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अब गांव में रिहाइश बनाने के लिए देना पडे़गा शुल्क
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सांबा। केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में नए प्रयोग कर लोगों को निराश कर रही है। अब गांव में मकान बनाने के लिए जहां पटवारी, ब्लॉक सचिव व सरपंच से अनुमति लेनी होगी, वहीं मकान बनाने पर शुल्क भी वसूला जाएगा। इसका ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध किया जा रहा है।
मदून पंचायत के पूर्व सरपंच दर्शन चौधरी, राज कुमार, सुरेश शर्मा आदि ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से बनाए जाने वाले कानून लोगों को नुकसान देने वाले हैं। पहले शहरों में होता था यदि किसी ने मकान बनाना है तो कई-क ई माह कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब गांवों में भी वही हाल होने जा रहा है। इसका ग्रामीण क्षेत्र के लोगाें ने विरोध किया है। इससे एक तो भ्रष्टाचार बढे़गा, वहीं यदि मकान बनाने वाला किसी अन्य दल के साथ जुड़ा है और सरपंच किसी अन्य दल से तो ऐसे में भी काफी परेशानी बनी रहेगी। उनके अनुसार ग्रामीण मकान बनाने के लिए पता नहीं कहां-कहां से रिश्तेदारों से उधार लाकर अपना घोंसला बनाता है, अब सरकार ने उनके इस घोंसले पर एक प्रकार की पाबंदी लगा दी है। अब गांवों के ग्रामीण भी अपनी रिहाइश बनाने के लिए सरपंचों व ग्रामीण विकास विभाग के कार्यालयों के चक्कर कटते रहेंगे। उन्होंने सरकार को इस फैसले को वापस लेनेेे की अपील की है।
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मदून पंचायत के पूर्व सरपंच दर्शन चौधरी, राज कुमार, सुरेश शर्मा आदि ने बताया कि केंद्र सरकार की ओर से बनाए जाने वाले कानून लोगों को नुकसान देने वाले हैं। पहले शहरों में होता था यदि किसी ने मकान बनाना है तो कई-क ई माह कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब गांवों में भी वही हाल होने जा रहा है। इसका ग्रामीण क्षेत्र के लोगाें ने विरोध किया है। इससे एक तो भ्रष्टाचार बढे़गा, वहीं यदि मकान बनाने वाला किसी अन्य दल के साथ जुड़ा है और सरपंच किसी अन्य दल से तो ऐसे में भी काफी परेशानी बनी रहेगी। उनके अनुसार ग्रामीण मकान बनाने के लिए पता नहीं कहां-कहां से रिश्तेदारों से उधार लाकर अपना घोंसला बनाता है, अब सरकार ने उनके इस घोंसले पर एक प्रकार की पाबंदी लगा दी है। अब गांवों के ग्रामीण भी अपनी रिहाइश बनाने के लिए सरपंचों व ग्रामीण विकास विभाग के कार्यालयों के चक्कर कटते रहेंगे। उन्होंने सरकार को इस फैसले को वापस लेनेेे की अपील की है।
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