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Jammu News: सरकार को 18 करोड़ की देनदारी के भुगतान का प्रस्ताव भेजा
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- 15 जुलाई तक डीडीसी सदस्य पीआरआई और बीडीसी घटक का योजना प्रस्ताव देंगे
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जिला विकास परिषद (डीडीसी) की ओर से करीब 18 करोड़ रुपये की देनदारी का भुगतान करने के लिए एक प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा गया है। डीडीसी सदस्यों ने इस साल के बजट में पिछले साल के विकास कार्यों के लंबित बिलों की राशि की कटौती करने का विरोध किया है। डीडीसी सदस्यों का आरोप है कि उनकी तरफ से विकास कार्यों के लिए समय पर बिल दे दिए गए, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से भुगतान नहीं किया गया, जिससे राशि लैप्स हुई।
डीडीसी सदस्यों को आगामी 15 जुलाई तक पीआरआई (पंचायती राज संस्थान) और बीडीसी (ब्लाक विकास परिषद) घटक का योजना प्रस्ताव बनाकर देने को कहा गया है। यह प्रस्ताव ग्राम सभा के माध्यम से बनाए जाएंगे। बुधवार को जिला कैपेक्स बजट की बैठक में अधिकांश डीडीसी सदस्यों ने पिछले साल के कार्यों के लंबित बिलों की राशि को इस साल के उनके कोटे से काटने का विरोध किया था। इस साल के योजना प्रस्ताव में भी आरोप है कि बीडीओ ने डीडीसी सदस्यों को विश्वास में नहीं लिया। जिला विकास परिषद (डीडीसी) जम्मू के चेयरमैन भारत भूषण ने कहा कि कुछ ब्लाकों से शिकायत थी कि उनके योजना प्रस्ताव नहीं बनाए गए हैं और उन्हें 15 जुलाई तक का समय दिया गया है। उसी दिन सदस्यों के साथ एक बैठक करके उन्हें मंजूर करने की कोशिश की जाएगी। उनके अनुसार पिछले साल की करीब 18 करोड़ रुपये की देनदारी को खत्म करने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
वहीं, सुचेतगढ़ से डीडीसी सदस्य तरणजीत सिंह टोनी का आरोप है कि पहली बार पिछले साल के लंबित बिलों की राशि को डीडीसी सदस्यों के कोटे से काटा जा रहा है, जबकि इसके लिए संबंधित विभाग की लेतलतीफी जिम्मेदार है। अगर राशि में कटौती होती है तो वे अपने क्षेत्र में कैसे विकास करवाएंगे। प्रत्येक सदस्य को विकास कार्यों के लिए 71 लाख से अधिक राशि मिलती है। उनका आरोप है कि बीडीओ ने उन्हें विश्वास में लिए बिना 2024-25 बजट के योजना प्रस्ताव बना दिए, जिससे वह कैसे मंजूरी के लिए हामी भरें। डंसाल-नगरोटा से नेकां से सदस्य शमीम बेगम ने कहा कि विकास कार्यों के लिए सदस्यों को पूरी निर्धारित राशि दी जानी चाहिए और इसमें किसी तरह की कटौती न हो। हमारी पूरी कोशिश होती है कि तय समय पर विकास कार्य शुरू करवाएं और इसके लिए बिल भी समय पर जमा करवा देते हैं जिसके बाद भुगतान की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जिला विकास परिषद (डीडीसी) की ओर से करीब 18 करोड़ रुपये की देनदारी का भुगतान करने के लिए एक प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजा गया है। डीडीसी सदस्यों ने इस साल के बजट में पिछले साल के विकास कार्यों के लंबित बिलों की राशि की कटौती करने का विरोध किया है। डीडीसी सदस्यों का आरोप है कि उनकी तरफ से विकास कार्यों के लिए समय पर बिल दे दिए गए, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से भुगतान नहीं किया गया, जिससे राशि लैप्स हुई।
डीडीसी सदस्यों को आगामी 15 जुलाई तक पीआरआई (पंचायती राज संस्थान) और बीडीसी (ब्लाक विकास परिषद) घटक का योजना प्रस्ताव बनाकर देने को कहा गया है। यह प्रस्ताव ग्राम सभा के माध्यम से बनाए जाएंगे। बुधवार को जिला कैपेक्स बजट की बैठक में अधिकांश डीडीसी सदस्यों ने पिछले साल के कार्यों के लंबित बिलों की राशि को इस साल के उनके कोटे से काटने का विरोध किया था। इस साल के योजना प्रस्ताव में भी आरोप है कि बीडीओ ने डीडीसी सदस्यों को विश्वास में नहीं लिया। जिला विकास परिषद (डीडीसी) जम्मू के चेयरमैन भारत भूषण ने कहा कि कुछ ब्लाकों से शिकायत थी कि उनके योजना प्रस्ताव नहीं बनाए गए हैं और उन्हें 15 जुलाई तक का समय दिया गया है। उसी दिन सदस्यों के साथ एक बैठक करके उन्हें मंजूर करने की कोशिश की जाएगी। उनके अनुसार पिछले साल की करीब 18 करोड़ रुपये की देनदारी को खत्म करने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
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वहीं, सुचेतगढ़ से डीडीसी सदस्य तरणजीत सिंह टोनी का आरोप है कि पहली बार पिछले साल के लंबित बिलों की राशि को डीडीसी सदस्यों के कोटे से काटा जा रहा है, जबकि इसके लिए संबंधित विभाग की लेतलतीफी जिम्मेदार है। अगर राशि में कटौती होती है तो वे अपने क्षेत्र में कैसे विकास करवाएंगे। प्रत्येक सदस्य को विकास कार्यों के लिए 71 लाख से अधिक राशि मिलती है। उनका आरोप है कि बीडीओ ने उन्हें विश्वास में लिए बिना 2024-25 बजट के योजना प्रस्ताव बना दिए, जिससे वह कैसे मंजूरी के लिए हामी भरें। डंसाल-नगरोटा से नेकां से सदस्य शमीम बेगम ने कहा कि विकास कार्यों के लिए सदस्यों को पूरी निर्धारित राशि दी जानी चाहिए और इसमें किसी तरह की कटौती न हो। हमारी पूरी कोशिश होती है कि तय समय पर विकास कार्य शुरू करवाएं और इसके लिए बिल भी समय पर जमा करवा देते हैं जिसके बाद भुगतान की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होती है।
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