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Jammu News: कोऑपरेटिव सोसाइटी ब्यासुपर की इमारत का निर्माण रुका, जमीन पर स्टे ऑर्डर जारी
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अरनिया। व्यासपुर कोऑपरेटिव सोसाइटी की जमीन पर गांव के रतन सिंह ने मालिकाना दावा किया है। कोर्ट की तरफ से निर्माण कार्य पर अस्थायी तौर पर रोक लगा दी गई है। ब्यासपुर कोऑपरेटिव सोसाइटी की जमीन पर कानूनी नोटिस चसपा कर दिया गया है। इसके चलते पीडब्ल्यूडी विभाग की तरफ से सोमवार को इमारत का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सका। हालांकि पीडब्ल्यूडी विभाग ने ठेकेदार से शनिवार को चूना बिखेरकर निशानदेही करवा दी थी।
रतन सिंह ने जमीन पर मालिकाना हक जताते हुए कहा है कि बुजुर्गों ने कोऑपरेटिव सोसाइटी के लिए अस्थायी तौर पर जमीन दी थी। जब तक कोऑपरेटिव सोसाइटी गांव में सुचारू थी। तब तक किसी प्रकार की आपत्ति नहीं थी, परंतु पिछले काफी लंबे समय से कोऑपरेटिव सोसाइटी बंद पड़ी हुई है। उस पर दोबारा से कोऑपरेटिव सोसाइटी के सदस्य निर्माण कार्य शुरू करने जा रहे हैं। जिसके चलते उन्होंने कानूनी कार्यवाही के तहत स्टे आर्डर लिया है। उन्होंने कहा कि जबसे कोऑपरेटिव सोसाइटी बंद पड़ी हुई है। तब से कब्जा उनके पास है। हालांकि कोऑपरेटिव सोसायटी पर जो भी सोसाइटी का ईंट पत्थर और अन्य कबाड़ जमा है। उसे ले जाएं। जिस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। परंतु कोऑपरेटिव सोसाइटी के सदस्य जानबूझकर उस जमीन पर हक जता रहे हैं। इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव सोसाइटी के पास किसी प्रकार के भी दस्तावेज या रजिस्ट्री है तो वह कोर्ट में साबित करके जमीन को अपने पास रख सकते हैं। परंतु अस्थायी तौर पर हमारे बुजुर्गों द्वारा दी गई जमीन को हम कानूनी तौर पर वापस ले रहे हैं, जिसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
इस मुद्दे पर कोऑपरेटिव सोसायटी आरएस पुरा के असिस्टेंट रजिस्ट्रार करण गुप्ता ने कहा कि कोर्ट की तरफ से निर्माण कार्य का स्थायी तौर पर स्टे आर्डर मिला है। जिसके चलते निर्माण कार्य स्थगित किया गया है। उन्होंने कहा कि जब से कोऑपरेटिव सोसाइटी खुली है। कब से लेकर अभी तक कब्जा कोऑपरेटिव सोसाइटी व्यासपुर के सदस्यों के पास है। मालिकों की तरफ से कानूनी तौर पर किया गया दावा सरासर गलत है। कोर्ट की तरफ से 8 फरवरी को सुनवाई में आगे की कार्यवाही का फैसला किया जाएगा।
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इस मुद्दे पर रतन सिंह ने बताया कि कोऑपरेटिव सोसाइटी की जमीन उनके पिता ने अस्थायी तौर पर दी थी। पिछले लंबे समय से कोऑपरेटिव सोसाइटी बंद पड़ी हुई है। उसके बाद से कोऑपरेटिव सोसाइटी की जमीन पर कब्जा उनके पास है। परंतु कोऑपरेटिव सोसाइटी के सदस्य जबरदस्ती वहां पर निर्माण कार्य करवा रहे हैं। जिसके चलते कोर्ट से स्टे आर्डर लिया गया है।
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रतन सिंह ने जमीन पर मालिकाना हक जताते हुए कहा है कि बुजुर्गों ने कोऑपरेटिव सोसाइटी के लिए अस्थायी तौर पर जमीन दी थी। जब तक कोऑपरेटिव सोसाइटी गांव में सुचारू थी। तब तक किसी प्रकार की आपत्ति नहीं थी, परंतु पिछले काफी लंबे समय से कोऑपरेटिव सोसाइटी बंद पड़ी हुई है। उस पर दोबारा से कोऑपरेटिव सोसाइटी के सदस्य निर्माण कार्य शुरू करने जा रहे हैं। जिसके चलते उन्होंने कानूनी कार्यवाही के तहत स्टे आर्डर लिया है। उन्होंने कहा कि जबसे कोऑपरेटिव सोसाइटी बंद पड़ी हुई है। तब से कब्जा उनके पास है। हालांकि कोऑपरेटिव सोसायटी पर जो भी सोसाइटी का ईंट पत्थर और अन्य कबाड़ जमा है। उसे ले जाएं। जिस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। परंतु कोऑपरेटिव सोसाइटी के सदस्य जानबूझकर उस जमीन पर हक जता रहे हैं। इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोऑपरेटिव सोसाइटी के पास किसी प्रकार के भी दस्तावेज या रजिस्ट्री है तो वह कोर्ट में साबित करके जमीन को अपने पास रख सकते हैं। परंतु अस्थायी तौर पर हमारे बुजुर्गों द्वारा दी गई जमीन को हम कानूनी तौर पर वापस ले रहे हैं, जिसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
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इस मुद्दे पर कोऑपरेटिव सोसायटी आरएस पुरा के असिस्टेंट रजिस्ट्रार करण गुप्ता ने कहा कि कोर्ट की तरफ से निर्माण कार्य का स्थायी तौर पर स्टे आर्डर मिला है। जिसके चलते निर्माण कार्य स्थगित किया गया है। उन्होंने कहा कि जब से कोऑपरेटिव सोसाइटी खुली है। कब से लेकर अभी तक कब्जा कोऑपरेटिव सोसाइटी व्यासपुर के सदस्यों के पास है। मालिकों की तरफ से कानूनी तौर पर किया गया दावा सरासर गलत है। कोर्ट की तरफ से 8 फरवरी को सुनवाई में आगे की कार्यवाही का फैसला किया जाएगा।
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इस मुद्दे पर रतन सिंह ने बताया कि कोऑपरेटिव सोसाइटी की जमीन उनके पिता ने अस्थायी तौर पर दी थी। पिछले लंबे समय से कोऑपरेटिव सोसाइटी बंद पड़ी हुई है। उसके बाद से कोऑपरेटिव सोसाइटी की जमीन पर कब्जा उनके पास है। परंतु कोऑपरेटिव सोसाइटी के सदस्य जबरदस्ती वहां पर निर्माण कार्य करवा रहे हैं। जिसके चलते कोर्ट से स्टे आर्डर लिया गया है।