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जम्मू-कश्मीरः अखनूर में बंदर पकड़ने आगरा से आएगी टीम, इनके आतंक से बच्चे छत पर नहीं जाते

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

जम्मू संभाग के अखनूर कस्बे में म्युनिसिपल कमेटी ने बंदरों को पकड़ने के लिए खाका तैयार कर लिया है। उन्हें पकड़ कर शहर से दूर जंगलों में छोड़ा जाएगा। बंदरों को पकड़ने के लिए आगरा की टीम से अनुबंधित हुआ है।

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म्युनिसिपल कमेटी ने बंदरों से निजात पाने के लिए प्रस्ताव को पास करके एसडीएम के मध्य वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन विभाग की तरफ से मंजूरी मिली है। कमेटी ने आगरा की बंदर पकड़ने वाली टीम से अनुबंध किया है। वह हर बंदर को पकड़ने का 500- 600 रुपये लेगी। पकडे़ गए बंदरों को शहर से दूर क्षेत्र के जंगलों में छोड़ा जाएगा।
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एसडीएम गोपाल सिंह ने बताया प्रोटेक्शन विभाग से अनुरोध किया गया था कि कस्बे में लोगों के लिए जी का जंजाल बन चुके बंदरों को पकड़ कर जंगल में छोड़ा जाए। इस पर मंजूरी मिल गई है। बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया कमेटी शुरू करेगी।
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म्यूनिसिपल कमेटी के चेयरमैन दीपेश सिंह पवार ने बताया कि प्रशासन और वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्टशन विभाग से बंदरों को पकड़ने की मंजूरी मिलने पर आगरा की बंदर पकड़ने की टीम से अनुबंध किया जा रहा है। शीघ्र ही प्रक्रिया शुरू होगी। इस प्रकार से लोगों की परेशानियों का समाधान होगा।
 

डर इतना कि बच्चे छत पर नहीं जाते

पार्षद राकेश मल्होत्रा ने बताया कि जबसे म्यूनिसिपल कमेटी का गठन हुआ है तभी से ही बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब मंजूरी मिलने पर लोगों को खूंखार हो चुके बंदरों से निजात मिलेगी। हर साल बंदर करीब बीस से तीस लोग घायल कर देते हैं। इसमें अधिकतर महिला और बच्चे शामिल होते हैं।

वर्तमान डीसी जम्मू सुषमा चौहान ने 2012 मे एसडीएम अखनूर रहते हुए मेरठ से बंदर पकड़ने टीम को अनुबंध करके करीब तीन सौ बंदरों को पकड़ कर जंगलों में छुड़वाया था। कस्बे में इन दिनों करीब 250 से 300 सौ बंदर हैं।

वे झुंड में घरों की छत पर उत्पात मचाकर सामान नष्ट करने के अलावा लोगों पर हमला कर देते हैं। इस पर परिवार के सदस्य बच्चों को अकेले छतों पर नहीं भेजते। माह में करीब पांच लोग बंदर के काटने का शिकार होते हैं। यह हमले छतों और चिनाब दरिया घाटों पर करते।

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