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Jammu News: नन्ही टोर के लिए डोगरी लेखक पीएल परिहार को साहित्य पुरस्कार
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नन्हीं टोर के लेखक पीएल परिहार
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। साहित्य अकादमी नई दिल्ली की ओर से साहित्य अकादमी के वार्षिक पुरस्कार-2025 की घोषणा कर दी गई। इसमें बाल साहित्य कैटेगरी में जम्मू के डोगरी लेखक पीएल परिहार को साहित्य अकादमी के बाल पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार उनके बाल कविता संग्रह ‘नन्ही टोर’ के लिए दिया गया है। 2019 में प्रकाशित हुए इस बाल संग्रह में 101 कहानियां हैं।
पुराने शहर जम्मू में जन्मे पीएल परिहार वर्तमान में गोल गुजराल में रहते हैं। पेशे से शिक्षाविद रहे परिहार में कॉलेज के समय से ही लिखने के प्रति रुचि थी। परिहार ने बताया कि उन्होंने नन्ही टोर कविता संग्रह को 1984 में लिखना शुरू किया था। बीच में बीमार रहने के चलते पांच साल तक लेखन का काम बंद रहा।
उन्होंने कहा कि बीमारी के दौरान भी मेरे अंदर के कवि ने भी हिम्मत नहीं हारी। 2019 में जब पुस्तक का प्रकाशन हुआ था तो नहीं सोचा था कि एक दिन यह बाल साहित्य पुरस्कार जिताएगा। उन्होंने कहा कि अभी तक 10 किताबों का प्रकाशन कर चुका हैं। पांच किताबों का लेखन पूरा हैं और प्रकाशन होना है। एक उपन्यास पर काम चल रहा है।
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परिहार ने कहा कि हर कविता बच्चों को एक संदेश देती है। बुजुर्गों का सत्कार, लोक परंपराओं का पालन, अच्छा व्यवहार जैसे संदेश है। उन्होंने कहा कि कविता संग्रह में टिंड कविता है, जिसका विचार एक सच्ची घटना से मिला है।
युवा पीढ़ी डोगरी से दूर होती जा रही
डोगरी भाषा के भविष्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी डोगरी से दूर होती जा रही है। स्कूल में प्राथमिक स्तर से ही डोगरी को अनिवार्य करना होगा। कोई भी विषय हो शिक्षक को बच्चों को डोगरी में पढ़ाना चाहिए। उन्हें डोगरी भाषा अकादमी से डोगरी साहित्य में योगदान के लिए 2021 में सम्मान मिलने के साथ अन्य संस्थाओं से सम्मान मिला है।
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प्रकाशित पुस्तकें
कुंगली कुलार, साढ़ी दाती शीला बैंती, पैह्लियां घसूतडियां, गीता पटारू, नन्ही टोर, सुच्चा हिरख, गाओ महिमा, नीम क्हीम खतरा-ए-जान, चबूतरे दा सच्च, जींदे जमदूत।
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इस बार डोगरी में नहीं मिला युवा पुरस्कार
साहित्य अकादमी ने 23 लेखकाें को साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार-2025 के लिए अनुमोदित किया है। हालांकि, इस बार डोगरी भाषा में कोई पुरस्कार नहीं है। डोगरी पुस्तकों की दो ही प्रविष्टि मिली थी। साहित्य अकादमी के नियमों के हिसाब से कम से कम चार प्रविष्टि मिलना चाहिए तक जाकर पुरस्कार की घोषणा हो सकती है।
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जम्मू। साहित्य अकादमी नई दिल्ली की ओर से साहित्य अकादमी के वार्षिक पुरस्कार-2025 की घोषणा कर दी गई। इसमें बाल साहित्य कैटेगरी में जम्मू के डोगरी लेखक पीएल परिहार को साहित्य अकादमी के बाल पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार उनके बाल कविता संग्रह ‘नन्ही टोर’ के लिए दिया गया है। 2019 में प्रकाशित हुए इस बाल संग्रह में 101 कहानियां हैं।
पुराने शहर जम्मू में जन्मे पीएल परिहार वर्तमान में गोल गुजराल में रहते हैं। पेशे से शिक्षाविद रहे परिहार में कॉलेज के समय से ही लिखने के प्रति रुचि थी। परिहार ने बताया कि उन्होंने नन्ही टोर कविता संग्रह को 1984 में लिखना शुरू किया था। बीच में बीमार रहने के चलते पांच साल तक लेखन का काम बंद रहा।
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उन्होंने कहा कि बीमारी के दौरान भी मेरे अंदर के कवि ने भी हिम्मत नहीं हारी। 2019 में जब पुस्तक का प्रकाशन हुआ था तो नहीं सोचा था कि एक दिन यह बाल साहित्य पुरस्कार जिताएगा। उन्होंने कहा कि अभी तक 10 किताबों का प्रकाशन कर चुका हैं। पांच किताबों का लेखन पूरा हैं और प्रकाशन होना है। एक उपन्यास पर काम चल रहा है।
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परिहार ने कहा कि हर कविता बच्चों को एक संदेश देती है। बुजुर्गों का सत्कार, लोक परंपराओं का पालन, अच्छा व्यवहार जैसे संदेश है। उन्होंने कहा कि कविता संग्रह में टिंड कविता है, जिसका विचार एक सच्ची घटना से मिला है।
युवा पीढ़ी डोगरी से दूर होती जा रही
डोगरी भाषा के भविष्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी डोगरी से दूर होती जा रही है। स्कूल में प्राथमिक स्तर से ही डोगरी को अनिवार्य करना होगा। कोई भी विषय हो शिक्षक को बच्चों को डोगरी में पढ़ाना चाहिए। उन्हें डोगरी भाषा अकादमी से डोगरी साहित्य में योगदान के लिए 2021 में सम्मान मिलने के साथ अन्य संस्थाओं से सम्मान मिला है।
प्रकाशित पुस्तकें
कुंगली कुलार, साढ़ी दाती शीला बैंती, पैह्लियां घसूतडियां, गीता पटारू, नन्ही टोर, सुच्चा हिरख, गाओ महिमा, नीम क्हीम खतरा-ए-जान, चबूतरे दा सच्च, जींदे जमदूत।
इस बार डोगरी में नहीं मिला युवा पुरस्कार
साहित्य अकादमी ने 23 लेखकाें को साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार-2025 के लिए अनुमोदित किया है। हालांकि, इस बार डोगरी भाषा में कोई पुरस्कार नहीं है। डोगरी पुस्तकों की दो ही प्रविष्टि मिली थी। साहित्य अकादमी के नियमों के हिसाब से कम से कम चार प्रविष्टि मिलना चाहिए तक जाकर पुरस्कार की घोषणा हो सकती है।