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Jammu News: नाव का सफर सड़क से बेहतर, दो दर्जन गांवों के लोग हो रहे आर-पार
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खौड़ और ज्यौड़ियां जाने के लिए परगवाल के लोगों की पहली पसंद बनी नाव
संवाद न्यूज एजेंसी
परगवाल। चिनाब पर बन रहे पुल से होकर दरिया पार जाने का सपना पूरा होने में अभी थोड़ा समय लगेगा। लेकिन, मौजूदा समय में दरिया में चलने वाली नाव हर रोज सैकड़ों लोगों को इस पार से उस पार लगा रही है। परगवाल क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों के लोग इसका लाभ ले रहे हैं। उन्हें नाव का सफर सड़क से बेहतर लगने लगा है।
जानकारी के अनुसार प्रतिदिन करीब चार से पांच सौ लोग नाव से दरिया पार कर रहे हैं। नाव से दरिया पार कर रहे स्थानीय सुभाष सिंह ने बताया कि वह राशन कार्ड के सिलसिले में खाद्य आपूर्ति विभाग के कार्यालय खौड़ जा रहे थे, जो चिनाब के दूसरी तरफ पड़ता है। उनके लिए नाव ही सबसे सस्ता साधन है, क्योंकि इससे पैसे के साथ समय की भी बचत होती है। नाव न चलने से उन्हें खौड़ पहुंचने के लिए करीब 50 किमी का सफर तय करना पड़ता है, जो समय के साथ जेब पर भी भारी पड़ता है। वहीं, नाव से चिनाब पार कर यह सफर मात्र 10 किमी का रह जाता है।
बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधीन चलने वाली नाव पर चिनाब पार करने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता। हालांकि, बरसात के दिनों में या पानी का बहाव बढ़ जाने पर यह नाव कुछ महीनों के लिए बंद हो जाती है। लेकिन, मौजूदा समय में ज्यादातर लोग ज्यौड़ियां और खौड़ नाव पर ही जाना पसंद कर रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
परगवाल। चिनाब पर बन रहे पुल से होकर दरिया पार जाने का सपना पूरा होने में अभी थोड़ा समय लगेगा। लेकिन, मौजूदा समय में दरिया में चलने वाली नाव हर रोज सैकड़ों लोगों को इस पार से उस पार लगा रही है। परगवाल क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों के लोग इसका लाभ ले रहे हैं। उन्हें नाव का सफर सड़क से बेहतर लगने लगा है।
जानकारी के अनुसार प्रतिदिन करीब चार से पांच सौ लोग नाव से दरिया पार कर रहे हैं। नाव से दरिया पार कर रहे स्थानीय सुभाष सिंह ने बताया कि वह राशन कार्ड के सिलसिले में खाद्य आपूर्ति विभाग के कार्यालय खौड़ जा रहे थे, जो चिनाब के दूसरी तरफ पड़ता है। उनके लिए नाव ही सबसे सस्ता साधन है, क्योंकि इससे पैसे के साथ समय की भी बचत होती है। नाव न चलने से उन्हें खौड़ पहुंचने के लिए करीब 50 किमी का सफर तय करना पड़ता है, जो समय के साथ जेब पर भी भारी पड़ता है। वहीं, नाव से चिनाब पार कर यह सफर मात्र 10 किमी का रह जाता है।
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बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधीन चलने वाली नाव पर चिनाब पार करने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता। हालांकि, बरसात के दिनों में या पानी का बहाव बढ़ जाने पर यह नाव कुछ महीनों के लिए बंद हो जाती है। लेकिन, मौजूदा समय में ज्यादातर लोग ज्यौड़ियां और खौड़ नाव पर ही जाना पसंद कर रहे हैं।
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