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सौ साल बाद निकली अष्ट शिवलिंगों की तीर्थ यात्रा
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पुरमंडल उत्तरवाहिनी के कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु।
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बाड़ी ब्राह्मणा। पुरमंडल उत्तरवाहिनी तीर्थ सेवा न्यास ने 100 साल बाद उत्तरवाहिनी से पुरमंडल तक रविवार को अष्ट शिव लिंगों की तीर्थ यात्रा निकाली। इसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इस मौके पर पालकी बनाई गई, जिसमें शिव और पार्वती की मूर्तियां रखी गईं। शोभा यात्रा में साधु संतों ने भी काफी संख्या में भाग लिया जो कि दूरदराज से आए थे।
कहा जाता है कि स्वर्गीय महाराजा रणवीर सिंह ने उत्तरवाहिनी से पुरमंडल के बीच पाए जाने वाले तीर्थ स्थानों पर मंदिर बनाने की योजना बनाई थी, जिसके लिए उन्होंने काशी विश्वनाथ से बड़े-बड़े शिवलिंग मंगाए। यह शिवलिंग हाथियों पर मंगाए गए। महाराजा ने पुरमंडल को छोटा काशी बनाने की योजना बनाई। अब महाराजा के सपने को पूरा करने के लिए पुरमंडल उत्तरवाहिनी तीर्थ सेवा न्यास ने यह जिम्मा उठाया है। माना जाता है कि आज भी किसी भी क्षेत्र में शिव मंदिर की स्थापना की जाती है तो उस मंदिर में शिवलिंग स्थापित करने के लिए उत्तरवाहिनी से शिवलिंग मंगाया जाता है। कहते हैं कि उत्तरवाहिनी में आज भी एक कमरे में बड़ी संख्या में शिवलिंग रखे हैं। उत्तर वाहिनी से पुरमंडल तक की यात्रा को चार धाम की यात्रा के बराबर माना जाता हैं।
मान्यताओं को देखते हुए उत्तरवाहिनी पुरमंडल तीर्थ सेवा न्यास ने रविवार को 100 साल बाद अष्ट लिंगों की उत्तरवाहिनी से पुरमंडल तक शोभायात्रा निकाली। इस मौके पर कमेटी की तरफ से भंडार लगाया गया। उत्तरवाहिनी से पुरमंडल तक का शोभा यात्रा का नजारा देखते ही बनता था। इस मौके पर उत्तरवाहिनी पुरमंडल तीर्थ सेवा न्यास के प्रधान सुरेश चंद्र गुप्ता, जिला सांबा के सनातन धर्म के प्रधान रूपेश कुमार, वीरपुर के पूर्व सरपंच गौतम सिंह, सरपंच रामस्वरूप शर्मा, महेश्वर शर्मा, अवतार सिंह, सुभाष चंद्र, जेएल बाड़ू और गोविंद शर्मा मुख्य तौर पर मौजूद थे।
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देविका नदी में एक फुट गड्ढा खोदने पर ही निकलता है पानी
उत्तरवाहिनी और देविका के नाम से यह तीर्थ स्थान काफी मशहूर है, क्योंकि देविका नदी को गंगा की बड़ी बहन माना जाता है। शिव भगवान ने माता पार्वती से शुद्ध महादेव में नदी रूप में तीर्थ स्थान की मांग रखी थी, जिसको माता पार्वती ने स्वीकार किया। जो शुद्धमहादेव से निकलकर उधमपुर से होते हुए इंद्रेश्वर पहुंचने के बाद सीधा पुरमंडल में निकलती है। इस देविका नदी की विशेष बात यह है कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर के ज्यादातर लोग बुजुर्गों या स्वर्ग वासियों की अस्थियां इसी नदी में विसर्जित करते हैं। देविका नदी में एक फुट गड्ढा खोदने पर ही पानी निकलता है जिससे लोग स्नान करके पापों का प्रायश्चित करते हैं। देविका नदी को गुप्त गंगा के रूप में भी जाना जाता है।
बाबा शिवो गोरण स्थान पर पहुंचे श्रद्धालुओं
सांबा। जिले के पहाड़ी क्षेत्र में विराजमान बाबा शिवो के स्थान पर रविवार और मंगलबार को मेले का आयोजन होता है। रविवार को यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच और दरबार में माथा टेका। मान्यता है कि बाबा शिवो के दरबार में मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यहां आसपास क्षेत्रों सहित दूसरे राज्यों से भी लोग आते हैं। देव स्थान कमेटी के प्रधान देसराज ने बताया कि बाबा के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लंगर का आयोजन भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि राज्य के कई कद्दावर नेता व मंत्री भी चुनाव से पहले दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं मनोकामना पूरी होने पर वह लंगर का लगाते हैं। संवाद
कथा से पूर्व निकाली कलश यात्रा
विजयपुर। सरवन नाला (बढेरी) में रविवार को विश्व शांति के लिए आयोजित श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व कलश यात्रा निकाली गई। कथा आयोजक तेजा सिंह, दर्शन सिंह, सोम सिंह ने बताया कि कथावाचक संत रामानंद शास्त्री हिमाचल प्रदेश वाले ने मंत्रोच्चारण के साथ कथा का शुभारंभ किया। संत रामानंद ने कहा कि मनुष्य को रोजमर्रा के कार्यों में भगवान नाम का स्मरण करने के लिए समय निकालना चाहिए। जो आनंद कथा सुनने व सत्संग में आने से है वह कहीं और नहीं। इसलिए इस व्यस्त जीवन में थोड़ा समय भगवान के नाम के लिए भी निकाल लेना चाहिए। मात्र भगवान का नाम लेने से मनुष्य के जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन सुखी हो जाता है। इस दौरान भक्तों में प्रसाद भी बांटा गया। संवाद
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कहा जाता है कि स्वर्गीय महाराजा रणवीर सिंह ने उत्तरवाहिनी से पुरमंडल के बीच पाए जाने वाले तीर्थ स्थानों पर मंदिर बनाने की योजना बनाई थी, जिसके लिए उन्होंने काशी विश्वनाथ से बड़े-बड़े शिवलिंग मंगाए। यह शिवलिंग हाथियों पर मंगाए गए। महाराजा ने पुरमंडल को छोटा काशी बनाने की योजना बनाई। अब महाराजा के सपने को पूरा करने के लिए पुरमंडल उत्तरवाहिनी तीर्थ सेवा न्यास ने यह जिम्मा उठाया है। माना जाता है कि आज भी किसी भी क्षेत्र में शिव मंदिर की स्थापना की जाती है तो उस मंदिर में शिवलिंग स्थापित करने के लिए उत्तरवाहिनी से शिवलिंग मंगाया जाता है। कहते हैं कि उत्तरवाहिनी में आज भी एक कमरे में बड़ी संख्या में शिवलिंग रखे हैं। उत्तर वाहिनी से पुरमंडल तक की यात्रा को चार धाम की यात्रा के बराबर माना जाता हैं।
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मान्यताओं को देखते हुए उत्तरवाहिनी पुरमंडल तीर्थ सेवा न्यास ने रविवार को 100 साल बाद अष्ट लिंगों की उत्तरवाहिनी से पुरमंडल तक शोभायात्रा निकाली। इस मौके पर कमेटी की तरफ से भंडार लगाया गया। उत्तरवाहिनी से पुरमंडल तक का शोभा यात्रा का नजारा देखते ही बनता था। इस मौके पर उत्तरवाहिनी पुरमंडल तीर्थ सेवा न्यास के प्रधान सुरेश चंद्र गुप्ता, जिला सांबा के सनातन धर्म के प्रधान रूपेश कुमार, वीरपुर के पूर्व सरपंच गौतम सिंह, सरपंच रामस्वरूप शर्मा, महेश्वर शर्मा, अवतार सिंह, सुभाष चंद्र, जेएल बाड़ू और गोविंद शर्मा मुख्य तौर पर मौजूद थे।
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देविका नदी में एक फुट गड्ढा खोदने पर ही निकलता है पानी
उत्तरवाहिनी और देविका के नाम से यह तीर्थ स्थान काफी मशहूर है, क्योंकि देविका नदी को गंगा की बड़ी बहन माना जाता है। शिव भगवान ने माता पार्वती से शुद्ध महादेव में नदी रूप में तीर्थ स्थान की मांग रखी थी, जिसको माता पार्वती ने स्वीकार किया। जो शुद्धमहादेव से निकलकर उधमपुर से होते हुए इंद्रेश्वर पहुंचने के बाद सीधा पुरमंडल में निकलती है। इस देविका नदी की विशेष बात यह है कि पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर के ज्यादातर लोग बुजुर्गों या स्वर्ग वासियों की अस्थियां इसी नदी में विसर्जित करते हैं। देविका नदी में एक फुट गड्ढा खोदने पर ही पानी निकलता है जिससे लोग स्नान करके पापों का प्रायश्चित करते हैं। देविका नदी को गुप्त गंगा के रूप में भी जाना जाता है।
बाबा शिवो गोरण स्थान पर पहुंचे श्रद्धालुओं
सांबा। जिले के पहाड़ी क्षेत्र में विराजमान बाबा शिवो के स्थान पर रविवार और मंगलबार को मेले का आयोजन होता है। रविवार को यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच और दरबार में माथा टेका। मान्यता है कि बाबा शिवो के दरबार में मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यहां आसपास क्षेत्रों सहित दूसरे राज्यों से भी लोग आते हैं। देव स्थान कमेटी के प्रधान देसराज ने बताया कि बाबा के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लंगर का आयोजन भी किया जाता है। उन्होंने बताया कि राज्य के कई कद्दावर नेता व मंत्री भी चुनाव से पहले दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं मनोकामना पूरी होने पर वह लंगर का लगाते हैं। संवाद
कथा से पूर्व निकाली कलश यात्रा
विजयपुर। सरवन नाला (बढेरी) में रविवार को विश्व शांति के लिए आयोजित श्रीमद्भागवत कथा से पूर्व कलश यात्रा निकाली गई। कथा आयोजक तेजा सिंह, दर्शन सिंह, सोम सिंह ने बताया कि कथावाचक संत रामानंद शास्त्री हिमाचल प्रदेश वाले ने मंत्रोच्चारण के साथ कथा का शुभारंभ किया। संत रामानंद ने कहा कि मनुष्य को रोजमर्रा के कार्यों में भगवान नाम का स्मरण करने के लिए समय निकालना चाहिए। जो आनंद कथा सुनने व सत्संग में आने से है वह कहीं और नहीं। इसलिए इस व्यस्त जीवन में थोड़ा समय भगवान के नाम के लिए भी निकाल लेना चाहिए। मात्र भगवान का नाम लेने से मनुष्य के जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन सुखी हो जाता है। इस दौरान भक्तों में प्रसाद भी बांटा गया। संवाद