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नशीले पदार्थों का कारोबार बन रहा चुनौती : डीजीपी
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- कहा - जम्मू-कश्मीर को नहीं बनने देंगे पंजाब, नशे पर प्रतिबंध के लिए प्रदेश पुलिस सख्त
- पाकिस्तान से बड़े पैमाने पर हेरोइन और ब्राउन शूगर भेजी जा रही
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों का कारोबार चुनौती बन रहा है। इससे निपटने के लिए दोनों तरफ कार्रवाई होगी, जिस तरह आतंकियों को शरण देने और अन्य साजो-सामान मुहैया कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की, उसी तरह की रणनीति नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ की जा रही है। यह बात डीजीपी आरआर स्वैन ने वीरवार को छन्नी में नशा मुक्ति केंद्र का उद्घाटन करने के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि हम जम्मू-कश्मीर को पंजाब नहीं बनने देंगे। पुलिस गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल अपराधियों की संपत्तियां कुर्क कर रही है। खासकर नारको टेरर में शामिल लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। नशीले पदार्थों के कारोबार से निपटना एक कठिन काम है, लेकिन पुलिस इसे संभालने के लिए प्रतिबद्ध है। जम्मू-कश्मीर एक सीमावर्ती राज्य है। यहां हेरोइन और ब्राउन शुगर की बड़ी खेप पाकिस्तान से आ रही हैं। पहले स्थानीय स्तर पर चरस की चुनौती थी और भागीदारी सीमित थी, लेकिन अब भागीदारी अधिक है, क्योंकि हीरोइन और ब्राउन शुगर को बड़ी मात्रा में इस तरफ धकेला जाता है। यही हाल पंजाब का था और अब जम्मू-कश्मीर में भी यह बढ़ रहा है। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में पुलिस के 10 नशा मुक्ति केंद्र संचालित हैं। ये नशा पीड़ितों की संख्या की तुलना में कम हैं। पुलिस इस बात का आकलन करेगी कि यह संख्या वर्तमान में कहां है और 2025 में कहां होगी। डीजीपी ने एक ऐसी रणनीति की वकालत की, जिसमें पंजाब के साथ भी समन्वय बनाए रखने की जरूरत है।
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- पाकिस्तान से बड़े पैमाने पर हेरोइन और ब्राउन शूगर भेजी जा रही
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों का कारोबार चुनौती बन रहा है। इससे निपटने के लिए दोनों तरफ कार्रवाई होगी, जिस तरह आतंकियों को शरण देने और अन्य साजो-सामान मुहैया कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की, उसी तरह की रणनीति नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ की जा रही है। यह बात डीजीपी आरआर स्वैन ने वीरवार को छन्नी में नशा मुक्ति केंद्र का उद्घाटन करने के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि हम जम्मू-कश्मीर को पंजाब नहीं बनने देंगे। पुलिस गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल अपराधियों की संपत्तियां कुर्क कर रही है। खासकर नारको टेरर में शामिल लोगों पर कार्रवाई की जा रही है। नशीले पदार्थों के कारोबार से निपटना एक कठिन काम है, लेकिन पुलिस इसे संभालने के लिए प्रतिबद्ध है। जम्मू-कश्मीर एक सीमावर्ती राज्य है। यहां हेरोइन और ब्राउन शुगर की बड़ी खेप पाकिस्तान से आ रही हैं। पहले स्थानीय स्तर पर चरस की चुनौती थी और भागीदारी सीमित थी, लेकिन अब भागीदारी अधिक है, क्योंकि हीरोइन और ब्राउन शुगर को बड़ी मात्रा में इस तरफ धकेला जाता है। यही हाल पंजाब का था और अब जम्मू-कश्मीर में भी यह बढ़ रहा है। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में पुलिस के 10 नशा मुक्ति केंद्र संचालित हैं। ये नशा पीड़ितों की संख्या की तुलना में कम हैं। पुलिस इस बात का आकलन करेगी कि यह संख्या वर्तमान में कहां है और 2025 में कहां होगी। डीजीपी ने एक ऐसी रणनीति की वकालत की, जिसमें पंजाब के साथ भी समन्वय बनाए रखने की जरूरत है।
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