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आषाढ़ गुप्त नवरात्र 11 जुलाई से शुरू होंगे
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आषाढ़ गुप्त नवरात्र 11 जुलाई से शुरू होंगे
अष्टमी 17 जुलाई को और महानवमी 18 जुलाई को होगी
जम्मू। मां आदशक्ति की उपासना का पर्व गुप्त नवरात्र 11 जुलाई से शुरू होंगे। आषाढ़ गुप्त नवरात्र की अष्टमी 17 जुलाई को है और 18 जुलाई को महानवमी होगी। देवी दुर्गा की साख लगाने का शुभ मुहूर्त 11 जुलाई के दिन सुबह 5 बजकर 31 मिनट से लेकर 7 बजकर 47 मिनट तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से दोपहर 1 बजकर 4 मिनट तक देवी दुर्गा के भक्त क्लश स्थापना, ज्योति प्रज्ज्वलन करें तथा देवी दुर्गा की साख लगाएं।
महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि चैत्र या वसंत नवरात्र के बारे में सभी जानते हैं लेकिन इसके अतिरिक्त दो और भी नवरात्र है। पहला गुप्त नवरात्र माघ महीने के शुक्ल पक्ष में आता है, दूसरा आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में। कम लोगों को इसके बारे में जानकारी होने और इसके पीछे छिपे रहस्यमयी कारणों की वजह से इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए साधक नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना करते हैं। प्रतिदिन सुबह-शाम मां दुर्गा की पूजा की जाती है। फिर अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं के पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है। इन दोनों माता के नवरूपों की पूजा की जाती है। साधक इन नौ दिनों में माता के नवरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की साधना करते हैं। ये दस महाविद्याएं हैं, मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी।
महंत रोहित शास्त्री के मुताबिक नवरात्रों के दिनों में किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा आदि नशे से दूर रहना चाहिए।
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अष्टमी 17 जुलाई को और महानवमी 18 जुलाई को होगी
जम्मू। मां आदशक्ति की उपासना का पर्व गुप्त नवरात्र 11 जुलाई से शुरू होंगे। आषाढ़ गुप्त नवरात्र की अष्टमी 17 जुलाई को है और 18 जुलाई को महानवमी होगी। देवी दुर्गा की साख लगाने का शुभ मुहूर्त 11 जुलाई के दिन सुबह 5 बजकर 31 मिनट से लेकर 7 बजकर 47 मिनट तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से दोपहर 1 बजकर 4 मिनट तक देवी दुर्गा के भक्त क्लश स्थापना, ज्योति प्रज्ज्वलन करें तथा देवी दुर्गा की साख लगाएं।
महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि चैत्र या वसंत नवरात्र के बारे में सभी जानते हैं लेकिन इसके अतिरिक्त दो और भी नवरात्र है। पहला गुप्त नवरात्र माघ महीने के शुक्ल पक्ष में आता है, दूसरा आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में। कम लोगों को इसके बारे में जानकारी होने और इसके पीछे छिपे रहस्यमयी कारणों की वजह से इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। नौ दिनों तक व्रत का संकल्प लेते हुए साधक नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना करते हैं। प्रतिदिन सुबह-शाम मां दुर्गा की पूजा की जाती है। फिर अष्टमी या नवमी के दिन कन्याओं के पूजन के साथ व्रत का उद्यापन किया जाता है। इन दोनों माता के नवरूपों की पूजा की जाती है। साधक इन नौ दिनों में माता के नवरूपों की बजाय दस महाविद्याओं की साधना करते हैं। ये दस महाविद्याएं हैं, मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी।
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महंत रोहित शास्त्री के मुताबिक नवरात्रों के दिनों में किसी भी प्रकार की तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए। प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा आदि नशे से दूर रहना चाहिए।
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