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जम्मू-कश्मीर में ईडी की कार्रवाई: आतंकी फंडिंग पर कई जगह छापेमारी, खंगाले गए ठिकाने
Tue, 03 Nov 2026 10:11 AM IST
Sharukh Khan
पीटीआई, जम्मू-कश्मीर
पीटीआई, जम्मू-कश्मीर
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 03 Nov 2026 10:11 AM IST
सार
जम्मू-कश्मीर में ईडी ने कार्रवाई की है। आतंकी फंडिंग को लेकर कई जगह छापेमारी की गई है। ईडी की टीम ने ठिकाने खंगाले हैं। प्रवर्तन निदेशालय इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले की गहन जांच कर रहा है।
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ED
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में कई स्थानों पर तलाशी ली। यह कार्रवाई एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी है। यह मामला कथित आतंकी फंडिंग से संबंधित है। अधिकारियों ने इस बारे में जानकारी दी।
श्रीनगर में कम से कम चार परिसरों पर छापा मारा गया। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों के तहत की गई। यह मामला उमर आदिल डार और उसके सहयोगियों से जुड़ा है। ईडी के अनुसार, जांच इस आरोप से संबंधित है कि डार प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में काम कर रहा था।
वह संगठन से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था। डार और उसके सहयोगियों को पहले भी पकड़ा गया था। उन्हें बड़ी मात्रा में नकदी के साथ पकड़ा गया था। उनके पास प्रतिबंधित संगठन से संबंधित आपत्तिजनक साहित्य भी मिला था।
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श्रीनगर में कम से कम चार परिसरों पर छापा मारा गया। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों के तहत की गई। यह मामला उमर आदिल डार और उसके सहयोगियों से जुड़ा है। ईडी के अनुसार, जांच इस आरोप से संबंधित है कि डार प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में काम कर रहा था।
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वह संगठन से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल था। डार और उसके सहयोगियों को पहले भी पकड़ा गया था। उन्हें बड़ी मात्रा में नकदी के साथ पकड़ा गया था। उनके पास प्रतिबंधित संगठन से संबंधित आपत्तिजनक साहित्य भी मिला था।
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आतंकी फंडिंग मामले की जांच
प्रवर्तन निदेशालय इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले की गहन जांच कर रहा है। यह जांच कथित आतंकी फंडिंग के पहलुओं पर केंद्रित है। ईडी का मानना है कि डार लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा था। वह संगठन की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। PMLA के तहत की गई यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसका उद्देश्य आतंकी गतिविधियों के वित्तीय स्रोतों को बाधित करना है।
प्रवर्तन निदेशालय इस मनी लॉन्ड्रिंग मामले की गहन जांच कर रहा है। यह जांच कथित आतंकी फंडिंग के पहलुओं पर केंद्रित है। ईडी का मानना है कि डार लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा था। वह संगठन की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। PMLA के तहत की गई यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसका उद्देश्य आतंकी गतिविधियों के वित्तीय स्रोतों को बाधित करना है।
उमर आदिल डार की भूमिका
उमर आदिल डार इस मामले का मुख्य आरोपी है। उस पर प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करने का आरोप है। ईडी की जांच में उसकी भूमिका को ओवर ग्राउंड वर्कर के रूप में बताया गया है। डार को पहले भी उसके सहयोगियों के साथ गिरफ्तार किया गया था। उस समय उसके पास से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। साथ ही, प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा आपत्तिजनक साहित्य भी मिला था।
उमर आदिल डार इस मामले का मुख्य आरोपी है। उस पर प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करने का आरोप है। ईडी की जांच में उसकी भूमिका को ओवर ग्राउंड वर्कर के रूप में बताया गया है। डार को पहले भी उसके सहयोगियों के साथ गिरफ्तार किया गया था। उस समय उसके पास से भारी मात्रा में नकदी बरामद हुई थी। साथ ही, प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा आपत्तिजनक साहित्य भी मिला था।
अलगाववादी गतिविधियों में संलिप्तता
डार लगभग चार साल से जेल में बंद है। उसकी गिरफ्तारी जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों से जुड़ी थी। उस पर भारत विरोधी गतिविधियों में कथित संलिप्तता के आरोप हैं। ईडी की वर्तमान कार्रवाई उसकी पिछली गतिविधियों से भी जुड़ी हो सकती है। यह छापेमारी आतंकी नेटवर्क के वित्तीय ढांचे को तोड़ने का प्रयास है।
डार लगभग चार साल से जेल में बंद है। उसकी गिरफ्तारी जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों से जुड़ी थी। उस पर भारत विरोधी गतिविधियों में कथित संलिप्तता के आरोप हैं। ईडी की वर्तमान कार्रवाई उसकी पिछली गतिविधियों से भी जुड़ी हो सकती है। यह छापेमारी आतंकी नेटवर्क के वित्तीय ढांचे को तोड़ने का प्रयास है।