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जम्मू-कश्मीर में पहली बार दिखा मगरमच्छ, पाकिस्तान से आने की संभावना
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Mon, 29 Aug 2016 10:52 PM IST
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पकड़ा गया मगरमच्छ
- फोटो : Amar Ujala
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सांबा के निचला बेला गांव से पकड़ा गया मगरमच्छ अब जम्मू में ही रहेगा। वन्यजीव विभाग ने इसे फिलहाल जम्मू के मांडा डियर पार्क के डक क्लोजर (बतखों का बाड़ा) में रखा है, लेकिन जम्मू के नगरोटा में बनने जा रहे राष्ट्र्र्र स्तरीय चिड़ियाघर के तैयार होते ही इसे चिड़ियाघर में शिफ्ट कर दिया जाएगा।
यह फैसला वन एवं पर्यावरण मंत्री के आदेश के बाद लिया गया। दिलचस्प है कि जम्मू कश्मीर सहित हिमाचल प्रदेश और पंजाब में भी कहीं पर मगरमच्छ नहीं होते। सांबा में मगरमच्छ कहां से और कैसे आया, इसे लेकर वन्यजीव विभाग अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया है।
वन्य जीव विभाग के डीएफओ अमित शर्मा ने बताया कि मगरमच्छ मार्श क्रोकोडाइल प्रजाति का है, जिसका सबसे बड़ा आकार 16 फीट तक होता है। पकड़ा गया मगरमच्छ 6 फुट 4 इंच का है, जिसे सब एडल्ट श्रेणी का माना जाता है।
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यह फैसला वन एवं पर्यावरण मंत्री के आदेश के बाद लिया गया। दिलचस्प है कि जम्मू कश्मीर सहित हिमाचल प्रदेश और पंजाब में भी कहीं पर मगरमच्छ नहीं होते। सांबा में मगरमच्छ कहां से और कैसे आया, इसे लेकर वन्यजीव विभाग अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया है।
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वन्य जीव विभाग के डीएफओ अमित शर्मा ने बताया कि मगरमच्छ मार्श क्रोकोडाइल प्रजाति का है, जिसका सबसे बड़ा आकार 16 फीट तक होता है। पकड़ा गया मगरमच्छ 6 फुट 4 इंच का है, जिसे सब एडल्ट श्रेणी का माना जाता है।
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आखिर कहां से आया मगरमच्छ?
मगरमच्छ
- फोटो : Demp Pic.
उन्होंने बताया कि वन्यजीव विभाग पहले इसे चंडीगढ़ में शिफ्ट करने की सोच रहा था, लेकिन मंत्री द्वारा निर्देश मिलने पर इसे जम्मू में ही स्थायी रूप से रखने का निर्णय लिया गया है।
जम्मू-कश्मीर की जलवायु में मगरमच्छ को पालने के औचित्य पर उन्होंने कहा कि इस प्रजाति के मगरमच्छ बलूचिस्तान से असम तक की जलवायु में आसानी से रह सकते हैं। ऐसे में जलवायु से संबंधित कोई समस्या नहीं होगी।
मगरमच्छ सांबा तक कैसे पहुंचा, इस पर उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान से भी हो सकता है, क्योंकि पाकिस्तान से कई दरियाई नाले जुड़ते हैं और मगरमच्छ धारा के विपरीत भी आसानी से तैर सकते हैं। जमीन पर मीलों चल सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर की जलवायु में मगरमच्छ को पालने के औचित्य पर उन्होंने कहा कि इस प्रजाति के मगरमच्छ बलूचिस्तान से असम तक की जलवायु में आसानी से रह सकते हैं। ऐसे में जलवायु से संबंधित कोई समस्या नहीं होगी।
मगरमच्छ सांबा तक कैसे पहुंचा, इस पर उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान से भी हो सकता है, क्योंकि पाकिस्तान से कई दरियाई नाले जुड़ते हैं और मगरमच्छ धारा के विपरीत भी आसानी से तैर सकते हैं। जमीन पर मीलों चल सकते हैं।