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JK: बीफ पर सरकार से एक हफ्ते में जवाब मांगा

Thu, 17 Sep 2015 09:50 AM IST
Updated Thu, 17 Sep 2015 09:50 AM IST
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court sought answer on beef case from the government in a week

गोवंश (बीफ) वध पर प्रतिबंध का मामला एक बार फिर अदालत में है। इसे अपराध की श्रेणी में रखने के खिलाफ दायर एक याचिका को सुनवाई के स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय ने बुधवार को बीफ पर बंदिश के प्रावधानों के बारे में राज्य सरकार को नोटिस भेजकर एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है।

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उल्लेखनीय है कि रणबीर दंड संहिता (आरपीसी) में गोवंश वध को अपराध की श्रेणी में रखने का प्रावधान है। कश्मीर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कानून के प्रोफेसर अफजल कादरी ने इन प्रावधानों के खिलाफ अपने वकील फैसल कादरी के माध्यम से रिट याचिका दायर की।
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रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश मोहम्मद याकूब मीर और बंसी लाल भट की खंडपीठ ने राज्य सरकार को यह नोटिस जारी किया है। फैजल कादरी के मुताबिक अदालत ने कहा है कि विधायिका चाहे तो वह आरपीसी के इससे संबंधित प्रावधान को निरस्त अथवा संशोधित कर सकती है। इसमें याचिका अड़ंगा नहीं होगी।
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यह प्रावधान सीधे उनकी निजी स्वतंत्रता पर हमला

court sought answer on beef case from the government in a week

कादरी ने बताया कि उन्होंने आरपीसी के चैप्टर 15 की धारा 298-ए, 298-बी, 298-सी और 298-डी को चुनौती दी है। कादरी ने अपनी याचिका में कहा है कि ये धाराएं भारतीय संविधान की धारा 14,21,25 और 29 और जम्मू-कश्मीर के संविधान के खिलाफ हैं।

याचिका में कादरी ने कहा है कि यह प्रावधान सीधे उनकी निजी स्वतंत्रता पर हमला है और यह धार्मिक व निजी जीवन में घुसपैठ करने जैसा है। कादरी ने इन प्रावधानों को भेदभाव करने वाला और हानिकारक बताया और कहा कि यह प्रावधान एक व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता का हनन करता है।

गौरतलब है कि कश्मीर विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त कानून के प्रोफेसर प्रो. अफजल कादरी ने डोगरा कानून के विलोपन की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। इस कानून के तहत रियासत में गोवंश वध की मनाही है।

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