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भक्ति के मार्ग पर चलते मनुष्य को अनेक बाधाएं आतीं
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नौशेरा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वाधान में त्रियाठ में चल रही श्रीराम कथा का शनिवार को समापन हो गया। इस दौरान आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सौम्या भारती ने सुंदरकांड प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सुंदरकांड में हनुमान जी लंका में जाकर माता सीता की खोज करते हैं। लंका दहन भी करते हैं, हनुमान जी की यह यात्रा भक्ति यात्रा को प्रतिपादित करती है।
साध्वी ने कहा कि जब एक मनुष्य भक्ति पथ पर अग्रसर होता है। तो उसे अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर विषय विकारों के प्रति संघर्षरत रहते हुए और उत्साह पूर्वक एवं निडर होकर चलने से ही सफलता प्राप्त होती है। ईश्वर जीवन का आधार एवं लक्ष्य है। बुद्धिमान वह जो ईश्वर रूपी लक्ष्य प्राप्ति हेतु निरंतर अग्रसर है, और सफल मनुष्य वह है जो ईश्वर को प्राप्त कर लेता है। जब हनुमान जी लंका पहुंचते हैं तो उनकी भेंट विभीषण से होती है। गोस्वामी जी कहते हैं कि उस समय विभीषण जाग जाते हैं जब मनुष्य के जीवन में हनुमान जी जैसे सच्चे संतों का आगमन होता है।
साध्वी ने बताया कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान समाज को आंतरिक तौर पर जागृत कर एक सुंदर समाज के निर्माण में आगे बढ़ रहा है। कथा स्थल पर स्वामी सुचेतानंद, ठाकुर रणधीर सिंह केवल कृष्ण, सुरेखा कोतवाल, राजेंद्र शर्मा, नंद किशोर शर्मा, श्याम मेहरा, विनोद, बिहारी सिंह मौजूद रहे। कथा का समापन प्रभु की आरती के साथ किया गया।
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साध्वी ने कहा कि जब एक मनुष्य भक्ति पथ पर अग्रसर होता है। तो उसे अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर विषय विकारों के प्रति संघर्षरत रहते हुए और उत्साह पूर्वक एवं निडर होकर चलने से ही सफलता प्राप्त होती है। ईश्वर जीवन का आधार एवं लक्ष्य है। बुद्धिमान वह जो ईश्वर रूपी लक्ष्य प्राप्ति हेतु निरंतर अग्रसर है, और सफल मनुष्य वह है जो ईश्वर को प्राप्त कर लेता है। जब हनुमान जी लंका पहुंचते हैं तो उनकी भेंट विभीषण से होती है। गोस्वामी जी कहते हैं कि उस समय विभीषण जाग जाते हैं जब मनुष्य के जीवन में हनुमान जी जैसे सच्चे संतों का आगमन होता है।
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साध्वी ने बताया कि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान समाज को आंतरिक तौर पर जागृत कर एक सुंदर समाज के निर्माण में आगे बढ़ रहा है। कथा स्थल पर स्वामी सुचेतानंद, ठाकुर रणधीर सिंह केवल कृष्ण, सुरेखा कोतवाल, राजेंद्र शर्मा, नंद किशोर शर्मा, श्याम मेहरा, विनोद, बिहारी सिंह मौजूद रहे। कथा का समापन प्रभु की आरती के साथ किया गया।
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