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डीडीसी ओहदेदारों का दूसरे दिन भी प्रदर्शन, एलजी ने 12 मार्च को बुलाया

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DDC rankers perform for second day as well, LG called on March 12
जम्मू के प्रदर्शनी मैदान में प्रदर्शन करते डीडीसी प्रतिनिधि। अमर उजाला - फोटो : SHRINAGAR
जम्मू। डीडीसी अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सदस्यों के भारी विरोध से सरकारी हलकों में मचे हड़कंप के बीच डीडीसी प्रतिनिधियाें को उप राज्यपाल ने बातचीत के लिए बुला लिया है। 12 मार्च को राजभवन में एलजी के साथ बैठक में मामले में चर्चा होगी। एलजी की ओर से न्योता मिलने पर डीडीसी प्रतिनिधियों ने आंदोलन दो दिन के लिए स्थगित कर दिया है। 12 मार्च को बैठक के बाद ही अगला फैसला लिया जाएगा। डीडीसी प्रतिनिधि लद्दाख और पुडुचेरी की तर्ज पर रुतबा, मानदेय और शक्तियों की मांग कर रहे हैं।
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बुधवार को भी डीडीसी प्रतिनिधियों ने विरोध प्रदर्शन किया। दोपहर एक बजे डीडीसी अध्यक्षों को राजभवन की तरफ से सूचना मिली कि 12 मार्च को इस मुद्दे पर बात करने के लिए एलजी मनोज सिन्हा ने उन्हें मुलाकात के लिए बुलाया है। इसके बाद सभी ने बैठक कर फिलहाल आंदोलन स्थगित करने और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात करने के बाद ही अपनी अगली रणनीति तय करने का फैसला लिया। इस संबंध में पत्रकार वार्ता में अध्यक्ष भारत भूषण ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की अफसरशाही जिला विकास परिषद के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और सदस्यों द्वारा किए जाने वाले विकास की राह में बाधा खड़ी कर रही है। डीडीसी चुनाव का मजाक बनाया गया है। सभी दलों के सदस्यों, उपाध्यक्ष व अध्यक्ष लोकतंत्र की मजबूती के लिए एकजुट हैं और 12 मार्च को उपराज्यपाल से मुलाकात की जाएगी। इसके बाद बैठक कर अगली रणनीति तय होगी। पुंछ से सदस्य शाहनवाज हुसैन ने कहा कि सरकार ने अगर उनका हक नहीं दिया तो सामूहिक इस्तीफा देने से परहेज नहीं किया जाएगा।
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महिला सदस्यों के साथ भी प्रशासन ने की बदसलूकी: तरणजीत सिंह टोनी
डीडीसी सदस्य तरणजीत सिंह टोनी ने कहा कि कश्मीर संभाग के अलावा जम्मू संभाग के अन्य जिलों से जम्मू आए हुए डीडीसी ओहदेदारों को दो दिन के लिए प्रशासन ने होटलों में ठहराया हुआ था। प्रशासन ने प्रदर्शन के कारण होटलों में कमरों की बुकिंग रद्द कर दी। इससे दूसरे जिलों से आए सदस्यों, उपाध्यक्षों व अध्यक्षों को परेशानी हुई। खासतौर से महिला सदस्यों के साथ बदसलूकी की गई है। अनुच्छेद 370 टूटने के बाद भी अफसरशाही की मनमानी जम्मू-कश्मीर में जारी है। लोकतंत्र को कमजोर करने का षड़यंत्र रचा गया है।
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महिला सदस्य बोलीं-भीख नहीं, अधिकार चाहिए
कश्मीर संभाग के बडगाम जिले की डीडीसी सदस्य साइमा ने कहा कि डीडीसी सदस्य, उपाध्यक्ष और अध्यक्ष कोई भीख नहीं मांग रहे हैं। उन्हें अधिकार चाहिए। नेशनल कांफ्रेंस की सदस्य अफरोजा ने कहा हक के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा हैं।
ये हैं प्रमुख मांगें
लद्दाख व पुडुचेरी की तर्ज पर अध्यक्षों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने, उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री और डीडीसी सदस्यों को विधायक जैसा दर्जा देने की मांग प्रदेश के डीडीसी सदस्य कर रहे हैं।

लद्दाख में अध्यक्ष को मिला है कैबिनेट मंत्री का दर्जा
लद्दाख आटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (एलएएचडीसी) में अध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल है। वेतन और भत्तों को मिलाकर अध्यक्ष को हर माह 1.65 लाख रुपये मिलते हैं। अध्यक्ष को बाकायदा कैबिनेट मंत्र का सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत एस्कॉर्ट मिलता है, जिनके वाहन पर राष्ट्रीय ध्वज लगा रहता है। कार्यकारी पार्षदों को डिप्टी मिनिस्टर और हर माह 1.60 लाख रुपये वेतन भत्ते के रूप में मिलते हैं। पार्षदों का दर्जा विधायक के बराबर है लेकिन उन्हें विधायक का मूल वेतन यानी 60 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। एलएएचडीसी के पूर्व कार्यकारी पार्षद और वर्तमान पार्षद कोंचोक स्टैंजिन ने बताया कि सरकार से अब वेतन-भत्ते बढ़ाने समेत पेंशन का प्रावधान लाने की मांग की जा रही है।
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