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ढांगरी नरसंहार : पुंछ के निसार और मुश्ताक पर आतंकियों को शरण देने व साजिश में मदद के आरोप तय
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-सबूत गायब करने और आतंकियों का मार्गदर्शक बनने के भी आरोप
-तीन माह लश्कर कमांडर साजिद के कहने पर आतंकियों को अपने पास रखा
-नरसंहार में 7 हिंदुओं की गोली मारकर व आईईडी से विस्फोट कर की थी हत्या
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राजोरी के ढांगरी नरसंहार मामले में पुंछ के निसार अहमद उर्फ हाजी निसार और मुश्ताक हुसैन उर्फ चाचा के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं। दोनों पर आतंकियों को शरण व भोजन देने, साजिश रचने, सबूतों को मिटाने और आतंकियों का मार्गदर्शक बनने समेत कई आरोप हैं।जनवरी 2023 में हुए इस नरसंहार में एक बच्चे समेत 7 लोगों की जान चली गई थी।
एनआईए ने निसार और मुश्ताक को इस मामले में गिरफ्तार किया था। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने लश्कर कमांडर साजिद जट्ट के कहने पर नरसंहार करने वाले आतंकियों को तीन महीने तक अपने पास पनाह दी थी। एनआईए की विशेष अदालत ने दलीलें सुनने के बाद इन पर आपराधिक साजिश रचने, सबूतों को गायब करने और आतंकियों का साथ देने समेत कई आरोप तय किए।
विशेष न्यायाधीश एनआईए संदीप गंडोत्रा ने कहा कि दोनों पर बेहद गंभीर आरोप हैं। मामले में पेश किए गए रिकॉर्ड से स्पष्ट नजर आता है कि दोनों ने न सिर्फ आतंकियों को भोजन और आश्रय दिया, बल्कि मार्गदर्शक बनकर आतंकियों को ढांगरी तक पहुंचाया। दोनों लगभग तीन महीने तक आतंकियों के लगातार संपर्क में रहे और कई अवसर मिलने के बावजूद किसी को भी उनके बारे में नहीं बताया। अपनी अवैध गतिविधियों के लिए एक नाबालिग की सेवाओं का भी उपयोग किया। दोनों के विरुद्ध इस मामले में अपराध करने में शामिल होने के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
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फ्लैशबैक : आतंकियों ने ढांगरी के हिंदू परिवारों की पहचान कर बरसाई थीं गोलियां
1 जनवरी 2023 को राजोरी के ढांगरी में तीन से चार आतंकी घुसे। गांव में हिंदू परिवारों की पहचान करके उनको गोली मार दी। शाम 7 बजे घुसे आतंकियों की गोलीबारी में दीपक कुमार, सतीश कुमार, प्रीतम लाल, शिशू पाल और प्रिंस शर्मा की मौत हो गई। शुभ शर्मा, रोहित शर्मा, सरोज बाला, आरुषि शर्मा और पवन कुमार घायल हुए।
जाते वक्त सरोज बाला के घर में लगा दी आईईडी
इस हमले को अंजाम देने के बाद आतंकी जाते वक्त सरोज बाला के घर आईईडी लगा गए। 2 जनवरी को जब सुबह सरोज के घर लोग पहुंचे तो आईईडी विस्फोट हो गया। इसमें विहान और समीक्षा शर्मा की मौत हो गई। कई अन्य घायल हो गए।
लश्कर कमांडर साजिद जट्ट ने रची थी साजिश
एनआईए ने की जांच में यह भी सामने आया कि इस हमले की साजिश लश्कर कमांडर साजिद जट्ट ने रची थी। इस साजिश का निर्देश लश्कर सरगना हाफिज सईद ने दिया था। दोनों पाकिस्तान में हैं। साजिद जट्ट ने सीमा पार से आतंकियों को भेजा। इनकी मदद के लिए निसार अहमद उर्फ हाजी निसार और मुश्ताक हुसैन उर्फ चाचा को तैयार किया। दोनों को इस साजिश के लिए करीब 10 लाख रुपये दिए गए।
आरोपियों ने खुद को बताया निर्दोष
दोनों आरोपी इस समय जम्मू की कोट भलवाल सेंट्रल जेल में बंद हैं। आरोपियों से उनके वकीलों की मौजूदगी में वर्चुअल माध्यम से पूछा गया कि क्या वे दोषी हैं या मुकदमा चलाने का दावा करते हैं। आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाने का दावा किया।
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आरोपियों पर इन धाराओं में आरोप तय
-आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र)
-201 (साक्ष्य मिटाना)
-धारा 83 किशोर न्याय अधिनियम
-गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) में धारा 18, 19, 20, 38, 39
धारा 18 (षड्यंत्र के लिए सजा)
-धारा 19 (आतंकी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध)
-धारा 20 (आतंकी समूह की सदस्यता से संबंधित अपराध)
-धारा 38 एवं 39 (आतंकी संगठन को समर्थन देने से संबंधित अपराध)
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-तीन माह लश्कर कमांडर साजिद के कहने पर आतंकियों को अपने पास रखा
-नरसंहार में 7 हिंदुओं की गोली मारकर व आईईडी से विस्फोट कर की थी हत्या
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। राजोरी के ढांगरी नरसंहार मामले में पुंछ के निसार अहमद उर्फ हाजी निसार और मुश्ताक हुसैन उर्फ चाचा के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं। दोनों पर आतंकियों को शरण व भोजन देने, साजिश रचने, सबूतों को मिटाने और आतंकियों का मार्गदर्शक बनने समेत कई आरोप हैं।जनवरी 2023 में हुए इस नरसंहार में एक बच्चे समेत 7 लोगों की जान चली गई थी।
एनआईए ने निसार और मुश्ताक को इस मामले में गिरफ्तार किया था। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने लश्कर कमांडर साजिद जट्ट के कहने पर नरसंहार करने वाले आतंकियों को तीन महीने तक अपने पास पनाह दी थी। एनआईए की विशेष अदालत ने दलीलें सुनने के बाद इन पर आपराधिक साजिश रचने, सबूतों को गायब करने और आतंकियों का साथ देने समेत कई आरोप तय किए।
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विशेष न्यायाधीश एनआईए संदीप गंडोत्रा ने कहा कि दोनों पर बेहद गंभीर आरोप हैं। मामले में पेश किए गए रिकॉर्ड से स्पष्ट नजर आता है कि दोनों ने न सिर्फ आतंकियों को भोजन और आश्रय दिया, बल्कि मार्गदर्शक बनकर आतंकियों को ढांगरी तक पहुंचाया। दोनों लगभग तीन महीने तक आतंकियों के लगातार संपर्क में रहे और कई अवसर मिलने के बावजूद किसी को भी उनके बारे में नहीं बताया। अपनी अवैध गतिविधियों के लिए एक नाबालिग की सेवाओं का भी उपयोग किया। दोनों के विरुद्ध इस मामले में अपराध करने में शामिल होने के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
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फ्लैशबैक : आतंकियों ने ढांगरी के हिंदू परिवारों की पहचान कर बरसाई थीं गोलियां
1 जनवरी 2023 को राजोरी के ढांगरी में तीन से चार आतंकी घुसे। गांव में हिंदू परिवारों की पहचान करके उनको गोली मार दी। शाम 7 बजे घुसे आतंकियों की गोलीबारी में दीपक कुमार, सतीश कुमार, प्रीतम लाल, शिशू पाल और प्रिंस शर्मा की मौत हो गई। शुभ शर्मा, रोहित शर्मा, सरोज बाला, आरुषि शर्मा और पवन कुमार घायल हुए।
जाते वक्त सरोज बाला के घर में लगा दी आईईडी
इस हमले को अंजाम देने के बाद आतंकी जाते वक्त सरोज बाला के घर आईईडी लगा गए। 2 जनवरी को जब सुबह सरोज के घर लोग पहुंचे तो आईईडी विस्फोट हो गया। इसमें विहान और समीक्षा शर्मा की मौत हो गई। कई अन्य घायल हो गए।
लश्कर कमांडर साजिद जट्ट ने रची थी साजिश
एनआईए ने की जांच में यह भी सामने आया कि इस हमले की साजिश लश्कर कमांडर साजिद जट्ट ने रची थी। इस साजिश का निर्देश लश्कर सरगना हाफिज सईद ने दिया था। दोनों पाकिस्तान में हैं। साजिद जट्ट ने सीमा पार से आतंकियों को भेजा। इनकी मदद के लिए निसार अहमद उर्फ हाजी निसार और मुश्ताक हुसैन उर्फ चाचा को तैयार किया। दोनों को इस साजिश के लिए करीब 10 लाख रुपये दिए गए।
आरोपियों ने खुद को बताया निर्दोष
दोनों आरोपी इस समय जम्मू की कोट भलवाल सेंट्रल जेल में बंद हैं। आरोपियों से उनके वकीलों की मौजूदगी में वर्चुअल माध्यम से पूछा गया कि क्या वे दोषी हैं या मुकदमा चलाने का दावा करते हैं। आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाने का दावा किया।
आरोपियों पर इन धाराओं में आरोप तय
-आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र)
-201 (साक्ष्य मिटाना)
-धारा 83 किशोर न्याय अधिनियम
-गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) में धारा 18, 19, 20, 38, 39
धारा 18 (षड्यंत्र के लिए सजा)
-धारा 19 (आतंकी संगठन की सदस्यता से संबंधित अपराध)
-धारा 20 (आतंकी समूह की सदस्यता से संबंधित अपराध)
-धारा 38 एवं 39 (आतंकी संगठन को समर्थन देने से संबंधित अपराध)