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श्रावण संक्रांति 16 जुलाई को, 25 से चंद्र मास
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जम्मू। सनातन धर्म में श्रावण मास (सावन महीना) का खास महत्व है। इस साल श्रावण संक्रांति 16 जुलाई को है। अधिकतर शिव भक्त चंद्र मास से शिव पूजा शुरू करते हैं और चंद्र मास श्रावण कृष्ण पक्ष प्रतिपदा 25 जुलाई को है। इस दिन से चन्द्र मास शुरू होगा। श्रावण मास शुक्ल पक्ष का अंतिम दिन 22 अगस्त रविवार को होगा।
महंत रोहित शास्त्री के मुताबिक कोरोना महामारी के चलते घर में ही पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव पूजन करें और बाद में शिवलिंग को जल प्रवाह करें। पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए किसी पवित्र नदी या तालाब की मिट्टी लें, गाय का गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म मिलाकर शिवलिंग बनाएं। शिवलिंग के निर्माण में इस बात का ध्यान रखें कि यह 12 अंगुल से ऊंचा नहीं होना चाहिए। पार्थिव शिवलिंग समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करता है।
महंत रोहित शास्त्री बताते हैं कि भगवान शिव ने स्वयं अपने मुख से ब्रह्मा जी के मानस पुत्र सनत कुमार से कहा कि मुझे 12 महीनों में सावन विशेष प्रिय है। जब सनत कुमारों ने भगवान शिव से पूछा कि उन्हें सावन मास इतना प्रिय क्यों है तो शिव ने बताया कि देवी सती ने जब अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति के रूप में शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था में एक माह निराहार रहकर कठोर व्रत किया और शिव को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया, जिसके बाद से ही यह माह मुझे सभी मास में अत्यंत प्रिय हो गया। सावन का महीना ऐसा महीना है, जिसमें छह ऋतुओं का समावेश होता है।
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महंत रोहित शास्त्री के मुताबिक कोरोना महामारी के चलते घर में ही पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव पूजन करें और बाद में शिवलिंग को जल प्रवाह करें। पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए किसी पवित्र नदी या तालाब की मिट्टी लें, गाय का गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म मिलाकर शिवलिंग बनाएं। शिवलिंग के निर्माण में इस बात का ध्यान रखें कि यह 12 अंगुल से ऊंचा नहीं होना चाहिए। पार्थिव शिवलिंग समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करता है।
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महंत रोहित शास्त्री बताते हैं कि भगवान शिव ने स्वयं अपने मुख से ब्रह्मा जी के मानस पुत्र सनत कुमार से कहा कि मुझे 12 महीनों में सावन विशेष प्रिय है। जब सनत कुमारों ने भगवान शिव से पूछा कि उन्हें सावन मास इतना प्रिय क्यों है तो शिव ने बताया कि देवी सती ने जब अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति के रूप में शरीर त्याग किया था, उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति रूप में पाने का प्रण किया था। अपने दूसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के नाम से हिमाचल और रानी मैना के घर जन्म लिया। पार्वती ने युवावस्था में एक माह निराहार रहकर कठोर व्रत किया और शिव को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया, जिसके बाद से ही यह माह मुझे सभी मास में अत्यंत प्रिय हो गया। सावन का महीना ऐसा महीना है, जिसमें छह ऋतुओं का समावेश होता है।
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