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श्रीनगर में आतंकी हमले में घायल अरशद का चल रहा इलाज
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बाड़ी ब्राह्मणा। श्रीनगर के जेवन में पुलिस पार्टी की बस पर आतंकवादियों ने फायरिंग कर दी। इसमें तीन पुलिसकर्मी शहीद हो गए। अन्य कई घायल हो गए हैं। घायलों में बाड़ी ब्राह्मणा ब्लॉक की पंचायत बरोड़ी के अरशद मोहम्मद भी शामिल हैं। उन्हें 2 गोलियां बाजू में लगी हैं। उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। वह खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
उनके घर में बातचीत से पता चला कि उनके ऊपर पूरे घर की जिम्मेदारी है। घर में मां एक भाई हैं। बहन की शादी हो चुकी है। मां से बातचीत में पता चला कि पुलिस में शामिल हुए उनके 14 साल हो गए हैं। तीन साल से वह श्रीनगर में हैं। उन्होंने बताया कि अगस्त में वह 15 दिन की छुट्टी पर घर आए। जिस दिन आतंकवादियों ने दोबारा पुलिस पार्टी पर फायरिंग की तो घायल होने के बाद अरशद ने घर में फोन किया, फोन बच्चों के पास था, जिसके कारण अरशद का फोन घर वाले नहीं उठा सके। घायल अवस्था में ही अरशद ने अपने चाचा को फोन मिलाया। उन्हें आपबीती बताई, तो चाचा ने घर वालों को बताया कि अरशद आतंकवादियों की फायरिंग में घायल हो गया है। उनके चाचा ने बताया कि जब अरशद ने कहा कि चाचा हमारे ऊपर आतंकवादियों ने फायरिंग कर दी है। गाड़ी में सिर्फ खून ही खून दिखाई दे रहा है। मुझे लगता है मैं नहीं बच पाऊंगा। इसलिए मेरी बात जल्दी से घरवालों से करा दो। इतनी देर में फोन कट गया। हम फोन मिलाते रहे, लेकिन जवाब नहीं आ रहा था। उसके बाद उसके साथ जो भी ड्यूटी पर तैनात थे, उनका फोन आया तो बताया कि अरशद को अस्पताल ले जाया गया है। इलाज शुरू कर दिया है। उसके अलावा और भी अन्य पुलिसकर्मी घायल हैं। अरशद से बात नहीं हो पा रही थी। ऐसा लग रहा था मानो आसमान टूट कर नीचे गिर गया हो। जब अस्पताल की तरफ से किसी बड़े अधिकारी का फोन आया तो बताया कि अरशद की गोलियां ऑपरेशन से बाहर निकाल दी गई हैं। वह ठीक है, तब सांस में सांस आई।
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अरशद की मां गोली बीवी ने बताया कि जब उन्हें पता चला तो उन्होंने अल्लाह से यही कहा कि उनका बच्चा ठीक हो जाए। उन्होंने बताया कि उसके बाद अरशद से बात हुई, तो मैंने उसका हालचाल जाना। उसने बताया कि मां मैं बिल्कुल ठीक हूं। मामूली चोटें आई हैं। उसके बाद दिल को तसल्ली मिली। अरशद अब ठीक अवस्था में है। उसकी मां ने बताया कि वह शुरू से ही मेहनती था। पढ़ाई करने के बाद भर्ती देखा करता था। फिर पुलिस में भर्ती हो गया, जिससे घर के हालात थोड़े ठीक हो गए। 25 वर्ष पहले अरशद के पिता का देहांत हो गया। पूरा परिवार गरीबी में था। अरशद और उसका भाई छोटे थे। बड़ी गरीबी से बच्चों को पाल पोस कर बड़ा किया। जैसे ही अरशद पुलिस में भर्ती हुआ तो घर के हालात थोड़े ठीक हुए।
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किसी जनप्रतिनिधि ने नहीं ली सुध
घायल अरशद मोहम्मद के घर जिला सांबा से किसी भी मंत्री, डीडीसी, बीडीसी या अन्य चुने नुमाइंदों ने दस्तक नहीं दी है। इसको लेकर अरशद के घर वाले आहत हैं। क्योंकि देश की सेवा करने के लिए ही अरशद ने पुलिस में नौकरी की। मुसीबत की इस घड़ी में उन्हें सांत्वना देने के लिए किसी भी प्रशासनिक या लोकतांत्रिक अधिकारी ने हाजिरी नहीं दी है। अफसोस की बात यह है कि वोट लेने के लिए मंत्री घर-घर पहुंच जाते हैं, लेकिन मुसीबत की इस घड़ी में उनके घर वालों का हाल जानने के लिए किसी के पास भी समय नहीं है।
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अरशद के भाई रशीद ने बताया कि जैसे ही भाई से बात की तो उन्होंने बताया कि हम ड्यूटी से अपने शिविर बस से जा रहे थे। मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर ही शिविर आने वाला था। मैं बस के सेंटर में बैठा था। अचानक मेरे ऊपर दाईं और बाईं तरफ से साथी गिरने लगे और लहूलुहान होते दिखने लगे। जैसे ही मैंने अपने आपको संभाला, मेरी बाजू में 2 गोलियां लगीं। एक पेट को छूते हुए निकल गई। शुरुआत में आतंकवादियों ने ड्राइवर को निशाना बनाया था। इसके कारण ड्राइवर थोड़ा नर्वस हो गया। कुछ पुलिसकर्मियों ने उसे हौसला दिया और वहां से बस शुरू निकाल ले जाने के लिए कहा, ड्राइवर ने हौसला करके बस को निकाला, जिसके कारण आज हम सबकी जान बच पाई है।
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उनके घर में बातचीत से पता चला कि उनके ऊपर पूरे घर की जिम्मेदारी है। घर में मां एक भाई हैं। बहन की शादी हो चुकी है। मां से बातचीत में पता चला कि पुलिस में शामिल हुए उनके 14 साल हो गए हैं। तीन साल से वह श्रीनगर में हैं। उन्होंने बताया कि अगस्त में वह 15 दिन की छुट्टी पर घर आए। जिस दिन आतंकवादियों ने दोबारा पुलिस पार्टी पर फायरिंग की तो घायल होने के बाद अरशद ने घर में फोन किया, फोन बच्चों के पास था, जिसके कारण अरशद का फोन घर वाले नहीं उठा सके। घायल अवस्था में ही अरशद ने अपने चाचा को फोन मिलाया। उन्हें आपबीती बताई, तो चाचा ने घर वालों को बताया कि अरशद आतंकवादियों की फायरिंग में घायल हो गया है। उनके चाचा ने बताया कि जब अरशद ने कहा कि चाचा हमारे ऊपर आतंकवादियों ने फायरिंग कर दी है। गाड़ी में सिर्फ खून ही खून दिखाई दे रहा है। मुझे लगता है मैं नहीं बच पाऊंगा। इसलिए मेरी बात जल्दी से घरवालों से करा दो। इतनी देर में फोन कट गया। हम फोन मिलाते रहे, लेकिन जवाब नहीं आ रहा था। उसके बाद उसके साथ जो भी ड्यूटी पर तैनात थे, उनका फोन आया तो बताया कि अरशद को अस्पताल ले जाया गया है। इलाज शुरू कर दिया है। उसके अलावा और भी अन्य पुलिसकर्मी घायल हैं। अरशद से बात नहीं हो पा रही थी। ऐसा लग रहा था मानो आसमान टूट कर नीचे गिर गया हो। जब अस्पताल की तरफ से किसी बड़े अधिकारी का फोन आया तो बताया कि अरशद की गोलियां ऑपरेशन से बाहर निकाल दी गई हैं। वह ठीक है, तब सांस में सांस आई।
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अरशद की मां गोली बीवी ने बताया कि जब उन्हें पता चला तो उन्होंने अल्लाह से यही कहा कि उनका बच्चा ठीक हो जाए। उन्होंने बताया कि उसके बाद अरशद से बात हुई, तो मैंने उसका हालचाल जाना। उसने बताया कि मां मैं बिल्कुल ठीक हूं। मामूली चोटें आई हैं। उसके बाद दिल को तसल्ली मिली। अरशद अब ठीक अवस्था में है। उसकी मां ने बताया कि वह शुरू से ही मेहनती था। पढ़ाई करने के बाद भर्ती देखा करता था। फिर पुलिस में भर्ती हो गया, जिससे घर के हालात थोड़े ठीक हो गए। 25 वर्ष पहले अरशद के पिता का देहांत हो गया। पूरा परिवार गरीबी में था। अरशद और उसका भाई छोटे थे। बड़ी गरीबी से बच्चों को पाल पोस कर बड़ा किया। जैसे ही अरशद पुलिस में भर्ती हुआ तो घर के हालात थोड़े ठीक हुए।
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किसी जनप्रतिनिधि ने नहीं ली सुध
घायल अरशद मोहम्मद के घर जिला सांबा से किसी भी मंत्री, डीडीसी, बीडीसी या अन्य चुने नुमाइंदों ने दस्तक नहीं दी है। इसको लेकर अरशद के घर वाले आहत हैं। क्योंकि देश की सेवा करने के लिए ही अरशद ने पुलिस में नौकरी की। मुसीबत की इस घड़ी में उन्हें सांत्वना देने के लिए किसी भी प्रशासनिक या लोकतांत्रिक अधिकारी ने हाजिरी नहीं दी है। अफसोस की बात यह है कि वोट लेने के लिए मंत्री घर-घर पहुंच जाते हैं, लेकिन मुसीबत की इस घड़ी में उनके घर वालों का हाल जानने के लिए किसी के पास भी समय नहीं है।
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अरशद के भाई रशीद ने बताया कि जैसे ही भाई से बात की तो उन्होंने बताया कि हम ड्यूटी से अपने शिविर बस से जा रहे थे। मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर ही शिविर आने वाला था। मैं बस के सेंटर में बैठा था। अचानक मेरे ऊपर दाईं और बाईं तरफ से साथी गिरने लगे और लहूलुहान होते दिखने लगे। जैसे ही मैंने अपने आपको संभाला, मेरी बाजू में 2 गोलियां लगीं। एक पेट को छूते हुए निकल गई। शुरुआत में आतंकवादियों ने ड्राइवर को निशाना बनाया था। इसके कारण ड्राइवर थोड़ा नर्वस हो गया। कुछ पुलिसकर्मियों ने उसे हौसला दिया और वहां से बस शुरू निकाल ले जाने के लिए कहा, ड्राइवर ने हौसला करके बस को निकाला, जिसके कारण आज हम सबकी जान बच पाई है।