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बारामुला को आतंक मुक्त बनाने में इस बटालियन का है अहम रोल, अब पूरे कश्मीर में चलाएंगे यह मिशन

Fri, 25 Jan 2019 03:11 PM IST
Pranjal Dixit अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर Published by: Pranjal Dixit Updated Fri, 25 Jan 2019 03:11 PM IST
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crpf 53 battalion played an important role in making baramulla militant free, now kashmir is target
बारामुला को आतंक मुक्त बनाने में इस जवानों का अहम रोल - फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर के बारामुला में बुधवार को सुरक्षा बलों के साथ हुई आतंकियों की मुठभेड़ में लश्कर के 3 आतंकियों के मारे जाने के साथ ही जिले को पहला आतंकवादी मुक्त जिला घोषित किया गया। आतंक विरोधी गतिविधियों व जिले से आतंकियों के सफाए में सीआरपीएफ की 53 बटालियन का भी अहम योगदान रहा है।
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सीआरपीएफ की 53 बटालियन के सीओ विनय कुमार तिवारी ने बताया कि अगर इस समय बारामुला आतंकवादी मुक्त जिला घोषित किया गया है तो उसमें उनकी बटालियन के जवानों का भी अहम योगदान है, जिन्होंने दिन रात एक कर आतंकियों के खिलाफ  चलाये गए ऑपरेशन में भाग लिया। 
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उन्होंने बताया कि जिले में आतंकवाद के खिलाफ सीआरपीएफ, जम्मू कश्मीर पुलिस व सेना ने समन्वय के साथ काम किया। तिवारी के अनुसार पुलिस के साथ-साथ सीआरपीएफ ने भी अपना एक नेटवर्क बनाया जहां से समय-समय पर उन्हें इनपुट प्राप्त होते हैं, जिनके आधार पर वह कार्रवाई को अंजाम देते हैं।
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सभी लोग इसके लिए जम्मू कश्मीर पुलिस व अन्य सुरक्षा एजेंसियों की सराहना करते नहीं थक रहे। इस बीच एसएसपी ने कहना है कि चंद आतंकियों को मार गिराना बहस करने वाली बात नहीं है बल्कि असली बहस यह है कि किस तरह के अथक प्रयास के चलते युवाओं को आतंकवाद में शामिल होने से रोका गया। इतना ही नहीं आतंकी संगठन युवाओं को अपना निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन हम भी इन मंसूबों को नकारते हुए अपने कर्तव्य के लिए प्रतिबद्ध हैं।

एसएसपी इम्तियाज हुसैन ने ट्विटर हैंडल से एक के बाद एक पांच ट्वीट किए, जिनमें उन्होंने पहले ट्वीट में लिखा कि जब बारामुला में कोई भी स्थानीय आतंकी नहीं होने की बहस चल रही है तो कुछ आतंकियों की हत्या करना बहस का मुद्दा नहीं है। बहस का असली मुद्दा है किस तरह से परिवार वालों और अच्छे लोगों की सहायता के चलते युवाओं को आतंक के पन्नो में शामिल होने से रोका गया। दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखाए जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी ने इस समर्थन के लिए लोगों को धन्यवाद दिया है। मिलिटेंट भर्ती एक चुनौती बनी हुई है। इसे रोकने के लिए शालीनता की कोई गुंजाइश नहीं है।

तीसरे ट्वीट में एसएसपी ने लिखा आतंकवादी संगठन युवाओं को युद्ध बलि के लिए लेने का प्रयास करना जारी रखेंगे और इसके लिए हमारे लड़कों का उन्हें देने से इनकार करने का हमारा प्रयास भी अधिक प्रतिबद्धता के साथ जारी रहेगा। इस बीच चौथे ट्वीट में उन्होंने लिखा मीडिया टकटकी से दूर अनसुने नायक है, जिन्होंने इन लड़कों को परामर्श देने के लिए अपने सभी ज्ञान और अनुभव का इस्तेमाल किया। हम सभी के द्वारा उन्हें तलाशने और परिवारों में वापस लाने के लिए भी प्रयास किए गए हैं।

आखिरी ट्वीट में एसएसपी ने लिखा युवाओं द्वारा तर्क सुनने हिंसा की निरर्थकता को समझने और हिंसा के रास्ते को त्याग उनके सामान्य जीवन में वापस लौटना भी खुशी की बात है। हमारे कश्मीरी समाज को अपने बच्चों को बचाने के लिए अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
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