Target Killing : सीमा पार से दहशत फैलाने की दोहरी साजिश, कश्मीर घाटी के लिए पाकिस्तान से दिए जा रहे हैं टारगेट
घाटी में बढ़ती गतिविधियों और पर्यटन में बूम से गेम प्लान बिगड़ते देख आईएसआई ने चुने साफ्ट टारगेट। सुरक्षा बलों की सख्ती से अब सुरक्षा बलों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले कर पाना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
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कश्मीर घाटी में लंबे समय बाद हालात सामान्य होने, श्रीनगर, गुलमर्ग, पहलगाम से लेकर पूरे कश्मीर में पर्यटकों की भरमार और आर्थिक गतिविधियों के पटरी पर लौटने से पाकिस्तान को अपना तीन दशक का गेम प्लान बिगड़ता नजर आ रहा है। सुरक्षा बलों की सख्ती से अब सुरक्षा बलों और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले कर पाना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस वजह से साफ्ट टारगेट को निशाना बनाकर दहशत फैलाने की साजिश है ताकि सामान्य गतिविधियों को झटका पहुंच सके। 30 जून से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा में खलल और श्रद्धालुओं को डराना भी इन हमलों की मकसद है।
सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ऐसे इनपुट हैं कि सुरक्षा बलों की सख्ती की वजह से आने वाले दिनों में लक्षित हत्या की घटनाएं बढ़ सकती हैं। इसलिए अल्पसंख्यकों तथा गैर-कश्मीरियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए। सूत्र बताते हैं कि पाकिस्तान ने कभी सक्रिय रहे हिजबुल मुजाहिदीन के ज्यादातर आतंकियों के मारे जाने के बाद लश्कर-ए-ताइबा तथा जैश-ए-मोहम्मद को आगे किया है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने के लिए इन आतंकी तंजीमों ने छद्म संगठन खड़े किए हैं। इन छद्म संगठनों को ही पाकिस्तान में बैठे कमांडरों की ओर से टारगेट सौंपे जाते हैं। सुरक्षा बलों से बचने के लिए इन्होंने हाइब्रिड आतंकियों की फौज लगभग सभी जिलों में तैयार की है। इन्हें पिस्टल देकर हत्या का टारगेट सौंपा जाता है। इसके बाद वे सामान्य जीवन में लौट आते हैं। सभी घटनाओं में हाइब्रिड आतंकियों के साथ ही सक्रिय आतंकियों का हाथ बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अमरनाथ यात्रा तक सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क तथा चौकस रहने की जरूरत है ताकि इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
हिंदुओं के साथ मुस्लिम भी निशाने पर, महिलाओं को भी नहीं बख्शा
दवा कारोबारी एमएल बिंदरू की हत्या के बाद कश्मीरी पंडितों तथा गैर कश्मीरियों पर हमले बढ़े हैं। इनमें हिंदू शिक्षकों, कश्मीरी पंडित कर्मचारी, गैर मुस्लिम मजदूर व रेहड़ीवाले टारगेट पर हैं। इन सबके अलावा आतंकियों ने पुलिस के उन कर्मचारियों को भी निशाना बनाया है जिन पर शक रहा। पाकिस्तान तो अब महिलाओं की हत्या कराने से भी पीछे नहीं हट रहा है। श्रीनगर में स्कूल में घुसकर सिख शिक्षक सुपिंदर कौर, टीवी कलाकार अमरीन भट के साथ ही सांबा निवासी स्कूल शिक्षक रजनी बाला को आतंकियों ने निशाना बनाया।
घाटी के माहौल में बदलाव आईएसआई को पच नहीं रहा : वैद
जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी डा. एसपी वैद कहते हैं कि हालिया आतंकी घटनाओं में बढ़ोतरी की साफ वजह दिखाई पड़ती है। अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी के माहौल में जो बदलाव आया है वह पाकिस्तान तथा आईएसआई को हजम नहीं हो रहा है। वह किसी भी कीमत पर यहां शांति को बाधित करने की साजिश में है। इसी वजह से निहत्थे लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
ऐसे लोगों की हत्याएं की जा रही हैं जो आसान शिकार हैं। सरकार की आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र को तोड़ने की कोशिश का असर दिखना शुरू हुआ है। आने वाले समय में यह और कारगर होगा। एक बार यह इको सिस्टम ध्वस्त हुआ तो फिर आतंकवाद तथा आतंकियों पर अंकुश पाते देरी नहीं लगेगी। सबसे जरूरी है कि स्थानीय लोग आतंकवाद, आतंकियों तथा पूरे इको सिस्टम के खिलाफ उठ खड़े हों। इसमें राजनीतिक दलों के लोगों को भी आगे आना चाहिए ताकि तीन दशक से खूनखराबा तथा हिंसा के दुष्चक्र से छुटकारा मिल सके।