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Jammu News: नाम हिंदी विभाग, अधिसूचना जारी होती है अंग्रेजी में
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जम्मू। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में हिंदी विभागों का सिर्फ नाम ही है। इनकी अधिसूचनाएं अंग्रेजी में जारी की जाती हैं, जबकि पाठ्यक्रम हिंदी में पढ़ाया जाता है।
हिंदी के प्रचार-प्रसार की अलख जगाने वाले खुद हिंदी की बजाय अंग्रेजी को बढ़ावा दे रहे हैं। हिंदी विभाग में हिंदी टंकण और लिपिक का पद सृजित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। 14 सितंबर के दिन सभी हिंदी को कामकाजी भाषा बनाने का बिगुल बजाते हैं। लेकिन, जमीनी स्तर पर हिंदी के लिए समर्पित होकर कोई काम नहीं किया जाता।
हालांकि, जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा अधिनियम 2020 में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है। अब प्रदेश प्रशासन भी अंग्रेजी के साथ हिंदी में काम कर रहा है। जमीन की पासबुक हिंदी में भी है। कई पुलिस थानों में हिंदी में प्राथमिकताएं दर्ज की जा रही हैं। लेकिन, जिन संस्थानों से अपेक्षा रखी जाती है, वह हिंदी के लिए गंभीर नहीं हैं।
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केंविवि में शिक्षक करते हैं लिपिक का काम
प्रदेश के केंद्रीय विश्वविद्यालय(केंविवि) जम्मू के हिंदी विभाग में शिक्षक ही लिपिक और टंकण का काम करते हैं। अधिसूचना से लेकर पाठ्यक्रम तक टाइप करने की जिम्मेदारी शिक्षकों ने खुद ले रखी है। विगत कई वर्षों से विश्वविद्यालय में हिंदी विभागहै। लेकिन अभी तक हिंदी से संबंधित काम जानने वाले गैर शिक्षण कर्मियों के पद नहीं निकाले गए हैं। विभाग की ओर से भी विश्वविद्यालयों को संबंधित कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। वहीं केंद्रीय विश्वविद्यालय कश्मीर में भी हिंदी प्रकोष्ठ बनाया गया है। लेकिन सभी अधिसूचनाएं अंग्रेजी में जारी की जाती हैं।
अधिसूचनाएं जारी होती हैं अंग्रेजी में
जम्मू विश्वविद्यालय(जेयू) के हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर रजनी बाला ने कहा कि सभी काम अंग्रेजी में होते हैं। अध्यापक ही लिपिक और टंकण का काम करते हैं। ऐसे ही काम चलाया जाता है। कश्मीर विश्वविद्यालय(केयू) के हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर जहिदा जबीन ने कहा कि हिंदी विभाग में अंग्रेजी में अधिसूचनाएं जारी होती हैं।
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हिंदी के प्रचार-प्रसार की अलख जगाने वाले खुद हिंदी की बजाय अंग्रेजी को बढ़ावा दे रहे हैं। हिंदी विभाग में हिंदी टंकण और लिपिक का पद सृजित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। 14 सितंबर के दिन सभी हिंदी को कामकाजी भाषा बनाने का बिगुल बजाते हैं। लेकिन, जमीनी स्तर पर हिंदी के लिए समर्पित होकर कोई काम नहीं किया जाता।
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हालांकि, जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा अधिनियम 2020 में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है। अब प्रदेश प्रशासन भी अंग्रेजी के साथ हिंदी में काम कर रहा है। जमीन की पासबुक हिंदी में भी है। कई पुलिस थानों में हिंदी में प्राथमिकताएं दर्ज की जा रही हैं। लेकिन, जिन संस्थानों से अपेक्षा रखी जाती है, वह हिंदी के लिए गंभीर नहीं हैं।
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केंविवि में शिक्षक करते हैं लिपिक का काम
प्रदेश के केंद्रीय विश्वविद्यालय(केंविवि) जम्मू के हिंदी विभाग में शिक्षक ही लिपिक और टंकण का काम करते हैं। अधिसूचना से लेकर पाठ्यक्रम तक टाइप करने की जिम्मेदारी शिक्षकों ने खुद ले रखी है। विगत कई वर्षों से विश्वविद्यालय में हिंदी विभागहै। लेकिन अभी तक हिंदी से संबंधित काम जानने वाले गैर शिक्षण कर्मियों के पद नहीं निकाले गए हैं। विभाग की ओर से भी विश्वविद्यालयों को संबंधित कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। वहीं केंद्रीय विश्वविद्यालय कश्मीर में भी हिंदी प्रकोष्ठ बनाया गया है। लेकिन सभी अधिसूचनाएं अंग्रेजी में जारी की जाती हैं।
अधिसूचनाएं जारी होती हैं अंग्रेजी में
जम्मू विश्वविद्यालय(जेयू) के हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर रजनी बाला ने कहा कि सभी काम अंग्रेजी में होते हैं। अध्यापक ही लिपिक और टंकण का काम करते हैं। ऐसे ही काम चलाया जाता है। कश्मीर विश्वविद्यालय(केयू) के हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर जहिदा जबीन ने कहा कि हिंदी विभाग में अंग्रेजी में अधिसूचनाएं जारी होती हैं।