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सप्ताहांत पाबंदियां शुक्रवार रात से लागू करें
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जम्मू। चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (सीसीआई) जम्मू के शिष्टमंडल ने प्रधान अरुण गुप्ता के नेतृत्व में मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता से मुलाकात कर सप्ताहांत पाबंदियों को शुक्रवार दोपहर दो बजे के बजाए रात नौ बजे से लागू करने की मांग की। इसके साथ अन्य बुनियादी मुद्दों पर चर्चा की गई।
गुप्ता ने कहा कि पिछले दो साल से कोविड महामारी के कारण पहले ही व्यापारी समुदाय आर्थिक रूप से बुरी तरह से प्रभावित है। ऐसे में पाबंदियों की सीमा बढ़ाने से उन्हें अधिक परेशान होना पड़ेगा। खासतौर पर छोटे व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए शुक्रवार रात से पाबंदियों को लागू किया जाए। सरकार ने व्यापारी वर्ग को विश्वास में लिए बिना शुक्रवार दोपहर से सप्ताहांत पाबंदियां लगाने का फैसला किया है, जबकि वह दिन कार्यदिवस में आता है।
उन्होंने नई आबकारी नीति पर कहा कि क्षेत्र के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए स्थानीय व्यापार और व्यापार गारंटी सुनिश्चित करने के लिए नीति तैयार की जानी चाहिए। नई आबकारी नीति से कई लोगों ने अपनी आजीविका खोई है। उन्होंने किस्म (गैर मुमकिन खड्ड) भूमि के प्रकार को फिर से परिभाषित करने को कहा, ताकि निवेशकों के साथ स्थानीय लोग परेशानी मुक्त निवेश कर सकें। रघुनाथ मंदिर के चारों ओर सुरक्षा चौकियों को हटाया जाना चाहिए। वर्तमान कठिन तलाशी अभ्यास में यात्रियों में कई आशंकाएं पैदा होती हैं।
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गुप्ता ने कहा कि पिछले दो साल से कोविड महामारी के कारण पहले ही व्यापारी समुदाय आर्थिक रूप से बुरी तरह से प्रभावित है। ऐसे में पाबंदियों की सीमा बढ़ाने से उन्हें अधिक परेशान होना पड़ेगा। खासतौर पर छोटे व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए शुक्रवार रात से पाबंदियों को लागू किया जाए। सरकार ने व्यापारी वर्ग को विश्वास में लिए बिना शुक्रवार दोपहर से सप्ताहांत पाबंदियां लगाने का फैसला किया है, जबकि वह दिन कार्यदिवस में आता है।
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उन्होंने नई आबकारी नीति पर कहा कि क्षेत्र के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए स्थानीय व्यापार और व्यापार गारंटी सुनिश्चित करने के लिए नीति तैयार की जानी चाहिए। नई आबकारी नीति से कई लोगों ने अपनी आजीविका खोई है। उन्होंने किस्म (गैर मुमकिन खड्ड) भूमि के प्रकार को फिर से परिभाषित करने को कहा, ताकि निवेशकों के साथ स्थानीय लोग परेशानी मुक्त निवेश कर सकें। रघुनाथ मंदिर के चारों ओर सुरक्षा चौकियों को हटाया जाना चाहिए। वर्तमान कठिन तलाशी अभ्यास में यात्रियों में कई आशंकाएं पैदा होती हैं।
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