसान होगा।