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जम्मू के शिवमंदिर में तोड़फोड़ का आरोपी बरी
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Fri, 20 Jan 2017 09:29 PM IST
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कोर्ट
- फोटो : Demo Pic.
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जानीपुर के अपर रूपनगर इलाके में स्थित आपशंभू शिव मंदिर में तोड़फोड़ के आरोपी को स्थानीय अदालत ने बरी कर दिया। दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी होने पर अदालत ने कहा, आरोपी की मानसिक हालत ठीक नहीं है। अपराध के पीछे की मंशा मायने रखती है।
आरोपी का चूंकि मानसिक संतुलन सही नहीं था, ऐसे में उसके कृत्य को मंशा के साथ अपराध के रूप में स्थापित नहीं किया जा सका। लिहाजा उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकती। यदि उसके खिलाफ कोई और मामला नहीं है तो आरोपी को तत्काल रिहा किया जाए।
जानीपुर पुलिस थाने में दर्ज मामले के अनुसार यासिर अल्फाज निवासी शिवा डोडा ने 14 जून 2016 को अपर रूपनगर स्थित आपशंभू शिव मंदिर में तोड़फोड़ को अंजाम दिया। इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। तफ्तीश के दौरान पाया गया कि आरोपी मानसिक रोग से पीड़ित है।
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मेडिकल कालेज जम्मू अस्पताल के रिकार्ड से पता चला कि उसे जुलाई 2015 में डोडा जिला अस्पताल से रेफर किया गया था। मामले के चिकित्सकीय पहलु की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज जम्मू के डाक्टरों की टीम गठित की गई। आपराधिक पहलु की जांच के लिए स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (सिट) गठित की गई। तफ्तीश पूरी होने पर चार्जशीट में आरोपी के खिलाफ आरपीसी की धारा 295/295-ए/353/506 के आरोप बनाए गए, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
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आरोपी का चूंकि मानसिक संतुलन सही नहीं था, ऐसे में उसके कृत्य को मंशा के साथ अपराध के रूप में स्थापित नहीं किया जा सका। लिहाजा उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकती। यदि उसके खिलाफ कोई और मामला नहीं है तो आरोपी को तत्काल रिहा किया जाए।
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जानीपुर पुलिस थाने में दर्ज मामले के अनुसार यासिर अल्फाज निवासी शिवा डोडा ने 14 जून 2016 को अपर रूपनगर स्थित आपशंभू शिव मंदिर में तोड़फोड़ को अंजाम दिया। इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। तफ्तीश के दौरान पाया गया कि आरोपी मानसिक रोग से पीड़ित है।
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मेडिकल कालेज जम्मू अस्पताल के रिकार्ड से पता चला कि उसे जुलाई 2015 में डोडा जिला अस्पताल से रेफर किया गया था। मामले के चिकित्सकीय पहलु की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज जम्मू के डाक्टरों की टीम गठित की गई। आपराधिक पहलु की जांच के लिए स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (सिट) गठित की गई। तफ्तीश पूरी होने पर चार्जशीट में आरोपी के खिलाफ आरपीसी की धारा 295/295-ए/353/506 के आरोप बनाए गए, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।