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कला - संस्कृति से जुड़े चार विभाग बिना मुखिया के चल रहे
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जम्मू। राज्य में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सरकार गंभीर नहीं है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि राज्य में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाले चार बड़े विभाग में सचिव का पद खाली है। इन विभागों में बड़े अधिकारियों की कमी को दूसरे विभागों के अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार सौंपा कर पूरा किया जा रहा है। इससे अधिकारियों पर काम का बोझ बढ़ रहा और विभागों की नियमित गतिविधियों पर गृहण लग गया है। इसका प्रभाव राज्य कल्चरल अकादमी पर दिखता भी है। अकादमी में प्रति वर्ष होने वाली थियेटर वर्कशाप पहली बार इस वर्ष आयोजित ही नहीं हो पाई।
राज्य में लोक संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़े रेडियो जम्मू, डीडी नेशनल जम्मू, राज्य कल्चरल अकादमी और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) में सचिव पद खाली पड़ा है। लंबे समय से खाली पड़े इन पदों के कामकाज का जिम्मा दूसरे विभागों के अधिकारियों को दिया गया है। जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति और भाषा अकादमी के सचिव पद का कार्यभार यूथ सर्विस एंड स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के निदेशक को सौंपा है। वहीं रेडियो और दूरदर्शन केंद्र में निदेशक का पद खाली है। रेडियो और दूरदर्शन केंद्र में तो लोक संस्कृति से जुडे़ कार्यक्रम केवल औपचारिकता के तौर पर प्रसारित किए जा रहे हैं। वहीं देश के बीच कला और संस्कृति का आदान प्रदान करने वाले भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) में डेढ़ वर्ष से निदेशक पद का कार्यभार रीजनल पासपोर्ट अधिकारी को दिया गया है। लोक संस्कृति से जुड़े विभाग का बिना मुखिया के चलने से राज्य में लोक संस्कृति के प्रचार-प्रसार की उम्मीद ही कम है।
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क्या कहते हैं इन कार्यालयों के पूर्व सचिव/निदेशक
हमारी सरकारों ने कला और संस्कृति को कभी गंभीरता से लिया ही नहीं है। कला और संस्कृति से जुडे़ विभागों में सचिव/ निदेशक नहीं होने से इस बात की पुष्टि करते हैं। किसी भी विभाग में कार्यालय प्रमुख नहीं होने से वहां की गतिविधियां प्रभावित होती हैं। अगर हमारी सरकारों ने कला और संस्कृति को गंभीरता से लिया होता तो आज हमारे राज्य के यह हालात नहीं होते।
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-बलवंत ठाकुर, पूर्व सचिव राज्य कल्चरल अकादमी और आईसीसीआर
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अगर किसी कार्यालय में प्रमुख ही नहीं होगा तो वहां का हाल क्या होगा। डीडी नेशनल जम्मू में नए कार्य नहीं हो पा रहे हैं। पुराने कार्यक्रमों को बदलकर प्रस्तुत किया जा रहा है। दूरदर्शन और रेडियो की जान उसके कार्यक्रम होते हैं। अगर आपके कार्यक्रम प्रमुख ही न हों तो कार्यक्रम क्या बनेंगे। डीडी में कार्यालय प्रमुख नहीं होने से कार्य प्रभावित होते हैं।
-वीके संबयाल, पूर्व निदेशक, दूरदर्शन जम्मू
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रेडियो हर आवाज को जन-जन तक पहुंचाने का काम करता है। अगर केंद्र में प्रमुख ही नहीं होगा तो वहां की हर गतिविधियों पर असर पड़ेगा। सबसे बड़ा नुकसान होता है आर्थिक फैसले नहीं ले पाना। केंद्र में किसी भी नए कार्य, कार्यक्रम के लिए आर्थिक फैसले लेने के लिए इंतजार करना पड़ता है। इससे केंद्र के कार्य पर प्रभाव पड़ता है और लोगों का जुड़ाव केंद्र से कम हो जाता है।
-अंजली शर्मा, पूर्व निदेशक, रेडियो जम्मू
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राज्य में लोक संस्कृति के प्रचार-प्रसार से जुड़े रेडियो जम्मू, डीडी नेशनल जम्मू, राज्य कल्चरल अकादमी और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) में सचिव पद खाली पड़ा है। लंबे समय से खाली पड़े इन पदों के कामकाज का जिम्मा दूसरे विभागों के अधिकारियों को दिया गया है। जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति और भाषा अकादमी के सचिव पद का कार्यभार यूथ सर्विस एंड स्पोर्ट्स डिपार्टमेंट के निदेशक को सौंपा है। वहीं रेडियो और दूरदर्शन केंद्र में निदेशक का पद खाली है। रेडियो और दूरदर्शन केंद्र में तो लोक संस्कृति से जुडे़ कार्यक्रम केवल औपचारिकता के तौर पर प्रसारित किए जा रहे हैं। वहीं देश के बीच कला और संस्कृति का आदान प्रदान करने वाले भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) में डेढ़ वर्ष से निदेशक पद का कार्यभार रीजनल पासपोर्ट अधिकारी को दिया गया है। लोक संस्कृति से जुड़े विभाग का बिना मुखिया के चलने से राज्य में लोक संस्कृति के प्रचार-प्रसार की उम्मीद ही कम है।
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क्या कहते हैं इन कार्यालयों के पूर्व सचिव/निदेशक
हमारी सरकारों ने कला और संस्कृति को कभी गंभीरता से लिया ही नहीं है। कला और संस्कृति से जुडे़ विभागों में सचिव/ निदेशक नहीं होने से इस बात की पुष्टि करते हैं। किसी भी विभाग में कार्यालय प्रमुख नहीं होने से वहां की गतिविधियां प्रभावित होती हैं। अगर हमारी सरकारों ने कला और संस्कृति को गंभीरता से लिया होता तो आज हमारे राज्य के यह हालात नहीं होते।
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-बलवंत ठाकुर, पूर्व सचिव राज्य कल्चरल अकादमी और आईसीसीआर
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अगर किसी कार्यालय में प्रमुख ही नहीं होगा तो वहां का हाल क्या होगा। डीडी नेशनल जम्मू में नए कार्य नहीं हो पा रहे हैं। पुराने कार्यक्रमों को बदलकर प्रस्तुत किया जा रहा है। दूरदर्शन और रेडियो की जान उसके कार्यक्रम होते हैं। अगर आपके कार्यक्रम प्रमुख ही न हों तो कार्यक्रम क्या बनेंगे। डीडी में कार्यालय प्रमुख नहीं होने से कार्य प्रभावित होते हैं।
-वीके संबयाल, पूर्व निदेशक, दूरदर्शन जम्मू
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रेडियो हर आवाज को जन-जन तक पहुंचाने का काम करता है। अगर केंद्र में प्रमुख ही नहीं होगा तो वहां की हर गतिविधियों पर असर पड़ेगा। सबसे बड़ा नुकसान होता है आर्थिक फैसले नहीं ले पाना। केंद्र में किसी भी नए कार्य, कार्यक्रम के लिए आर्थिक फैसले लेने के लिए इंतजार करना पड़ता है। इससे केंद्र के कार्य पर प्रभाव पड़ता है और लोगों का जुड़ाव केंद्र से कम हो जाता है।
-अंजली शर्मा, पूर्व निदेशक, रेडियो जम्मू