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तीन दिन बाद डाक्टरों की हड़ताल खत्म

Sat, 07 Feb 2015 12:18 PM IST
Updated Sat, 07 Feb 2015 12:18 PM IST
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doctors strike over after 3 days in jammu

जीएमसी में तीन दिन बाद शुक्रवार की शाम पीजी डाक्टर और रजिस्ट्रारों ने सुरक्षा सहित कई अन्य बिंदुओं पर समझौते के बाद हड़ताल वापस ले ली। जीएमसी प्रशासन के साथ ढाई घंटे चली मैराथन बैठक के बाद शाम चार बजे इमरजेंसी में जूनियर डाक्टरों ने सेवाएं बहाल कर दीं। शनिवार से रुटीन आपरेशन और ओपीडी बहाल रहेगी।

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जीएमसी के प्रिंसिपल डा. घनश्याम देव गुप्ता के अनुसार डाक्टरों की सभी मांगें मान ली गई हैं। सभी चिकित्सा सेवाएं सामान्य कर दी गई हैं। जीएमसी के कांफ्रेंस हॉल में दोपहर दो बजे बैठक शुरू हुई। इसमें जिला उपायुक्त एके साहू, पुलिस विभाग के प्रशासनिक अधिकारी, एसोसिएटेड अस्पतालों के एचओडी और जूनियर डाक्टरों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
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बैठक में पीजी डाक्टरों ने सुरक्षा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। डा. नीरज शर्मा ने कहा कि पहले भी आश्वासन दिए गए हैं, लेकिन तीमारदारों की ओर से मारपीट के मामलों के साथ पर्याप्त सुरक्षा को लेकर कुछ नहीं किया गया। इस पर अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में डाक्टरों की सुरक्षा पुख्ता बनाई जाएगी। दोनों पक्षों के कई सुझावों के बाद बैठक में कई आर्डर जारी किए गए।
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इसमें मारपीट के मामले में दो घंटे के भीतर एफआईआर लगाने, कैजुल्टी में सुरक्षा की जिम्मेदारी राउंड द क्लाक एक मेडिकल अफसर पर रहेगी, इमरजेंसी में एक मरीज के साथ दो तीमारदार रखने, दो गेट पास ही जारी करने, 9 फरवरी को शाम चार बजे कैजुल्टी की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों और डाक्टरों की बैठक करने, सात फरवरी को जीएमसी अधीक्षक के साथ दोपहर 12 बजे बैठक में सुरक्षा इंतजामों पर चर्चा करने आदि के लिए आदेश जारी किए गए। बैठक के बाद वीरवार शाम छह बजे तक जनरल वार्डों में जूनियर डाक्टरों की तैनाती शुरू हो गई थी।

तीन दिन तक दर्द सहते रहे मरीज

doctors strike over after 3 days in jammu

पीजी डाक्टरों और रजिस्ट्रारों की हड़ताल भले ही शुक्रवार तीसरे दिन खत्म हो गई, लेकिन इस घटनाक्रम में तीन दिन तक जीएमसी में इलाज के लिए मरीज तरसते रहे। शुक्रवार को भी रुटीन आपरेशन और ओपीडी स्थगित होने से मरीजों के साथ तीमारदारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।

कई मरीजों ने निजी क्लीनिकों का सहारा लिया। जनरल वार्डों से भी कई मरीजों को छुट्टी देने पर तीमारदारों ने विरोध जताया। इमरजेंसी में पीजी और रजिस्ट्रारों की कमी से सीनियर कंसल्टेंटों की उपलब्धता के बावजूद मरीजों को उचित इलाज के लिए तरसना पड़ा। हड़ताल का असर एसएमजीएस पर भी रहा। यहां भी पीजी डाक्टरों ने कामकाज ठप रखा।

शुक्रवार को भी इलाज के लिए मरीज दिनभर भटकते रहे। हड़ताल का जनरल वार्डों पर ज्यादा असर दिखा। तीमारदारों की शिकायत थी कि कोई भी डाक्टर उन्हें देखने नहीं आ रहा। इसका बड़ा कारण कंसल्टेंटों के इमरजेंसी विंग को संभालना था। डाक्टरों की कमी से जनरल वार्डों से कई पुराने मरीजों को छुट्टी दी गई।

जिसका लोगों ने विरोध किया। उनका कहना था कि वे पहले ही परेशान होकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे हैं और मरीजों की हालत गंभीर होने पर भी उन्हें घर जाने को कहा जा रहा है। इमरजेंसी में कई मरीज इलाज के लिए इंतजार करते दिखे। इस बीच तीसरे दिन भी हड़ताल के चलते शहर के अन्य सरवाल और गांधीनगर अस्पतालों में मरीजों का लोड अधिक रहा। यहां आम दिनों के मुकाबले इलाज के लिए अधिक मरीज पहुंचे।

सरवाल अस्पताल में जानीपुर से मरीज के साथ पहुंचे राजू दत्ता ने कहा कि वे पहले जीएमसी गए थे, लेकिन वहां उचित इलाज न मिलने के कारण उन्हें सरवाल अस्पताल आना पड़ा। उन्होंने कहा कि हड़ताल की सूरत में बेहतर वैकल्पिक व्यवस्थाएं होनी चाहिए। इस बीच सुबह बारह बजे पीजी डाक्टरों ने जीएमसी कालेज परिसर में रैली निकाल विरोध जताया।

उनका आरोप था कि गत दिवस इमरजेंसी में मारपीट की घटना के मामले में एफआईआर को लेकर पुलिस और जीएमसी प्रशासन की ओर से गुमराह किया जाता रहा। अगर एफआईआर पहले की जाती तो हड़ताल खत्म हो सकती थी।

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