{"_id":"6834c7da10262555790b2652","slug":"court-news-of-jammu-jammu-news-c-10-lko1027-622487-2025-05-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: हाईकोर्ट ने रद्द की पीएसए के आरोपी की गिरफ्तारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: हाईकोर्ट ने रद्द की पीएसए के आरोपी की गिरफ्तारी
Tue, 27 May 2025 01:28 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Tue, 27 May 2025 01:28 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने एक मामले में जिला उपायुक्त, जम्मू की ओर से जन सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) के तहत जारी हिरासत आदेश को रद्द किया है। अदालत ने आरोपी को इस तरह के किसी मामले में शामिल न होने की हिदायत देते हुए रिहा कर दिया है।
न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी ने सोमवार को रॉयल सिंह नाम के आरोपी के खिलाफ तीन सितंबर, 2024 को जारी आदेश को रद्द कर दिया।
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कानून और व्यवस्था की सामान्य गड़बड़ी को सार्वजनिक शांति भंग मानकर पीएसए जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। छोटी-मोटी चोरी या झगड़े जैसे मामलों को जन सुरक्षा के लिए खतरा बताना सही नहीं है। इस तरह के मामलों के लिए पहले से कानूनी तंत्र मौजूद है, जिसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
एसएसपी की ओर से जो रिपोर्ट दी गई थी, उसमें रॉयल सिंह की कथित गतिविधियां कानून व्यवस्था के लिए चुनौती हो सकती थीं, लेकिन यह कहना कि वे सार्वजनिक शांति के लिए खतरा थीं, सही नहीं है।
विज्ञापन
फैसले में न्यायमूर्ति वानी ने कहा कि इस मामले में नजरबंदी का आदेश सोच-विचार कर नहीं लिया गया, जो कि कानून के मुताबिक गलत है। उन्होंने साफ किया कि बिना उचित सोच के जारी हिरासत आदेश संविधान और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में न्यायालय का दखल जरूरी है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी ने सोमवार को रॉयल सिंह नाम के आरोपी के खिलाफ तीन सितंबर, 2024 को जारी आदेश को रद्द कर दिया।
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि कानून और व्यवस्था की सामान्य गड़बड़ी को सार्वजनिक शांति भंग मानकर पीएसए जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। छोटी-मोटी चोरी या झगड़े जैसे मामलों को जन सुरक्षा के लिए खतरा बताना सही नहीं है। इस तरह के मामलों के लिए पहले से कानूनी तंत्र मौजूद है, जिसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
एसएसपी की ओर से जो रिपोर्ट दी गई थी, उसमें रॉयल सिंह की कथित गतिविधियां कानून व्यवस्था के लिए चुनौती हो सकती थीं, लेकिन यह कहना कि वे सार्वजनिक शांति के लिए खतरा थीं, सही नहीं है।
विज्ञापन
फैसले में न्यायमूर्ति वानी ने कहा कि इस मामले में नजरबंदी का आदेश सोच-विचार कर नहीं लिया गया, जो कि कानून के मुताबिक गलत है। उन्होंने साफ किया कि बिना उचित सोच के जारी हिरासत आदेश संविधान और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और ऐसे मामलों में न्यायालय का दखल जरूरी है।