{"_id":"62bb50772a8e0f7e3e4b6855","slug":"cultural-rspura-news-jmu2628857190","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिख समाज के उत्थान के लिए कार्य करना प्रथामिकता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिख समाज के उत्थान के लिए कार्य करना प्रथामिकता
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आरएस पुरा। उपजिले में गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनावों में जीत प्राप्त करने पर नवनिर्वाचित सदस्यों ने सिख समाज के उत्थान के लिए सेवा की भावना से कार्य करने के लिए कहा।
आरएस पुुरा क्षेत्र से निर्वाचित हुए सरदार रणजीत सिंह टोहरा ने कहा कि कई लोगों ने इसे राजनीतिक अखाड़ा बना रखा है। इस बार के चुनाव में संगत ने अपना फैसला देकर धर्म के उत्थान के लिए कार्य करने के लिए चुना है। टोहरा ने कहा कि जिस प्रकार राज्य में पंजाबी भाषा को सम्मान मिलना चाहिए था, नहीं मिला सरकारी भाषा की सूची में केंद्र की ओर से बाहर रखने पर सिख समुदाय के लोगों की अनदेखी करना है। उन्होंने कहा कि पंजाबी भाषा को मान्यता दिलाए जाने के लिए संघर्ष किया जाएगा।
हल्का कीरपिंड से निर्वाचित सरदार बलविंदर सिंह ने कहा कि पहले तो जम्मू-कश्मीर के सिखों को पहले ही अल्पसंख्यक वंचित किया गया और बाद में पंजाबी भाषा की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि सिखों का का इतिहास रहा है कि देश की आजादी में योगदान दिया और बाद में देश के लोगों की बेहतरी के लिए सिख समाज की ओर से हर संकट में सेवा की भावना से कार्य किया, जिसके बारे में आज दुनिया जानती है। उन्होंने कहा कि जिस कार्य के लोगों ने उन्हें चुना है, उसे पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर अंजाम देने के लिए कहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
आरएस पुुरा क्षेत्र से निर्वाचित हुए सरदार रणजीत सिंह टोहरा ने कहा कि कई लोगों ने इसे राजनीतिक अखाड़ा बना रखा है। इस बार के चुनाव में संगत ने अपना फैसला देकर धर्म के उत्थान के लिए कार्य करने के लिए चुना है। टोहरा ने कहा कि जिस प्रकार राज्य में पंजाबी भाषा को सम्मान मिलना चाहिए था, नहीं मिला सरकारी भाषा की सूची में केंद्र की ओर से बाहर रखने पर सिख समुदाय के लोगों की अनदेखी करना है। उन्होंने कहा कि पंजाबी भाषा को मान्यता दिलाए जाने के लिए संघर्ष किया जाएगा।
विज्ञापन
हल्का कीरपिंड से निर्वाचित सरदार बलविंदर सिंह ने कहा कि पहले तो जम्मू-कश्मीर के सिखों को पहले ही अल्पसंख्यक वंचित किया गया और बाद में पंजाबी भाषा की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि सिखों का का इतिहास रहा है कि देश की आजादी में योगदान दिया और बाद में देश के लोगों की बेहतरी के लिए सिख समाज की ओर से हर संकट में सेवा की भावना से कार्य किया, जिसके बारे में आज दुनिया जानती है। उन्होंने कहा कि जिस कार्य के लोगों ने उन्हें चुना है, उसे पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत कर अंजाम देने के लिए कहा।
विज्ञापन