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अभी तक नहीं खुले रास्ते, श्रीनगर जाने वाले यात्री फंसे

Tue, 09 Sep 2014 12:44 AM IST
Updated Tue, 09 Sep 2014 12:44 AM IST
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due to flood passengers stuck at jammu bus stand

घाटी में खराब मौसम की वजह से जम्मू से आधे यात्रियों को ही रवाना किया जा रहा है, जबकि आधे यात्री अभी तक श्रीनगर, किश्तवाड़ और डोडा का रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं। बस स्टैंड में पांचवें दिन तक इंतजार करते हुए उन्हें खासी दिक्कतों से गुजरना पड़ रहा है। हालांकि जम्मू में मौसम साफ हो गया है लेकिन श्रीनगर और पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन जारी होने के कारण स्थिति नियंत्रण से बाहर चल रही है, इसलिए प्रशासन ने उक्त तीन जगह पर वाहनों को रवाना होने की अनुमति नहीं दी है।

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गौरतलब है कि पिछले एक सप्ताह से मौसम खराब चल रहा है और चार दिन से रियासत में हुई भयंकर तबाही के आगे लोग टूट कर रह गए हैं। जम्मू बस स्टैंड में करीब एक हजार यात्री फंसे थे। इनमें जम्मू संभाग के अलावा श्रीनगर और कश्मीर के यात्री भी शामिल थे। मौसम साफ होने पर छह सौ के करीब यात्रियों को राजोरी, पुंछ, कटड़ा आदि के लिए रवाना कर दिया गया है लेकिन श्रीनगर और किश्तवाड़ की आवाजाही अभी तक बहाल नहीं हो सकी है, जिस कारण बस स्टैंड में मौजूदा समय में 200-300 यात्री फंसे है जिन्हें रास्ता खुलने का इंतजार है।

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उधमपुर में सरकारी राहत नहीं मिलने पर उबले लोग

due to flood passengers stuck at jammu bus stand

मकान क्षतिग्रस्त होने के बाद राज्य सरकार और जिला प्रशासन की तरफ से किसी तरह की मदद नहीं मिलने पर संबल, चैरी स्याल और रेलवे रोड के प्रभावित परिवारों ने डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान धार रोड पर वाहनों की आवाजाही भी बंद की। सोमवार दोपहर को लोगों ने डीसी कार्यालय के बाहर धरना देकर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू की।

इस दौरान राज अली, फरीद, संजय, राजेश कुमार और अन्य कई लोगों ने बताया कि चार दिन कहर बरसाने वाली बारिश ने उनका सब कुछ नष्ट कर दिया है। उनका आशियाना पूरी तरह से तबाह हो चुका है। मकान गिर जाने के बाद कोई पड़ोसी के घर तो कोई टेंट के नीचे जीवन गुजार रहा है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार की तरफ से लगातार राहत पहुंचाने का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन उनकी सुध लेने के लिए अभी तक कोई सरकारी कर्मचारी तक नहीं पहुंचा है।

सभी अपने परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। मकान क्षतिग्रस्त होने के साथ ही उनका हजारों का जरूरत का सामान भी मलबे में दब चुका है। इसलिए उनकी मांग है कि जल्द से जल्द प्रशासन और राज्य सरकार उन तक सरकारी सहायता पहुंचाए। अगर जल्द मदद नहीं मिली तो सभी सड़कों पर उतर बड़ा आंदोलन छेड़ने को मजबूर हो जाएंगे।

मेंढर में मदद के लिए 300 आवेदन

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कश्मीर घाटी की तरह मेंढर में भी बाढ़ ने जमकर कहर बरपाया है। तहसील कार्यालय में सोमवार को भी बाढ़ पीडि़तों ने मुआवजे के लिए आवेदन किया। तहसील कार्यालय में अब तक तीस सौ पीडि़त अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। ये वे लोग हैं, जिन्होंने जिनके मकान ढह गए हैं और फसलें बर्बाद हो गई हैं। तहसील के दूरदराज के गांव में बाढ़ की चपेट में आने से लोगों ने परिवार सहित सुरक्षित स्थानों पर पनाह ले रखी थी।

पानी जब उतरा तो ग्रामीणों ने घरों और फसलों को तबाह देखा। सबकुछ गंवा बैठे पीडि़त सोमवार को भी बड़ी संख्या में तहसील कार्यालय में देखे गए। यहां पीडि़त मुआवजे पाने के लिए आवेदन कर रहे हैं। रविवार को भी तहसील में बड़ी भीड़ रही। सोमवार को दूरदराज के पीडि़त भी पहुंचे। शाम तक तीन सौ आवदेन जमा किए जा चुके थे। बाढ़ पीडि़तों की मांग को देखते हुए एसडीएम नौशेरा ने एक टीम का गठन किया है।

यह टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर नुकसान का आकलन करेगी। जिन लोगों ने मुआवजे के लिए आवेदन किया है, उनके गांव जाकर विशेष रूप से जायजा लिया जाएगा। बाढ़ में तहसील के कई गांव डूब गए थे। कई पुल ढह गए हैं। संचार सेवाएं भी ठप हैं। बिजली और पानी की किल्लत है। राशन के लिए लोग जूझ रहे हैं। यातायात सेवा अब तक बहाल नहीं की जा सकी है। गांवों को जोड़ने वाली कई सड़कें पूरी तरह बह गई हैं।

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दोमाना में चार मकान तबाह

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भारी बारिश से ब्लाक भलवाल के दूरदराज क्षेत्रों से भी तबाही के समाचार मिले हैं। पंचायत शवा में पस्सियां गिरने से तीन मकान बर्बाद हो गए। नगरोटा विधानसभा क्षेत्र की पंचायत शवा में नसरीन अख्तर का पहाड़ी से सटा मकान पस्सी आने से पूरी तरह बर्बाद हो गया।

मकान गिरने से पहले ही हालांकि परिवार के सात लोग घर छोड़ कर बाहर आ गए थे, जिससे जानी नुकसान नहीं हुआ। इसके अलावा मुख्तयार बीबी और जमात अलि का मकान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

नरगाड़ा में मोहम्मद हुसैन का मकान भी बारिश की भेंट चढ़ गया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से क्षेत्र का दौरा कर प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने की मांग की है।

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