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Jammu News: बिना डॉक्टरी परामर्श घर पर इलाज पड़ रहा भारी, अस्पतालों में डेंगू के मरीज गंभीर हालत में पहुंच रहे
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। बिना डॉक्टरी परामर्श घर पर इलाज डेंगू के मरीजों के लिए भारी पड़ रहा है। शहर के अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज गंभीर अवस्था में पहुंच रहे हैं। इसका बड़ा कारण खुद से इलाज लेना और हालत बिगड़ने पर ही अस्पताल का रुख करना है। ताजा मामलों में मरीजों में प्लेटलेट की कमी पाई जा रही है। उधमपुर के दो लोगों की मौत का कारण भी प्लेटलेट की कमी के कारण गंभीर होना बताया जा रहा है।
जीएमसी की इमरजेंसी के वार्ड दो के अलावा मुख्य वार्ड 3 में करीब 42 बिस्तर डेंगू के मरीजों के लिए हैं। अब तक 200 से अधिक मरीज भर्ती हो चुके हैं, जिनमें 24 को उपचार दिया जा रहा है। इसी तरह जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 डेंगू लक्षण वाले बाल रोगियों को भर्ती किया जा रहा है। गांधीनगर अस्पताल में भी करीब 10 मरीज प्रतिदिन भर्ती हो रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण योगराज के अनुसार डेंगू की पुष्टि के बाद पीड़ित को शीघ्र डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। देसी टोटकों से परहेज करना चाहिए। ऐसे मामलों में कई बार पीड़ित की हालत अधिक खराब हो जाती है। कई मरीजों को प्लेटलेट की कमी और अन्य शारीरिक समस्याएं होने पर वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ता है।
वहीं, जीएमसी से कई तीमारदार मरीजों को लामा (लीविंग एगेंस्ट मेडिकल एडवाइस) के आधार पर दूसरे अस्पतालों में ले जा रहे हैं। डेंगू के ऐसे 6 मरीज दूसरे अस्पतालों में चले गए हैं।
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शहर के ये इलाके प्रभावित
शहर के लगभग हिस्सों में डेंगू दस्तक दे चुका है। अब तक जीएमसी में दलपत्तियां मोहल्ला, उस्ताद मोहल्ला, बनतालाब, घो मन्हासा, पलौड़ा, महेशपुरा, गाढ़ीगढ़, जुल्लाका मोहल्ला, बावे, तालाब तिल्लो, त्रिकुटा नगर, फ्लायं मंडाल, कृष्णा नगर, जैन बाजार, पक्की ढक्की, शहीदी चौक, भगवती नगर, छन्नी रामा, भठिंडी, सुभाष नगर, प्रीत नगर, रूप नगर, डिग्याना, त्रिकुटा नगर, मीरां साहिब, गंग्याल, सतवारी आदि से डेंगू के मामले पहुंचे हैं।
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जम्मू। बिना डॉक्टरी परामर्श घर पर इलाज डेंगू के मरीजों के लिए भारी पड़ रहा है। शहर के अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज गंभीर अवस्था में पहुंच रहे हैं। इसका बड़ा कारण खुद से इलाज लेना और हालत बिगड़ने पर ही अस्पताल का रुख करना है। ताजा मामलों में मरीजों में प्लेटलेट की कमी पाई जा रही है। उधमपुर के दो लोगों की मौत का कारण भी प्लेटलेट की कमी के कारण गंभीर होना बताया जा रहा है।
जीएमसी की इमरजेंसी के वार्ड दो के अलावा मुख्य वार्ड 3 में करीब 42 बिस्तर डेंगू के मरीजों के लिए हैं। अब तक 200 से अधिक मरीज भर्ती हो चुके हैं, जिनमें 24 को उपचार दिया जा रहा है। इसी तरह जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 डेंगू लक्षण वाले बाल रोगियों को भर्ती किया जा रहा है। गांधीनगर अस्पताल में भी करीब 10 मरीज प्रतिदिन भर्ती हो रहे हैं। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रवीण योगराज के अनुसार डेंगू की पुष्टि के बाद पीड़ित को शीघ्र डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। देसी टोटकों से परहेज करना चाहिए। ऐसे मामलों में कई बार पीड़ित की हालत अधिक खराब हो जाती है। कई मरीजों को प्लेटलेट की कमी और अन्य शारीरिक समस्याएं होने पर वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ता है।
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वहीं, जीएमसी से कई तीमारदार मरीजों को लामा (लीविंग एगेंस्ट मेडिकल एडवाइस) के आधार पर दूसरे अस्पतालों में ले जा रहे हैं। डेंगू के ऐसे 6 मरीज दूसरे अस्पतालों में चले गए हैं।
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शहर के ये इलाके प्रभावित
शहर के लगभग हिस्सों में डेंगू दस्तक दे चुका है। अब तक जीएमसी में दलपत्तियां मोहल्ला, उस्ताद मोहल्ला, बनतालाब, घो मन्हासा, पलौड़ा, महेशपुरा, गाढ़ीगढ़, जुल्लाका मोहल्ला, बावे, तालाब तिल्लो, त्रिकुटा नगर, फ्लायं मंडाल, कृष्णा नगर, जैन बाजार, पक्की ढक्की, शहीदी चौक, भगवती नगर, छन्नी रामा, भठिंडी, सुभाष नगर, प्रीत नगर, रूप नगर, डिग्याना, त्रिकुटा नगर, मीरां साहिब, गंग्याल, सतवारी आदि से डेंगू के मामले पहुंचे हैं।