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Jammu News: रास्ते के विवाद में एफआईआर दर्ज करने के आदेश से इन्कार
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अदालत ने कहा - मामला सिविल और राजस्व प्रकृति का
संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। सांबा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने विजयपुर के गांव बगला में रास्ते पर कब्जे को लेकर दायर याचिका पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर कोई संज्ञेय आपराधिक अपराध नहीं बनता और विवाद का स्वरूप सिविल व राजस्व प्रकृति का है।
याचिकाकर्ता राम कृष्ण ने आरोप लगाया था कि उनके खेत तक जाने वाले रास्ते पर योगराज सिंह और सुधेश सिंह ने अवैध कब्जा कर लिया है। शिकायत में रास्ता तोड़ने, ट्रैक्टर खड़ा कर आवागमन रोकने और गोबर-कचरा डालकर परेशान करने की बात कही गई। इसी आधार पर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश मांगे गए थे। अदालत के आदेश पर पुलिस से जांच रिपोर्ट मंगाई गई। रिपोर्ट में खसरा नंबर 636 को राज्य भूमि और खसरा नंबर 637 को शिकायतकर्ता के नाम दर्ज बताया गया। साथ ही दोनों पक्षों के बीच भूमि की पहचान, सीमांकन और कब्जे को लेकर विवाद होना सामने आया। अदालत ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप भूमि विवाद से जुड़े हैं जिनका समाधान सिविल या राजस्व विभाग के माध्यम से किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में आपराधिक कानून का सहारा नहीं लिया जा सकता इसलिए एफआईआर दर्ज करने की मांग खारिज कर दी गई। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता चाहें तो सिविल या राजस्व मंच पर अपनी बात रख सकते हैं। यदि भविष्य में कोई नया ठोस साक्ष्य सामने आता है तो पुनः अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांबा। सांबा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने विजयपुर के गांव बगला में रास्ते पर कब्जे को लेकर दायर याचिका पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस स्तर पर कोई संज्ञेय आपराधिक अपराध नहीं बनता और विवाद का स्वरूप सिविल व राजस्व प्रकृति का है।
याचिकाकर्ता राम कृष्ण ने आरोप लगाया था कि उनके खेत तक जाने वाले रास्ते पर योगराज सिंह और सुधेश सिंह ने अवैध कब्जा कर लिया है। शिकायत में रास्ता तोड़ने, ट्रैक्टर खड़ा कर आवागमन रोकने और गोबर-कचरा डालकर परेशान करने की बात कही गई। इसी आधार पर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश मांगे गए थे। अदालत के आदेश पर पुलिस से जांच रिपोर्ट मंगाई गई। रिपोर्ट में खसरा नंबर 636 को राज्य भूमि और खसरा नंबर 637 को शिकायतकर्ता के नाम दर्ज बताया गया। साथ ही दोनों पक्षों के बीच भूमि की पहचान, सीमांकन और कब्जे को लेकर विवाद होना सामने आया। अदालत ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप भूमि विवाद से जुड़े हैं जिनका समाधान सिविल या राजस्व विभाग के माध्यम से किया जाना चाहिए। ऐसे मामलों में आपराधिक कानून का सहारा नहीं लिया जा सकता इसलिए एफआईआर दर्ज करने की मांग खारिज कर दी गई। हालांकि कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता चाहें तो सिविल या राजस्व मंच पर अपनी बात रख सकते हैं। यदि भविष्य में कोई नया ठोस साक्ष्य सामने आता है तो पुनः अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
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