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नशे की तस्करी में हो रहा क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल : एलजी
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- कहा-डार्क वेब ड्रग्स व्यापार के लिए नए बाजार के रूप में उभर रहा
- जम्मू संभाग में आतंकवाद को फिर से जिंदा करने की कोशिश की जा रही
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि नशा तस्करी का खतरा अब पारंपरिक नहीं रहा है। तस्कर और नार्को आतंकी हर दिन अपने संचार के तरीके बदल रहे हैं। डार्क वेब ड्रग्स व्यापार के लिए नए बाजार के रूप में उभर रहा है। पारंपरिक लेनदेन की जगह नार्को डीलिंग (नशीले पदार्थाें की तस्करी) में क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है। गांदरबल जिले के मनीगाम में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) में शुक्रवार को पासिंग आउट परेड के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं।
उपराज्यपाल ने कहा कि तकनीक तेज गति से बदल रही है। प्रशिक्षण स्कूलों के बाहर नई तकनीक का उपयोग और दुश्मन की चुनौतियों से निपटने के लिए कौशल का उन्नयन समय की जरूरत है। नई तकनीकों के दुरुपयोग से संगठित अपराध का विस्तार हुआ है। साइबर अपराध भी बढ़ा है। ऐसी स्थिति में आपको अपराधियों से एक कदम आगे रहने के लिए निरंतर नवाचार की नीति लागू करनी होगी। मुझे उम्मीद है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस इन सभी चुनौतियों से निपटने के लिए समर्पित और तैयार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन और भारत सरकार पूरी ताकत के साथ सुरक्षाबलों के साथ खड़ी है।
सभी एजेंसियों को मजबूत टीम
के रूप में आना होगा एक साथ
सिन्हा ने कहा, जम्मू संभाग में आतंकवाद को फिर से जिंदा करने की कोशिश की जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में पुलिस, सेना व अन्य सुरक्षाबलों ने घाटी में आतंकवाद को नियंत्रित करने में काफी हद तक सफलता हासिल की है। हमें यकीन है कि जिस तरह से सुरक्षाबल कश्मीर घाटी में आतंकी घटनाओं पर लगाम लगाने में सफल रहे, आप जम्मू में भी वही संकल्प दोहराएंगे। पड़ोसी देश की नापाक साजिशें नाकाम करने के लिए सभी एजेंसियों को मजबूत टीम के रूप में एक साथ आना होगा।
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बेहतर रणनीति, तकनीक, खुफिया सूचना का संयोजन आतंकवाद की ताबूत में आखिरी कील होगी
एलजी ने कहा कि पुलिस को भविष्य के लिए तैयार रहना होगा, जो तकनीकी रूप से सुसज्जित हो और आतंकवाद और अपराध की उभरती चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो। जम्मू-कश्मीर पुलिस देश के अन्य बलों से बहुत अलग है, क्योंकि इसके पास बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। एक तरफ हमारे बहादुर जवान आतंकवाद का सामना करते हैं और दूसरी तरफ उनके पास कानून व व्यवस्था बनाए रखने के साथ प्रदेश में विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने में मदद करने की जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि विशेष रणनीति, उन्नत तकनीकी और विशिष्ट खुफिया जानकारी का संयोजन आतंकवाद और इसके पूरे समर्थन तंत्र के ताबूत में आखिरी कील ठोक देगा। भविष्य में आतंकवाद विरोधी, कानून और व्यवस्था अभियानों की सफलता प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग पर निर्भर करेगी।
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- जम्मू संभाग में आतंकवाद को फिर से जिंदा करने की कोशिश की जा रही
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि नशा तस्करी का खतरा अब पारंपरिक नहीं रहा है। तस्कर और नार्को आतंकी हर दिन अपने संचार के तरीके बदल रहे हैं। डार्क वेब ड्रग्स व्यापार के लिए नए बाजार के रूप में उभर रहा है। पारंपरिक लेनदेन की जगह नार्को डीलिंग (नशीले पदार्थाें की तस्करी) में क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है। गांदरबल जिले के मनीगाम में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (पीटीएस) में शुक्रवार को पासिंग आउट परेड के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं।
उपराज्यपाल ने कहा कि तकनीक तेज गति से बदल रही है। प्रशिक्षण स्कूलों के बाहर नई तकनीक का उपयोग और दुश्मन की चुनौतियों से निपटने के लिए कौशल का उन्नयन समय की जरूरत है। नई तकनीकों के दुरुपयोग से संगठित अपराध का विस्तार हुआ है। साइबर अपराध भी बढ़ा है। ऐसी स्थिति में आपको अपराधियों से एक कदम आगे रहने के लिए निरंतर नवाचार की नीति लागू करनी होगी। मुझे उम्मीद है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस इन सभी चुनौतियों से निपटने के लिए समर्पित और तैयार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन और भारत सरकार पूरी ताकत के साथ सुरक्षाबलों के साथ खड़ी है।
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सभी एजेंसियों को मजबूत टीम
के रूप में आना होगा एक साथ
सिन्हा ने कहा, जम्मू संभाग में आतंकवाद को फिर से जिंदा करने की कोशिश की जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में पुलिस, सेना व अन्य सुरक्षाबलों ने घाटी में आतंकवाद को नियंत्रित करने में काफी हद तक सफलता हासिल की है। हमें यकीन है कि जिस तरह से सुरक्षाबल कश्मीर घाटी में आतंकी घटनाओं पर लगाम लगाने में सफल रहे, आप जम्मू में भी वही संकल्प दोहराएंगे। पड़ोसी देश की नापाक साजिशें नाकाम करने के लिए सभी एजेंसियों को मजबूत टीम के रूप में एक साथ आना होगा।
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बेहतर रणनीति, तकनीक, खुफिया सूचना का संयोजन आतंकवाद की ताबूत में आखिरी कील होगी
एलजी ने कहा कि पुलिस को भविष्य के लिए तैयार रहना होगा, जो तकनीकी रूप से सुसज्जित हो और आतंकवाद और अपराध की उभरती चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो। जम्मू-कश्मीर पुलिस देश के अन्य बलों से बहुत अलग है, क्योंकि इसके पास बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। एक तरफ हमारे बहादुर जवान आतंकवाद का सामना करते हैं और दूसरी तरफ उनके पास कानून व व्यवस्था बनाए रखने के साथ प्रदेश में विकास के लिए अनुकूल माहौल बनाने में मदद करने की जिम्मेदारी है। उम्मीद है कि विशेष रणनीति, उन्नत तकनीकी और विशिष्ट खुफिया जानकारी का संयोजन आतंकवाद और इसके पूरे समर्थन तंत्र के ताबूत में आखिरी कील ठोक देगा। भविष्य में आतंकवाद विरोधी, कानून और व्यवस्था अभियानों की सफलता प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग पर निर्भर करेगी।