{"_id":"85ff868721a01d2148e0e8cf6e92cfcd","slug":"court-says-maintain-the-dignity-of-j-k-flag-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जेके के झंडे पर कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जेके के झंडे पर कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
अमृतपाल सिंह बाली/ अमर उजाला, श्रीनगर
Updated Tue, 16 Jun 2015 11:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय की ओर से राज्य के झंडे की गरिमा सही अर्थों में कायम रखने के लिए और साथ ही झंडे को सरकारी भवनों एवं सरकारी गाड़ियों पर फहराने के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है। उच्च न्यायालय द्वारा निर्देश देते हुए जम्मू कश्मीर सरकार को राज्य के झंडे को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है।
विज्ञापन
जस्टिस हसनैन मसूदी ने जारी एक अंतरिम आदेश में कहा कि कोर्ट द्वारा प्रतिवादियों को यह निर्देश दिए जाते हैं कि वह बात को सुनिश्चित करें कि जम्मू कश्मीर राज्य के झंडे की गरिमा कायम रखी जाए और जेएंडके प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट ऑफ द स्टेट ऑनर एक्ट-1979 के प्रावधान को सही रूप में लागू रखा जाए।
विज्ञापन
उच्च न्यायालय उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें सभी संवैधानिक प्राधिकारों को सभी सरकारी भवनों एवं वाहनों पर राज्य के झंडे फहराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। जस्टिस मसूदी ने यह भी कहा है कि प्रतिवादी को अगली सुनवाई तक स्पष्ट रुख के साथ सामने आने का मौका दिया जाता है।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता अब्दुल कय्यूम खान ने कहा था कि राज्य सरकार ने इस साल 12 मार्च को एक परिपत्र के माध्यम से प्राधिकारों से हर हाल में राज्य के झंडे की गरिमा बनाए रखने का निर्देश दिया था, लेकिन अगले ही दिन उसे वापस ले लिया गया।
याचिका में कहा गया है कि परिपत्र को वापस लिया जाना जम्मू कश्मीरराजकीय सम्मान अपमान रोकथाम अधिनियम-1979 का अपमान है, अतएव कानून के तहत दंडनीय है।