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डीवीओ पोर्टल से आठ महीनों में 600 शिकायतों को निपटारा
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जम्मू। विभिन्न सरकारी विभागों से आने वाली शिकायतों का निपटारा करने के लिए डिपार्टमेंटल विजिलेंस ऑफिसर पोर्टल प्रभावी साबित हुआ है। पहले आठ महीनों में इस पोर्टल के माध्यम से 600 शिकायतों का निपटारा किया गया है। इतनी ही शिकायतों का निपटारा करने के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो को पहले सालों लग जाते थे।
जानकारी के अनुसार हर एक सरकारी विभाग में एक डिपार्टमेंटल विजिलेंस ऑफिसर डीवीओ नियुक्त है। जब भी किसी सरकारी विभाग के किसी अफसर या कर्मी के खिलाफ ब्यूरो के पास भ्रष्टाचार की शिकायत जाती है तो उसके बाद ब्यूरो संबंधित विभाग के डीवीओ के पास उक्त शिकायत की पुष्टि करने के लिए भेजता है। इस प्रक्रिया में कम से कम एक महीना लगता था। यह सारा काम डाक के जरिये होता था। कई बार रिकार्ड ही गुम हो जाता था और आरोपी जांच से भी बच जाते थे। लेकिन ब्यूरो की ओर से शुरू किए गए डीवीओ पोर्टल में अब जिस वक्त किसी कर्मी की जानकारी मांगी जाती है तो उसी वक्त पोर्टल में उसे रिकॉर्ड कर दिया जाता है। संबंधित डीवीओ को पोर्टल में ही इसकी जानकारी अपलोड करनी पड़ती है। पिछले सात महीने में एसीबी ने अपने पास विभिन्न विभागों की आने वाले शिकायतों में से 600 की जानकारी उक्त पोर्टल के माध्यम से मांगी और इसका जवाब भी यहीं पर आया। इतनी ही शिकायतों की जानकारी प्राप्त करने के लिए पहले एक से डेढ़ महीना लगता था। अब अधिकतम दस दिन में इसकी पूरी जांच हो रही है।
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600 से ज्यादा शिकायतों का निपटारा डीवीओ पोर्टल से किया गया है। यह काफी प्रभावी साबित हुआ है। सरकारी विभागों में कर्मियों को प्रमोशन के लिए दी जाने वाली एनओसी को लेकर भी पोर्टल बनाया गया है। इसमें पहले 10 से 12 दिन लग जाते थे। अब दो से तीन दिन में ही एनओसी दे रहे हैं।
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-आनंद जैन, निदेशक, एसीबी
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जानकारी के अनुसार हर एक सरकारी विभाग में एक डिपार्टमेंटल विजिलेंस ऑफिसर डीवीओ नियुक्त है। जब भी किसी सरकारी विभाग के किसी अफसर या कर्मी के खिलाफ ब्यूरो के पास भ्रष्टाचार की शिकायत जाती है तो उसके बाद ब्यूरो संबंधित विभाग के डीवीओ के पास उक्त शिकायत की पुष्टि करने के लिए भेजता है। इस प्रक्रिया में कम से कम एक महीना लगता था। यह सारा काम डाक के जरिये होता था। कई बार रिकार्ड ही गुम हो जाता था और आरोपी जांच से भी बच जाते थे। लेकिन ब्यूरो की ओर से शुरू किए गए डीवीओ पोर्टल में अब जिस वक्त किसी कर्मी की जानकारी मांगी जाती है तो उसी वक्त पोर्टल में उसे रिकॉर्ड कर दिया जाता है। संबंधित डीवीओ को पोर्टल में ही इसकी जानकारी अपलोड करनी पड़ती है। पिछले सात महीने में एसीबी ने अपने पास विभिन्न विभागों की आने वाले शिकायतों में से 600 की जानकारी उक्त पोर्टल के माध्यम से मांगी और इसका जवाब भी यहीं पर आया। इतनी ही शिकायतों की जानकारी प्राप्त करने के लिए पहले एक से डेढ़ महीना लगता था। अब अधिकतम दस दिन में इसकी पूरी जांच हो रही है।
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600 से ज्यादा शिकायतों का निपटारा डीवीओ पोर्टल से किया गया है। यह काफी प्रभावी साबित हुआ है। सरकारी विभागों में कर्मियों को प्रमोशन के लिए दी जाने वाली एनओसी को लेकर भी पोर्टल बनाया गया है। इसमें पहले 10 से 12 दिन लग जाते थे। अब दो से तीन दिन में ही एनओसी दे रहे हैं।
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-आनंद जैन, निदेशक, एसीबी