कठुआ: जिले में चल रहे आधा दर्जन नशा मुक्ति केंद्र, वसूली जाती है मोटी रकम
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कठुआ जिले में वर्षों से नशे का कारोबार हो रहा है। नशा छुड़ाने के लिए जिले में चल रहे आधा दर्जन के लगभग नशा मुक्ति केंद्र अवैध हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास इनमें से एक भी पंजीकृत नहीं हैं। इस कारण विभाग के पास इनका कोई रिकॉर्ड भी नहीं है।
नशा मुक्ति के नाम पर पंजाब और जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों के दर्जनों युवाओं को हर महीने यहां आकर पुनर्वास के लिए रखा जाता है। इसकी एवज में उक्त युवाओं के परिवार से मोटी रकम ली जाती है। कई बार इनके भीतर युवाओं को यातना देने के आरोप भी लगते रहे हैं। विजयपुर के नजदीक 17 मील पर स्थित नशा मुक्ति केंद्र की घटना से अवैध केंद्रों पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
हैरत की बात है कि नशे की लत छुड़ाने के लिए युवाओं को कैसे उपचार दिया जाता है। उन्हें किन हालात में रखा जाता है, इन तमाम पहलुओं की निगरानी जिले में कोई भी विभाग नहीं कर रहा। ऐसे में पंजाब से सटे कठुआ जिले में इन नशा मुक्ति केंद्रों का धंधा फल फूल रहा है। इन केंद्रों में कोई स्थायी मनोचिकित्सक या विशेषज्ञ भी उपलब्ध नहीं है।
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नशा छुड़ाने के नाम पर वसूलते हैं 60 हजार रुपये
नशा मुक्ति केंद्र में नशा छुड़ाने के नाम पर एक पीड़ित से 60 हजार रुपये वसूले जाते हैं। सुविधाओं के साथ-साथ राशि बढ़ती जाती है। न्यूनतम राशि वालों को फर्श पर लिटाया जाता है। नशे से दूर रखने के लिए पीड़ित को एक-एक महीने तक कमरे में बंद रखा जाता है। एक पीड़ित ने बताया कि उन्हें नशा छुड़ाने के नाम पर जमकर पीटा गया। नशे से जिंदगी नर्क हो चुकी थी। लेकिन नशा मुक्ति केंद्र में और भी बदतर स्थिति है।
जिले में कोई भी नशा मुक्ति केंद्र स्वास्थ्य विभाग के पास न तो पंजीकृत है और न ही इनकी कोई जानकारी उपलब्ध है। - डॉ. अशोक चौधरी, सीएमओ, कठुआ