जम्मू-कश्मीर में तेजी से फैल रही है ये बीमारी
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रियासत में बरसात की दस्तक के साथ डायरिया की दस्तक होने लगी है। जम्मू संभाग के कई ग्रामीण क्षेत्रों के बाद शहरी इलाकों में भी डायरिया के मामले बढ़ने लगे हैं। शहरी अस्पतालों में डायरिया और डिसेंट्री से पीड़ितों की संख्या बढ़ी है। दूषित पानी के कारण पेट संबंधी बीमारियों में इजाफा हुआ है।
इसमें बच्चे ज्यादा चपेट में आ रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में दूरवर्ती इलाकों में विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी लोगों की सेहत और ढीली कर रही है। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार बरसात में पीने के पानी के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों पर निर्भर ग्रामीण क्षेत्रों में डायरिया की शिकायत ज्यादा रहती है।
इसमें पीड़ित को दस्त और उल्टी या दोनों में से एक की समस्या रहने पर हालत अचानक खराब हो जाती है। अस्पताल की इमरजेंसी में ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहरों से भी ऐसे मामले पहुंच रहे हैं। इसमें दूषित पानी मुख्य कारण है। शहर में टूटे पाइपों और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोतों के किन्हीं कारणों के खराब होने से डायरिया की समस्या आती है।
ई कोली बैक्टीरिया ज्यादा सक्रिय
हाल ही में कोट भलवाल के एक गांव में सैकड़ों लोगों को डायरिया की शिकायत हुई थी। शारीरिक रूप से कमजोर होने के कारण बच्चे डायरिया की चपेट में ज्यादा आते हैं। तापमान बढ़ने पर ई कोली बैक्टीरिया ज्यादा सक्रिय रहता है, जो डायरिया की मुख्य वजह होता है। इसमें दूषित पानी का सेवन करने से उल्टी और दस्त के साथ हलका या तेज बुखार रहता है।
डायरिया के लक्षण में एक ही दिन में तीन से ज्यादा बार दस्त आना रहता है। इसमें दस्त पहले और बाद में किस तरह से आई, उस पर भी डायरिया निर्भर करता है। अस्पताल में ऐसे कई शिशु रोगी पहुंच रहे हैं। जम्मू संभाग के कठुआ जिले के बिलावर, महानपुर, उधमपुर जिले के रामनगर, रियासी, जिला राजोरी आदि ग्रामीण क्षेत्र डायरिया से प्रभावित रहे हैं।
पिछले कुछ सालों में डायरिया कई लोगों की जान ले चुका है। स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डा. बलजीत सिंह पठानिया के अनुसार बरसात को देखते हुए जिला स्तर पर सभी जरूरी दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। प्राकृतिक जल स्रोतों वाले स्थानों पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।