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Jammu News: राजा शांतनु के कार्यकाल में प्रजा काफी खुश और सत्यवादी थी
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नंबर नोट करो नंबरअरनिया में भागवत कथा का तीसरा दिन
संंवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। वार्ड-5 के काशीपुर क्षेत्र में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया है। बुधवार को कथा वाचक राकेश शास्त्री ने राजा शांतनु के कार्यकाल का वर्णन सुनाया, जिसमें उन्होंने कहा कि राजा शांतनु के कार्यकाल में प्रजा काफी खुश और सत्यवादी थी। हर तरफ भगवान का स्मरण करने का लोगों को अवसर मिलता था।
उन्होंने कहा कि वही राजा महान कहलाता है, जिसके कार्यकाल में प्रजा खुश रहे। जिस राजा के बारे में प्रजा चुगली या निंदा करे, तो मान लेना चाहिए कि वह राजा प्रजा को खुश रखने लायक नहीं है, और न ही अपना देश सफलतापूर्वक चला रहा है। उन्होंने बताया कि हस्तिनापुर नरेश के नाम से जाने वाले राजा शांतनु के कार्यकाल में हर तरफ प्यार की नदी बहती थी और लोग दिन-रात भगवान का स्मरण करते रहते थे। राकेश शास्त्री ने प्रवचन के दौरान लोगों को बताया कि सत्संग सुनने से मनुष्य कई रोगों से ठीक होता है और सत्संग ही एक ऐसा माध्यम है, जिससे मनुष्य भगवान का भजन स्मरण करता है। भागवत कथा में सुबह पूजा की जाती है और 1 से 4:00 बजे तक संगत को प्रवचन सुनाए जाते हैं। उसके बाद आरती की जाती है और उसके बाद प्रसाद संगत को दिया जाता है।
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संंवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। वार्ड-5 के काशीपुर क्षेत्र में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया है। बुधवार को कथा वाचक राकेश शास्त्री ने राजा शांतनु के कार्यकाल का वर्णन सुनाया, जिसमें उन्होंने कहा कि राजा शांतनु के कार्यकाल में प्रजा काफी खुश और सत्यवादी थी। हर तरफ भगवान का स्मरण करने का लोगों को अवसर मिलता था।
उन्होंने कहा कि वही राजा महान कहलाता है, जिसके कार्यकाल में प्रजा खुश रहे। जिस राजा के बारे में प्रजा चुगली या निंदा करे, तो मान लेना चाहिए कि वह राजा प्रजा को खुश रखने लायक नहीं है, और न ही अपना देश सफलतापूर्वक चला रहा है। उन्होंने बताया कि हस्तिनापुर नरेश के नाम से जाने वाले राजा शांतनु के कार्यकाल में हर तरफ प्यार की नदी बहती थी और लोग दिन-रात भगवान का स्मरण करते रहते थे। राकेश शास्त्री ने प्रवचन के दौरान लोगों को बताया कि सत्संग सुनने से मनुष्य कई रोगों से ठीक होता है और सत्संग ही एक ऐसा माध्यम है, जिससे मनुष्य भगवान का भजन स्मरण करता है। भागवत कथा में सुबह पूजा की जाती है और 1 से 4:00 बजे तक संगत को प्रवचन सुनाए जाते हैं। उसके बाद आरती की जाती है और उसके बाद प्रसाद संगत को दिया जाता है।
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