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Jammu News: गांधी नगर डकैती मामले में सात आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज
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- चार साल पुराना है मामला, पुलिस वर्दी में परिवार को बंधक बना डकैती का आरोप
- कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की जमानत पर रिहाई से गवाह प्रभावित करने की आशंका
जम्मू। जम्मू के दूसरे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनूप कुमार शर्मा ने 2022 के गांधी नगर डकैती मामले में सात आरोपियों की जमानत खारिज कर दी है। कोर्ट ने आरोपियों की जमानत पर रिहाई से गवाहों को प्रभावित करने और डराने-धमकाने की आशंका जताई। कहा कि मामला जमानत के सामान्य नियम का अपवाद है।
हरविंदर सिंह, कुलविंदर सिंह, हरप्रीत सिंह खालसा उर्फ अमित राणा, राजविंदर सिंह, मंजीत सिंह उर्फ फौजी, सतविंदर सिंह उर्फ प्रीत और गुरमनप्रीत सिंह कालसिया की ओर से ये अर्जियां लगाई गई थीं। उन पर भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 395, 342, 120-बी और 171 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत अपराध शामिल हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार सात दिसंबर 2022 को लगभग नौ-दस हथियारबंद लोग, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस की टोपियां और जर्सी पहनी हुई थीं, ग्रीन बेल्ट गांधी नगर स्थित एक घर में घुस गए। उन्होंने परिवार और घरेलू सहायकों को बंधक बना लिया और लगभग 12-15 लाख रुपये नकद और अन्य कीमती सामान ले गए। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि हरप्रीत सिंह उर्फ अमित राणा इस घटना का मास्टरमाइंड था।
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आदेश के अनुसार जांच सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, हथियार, गोला-बारूद, नकदी और गहनों की बरामदगी, पहचान परेड और गवाहों के बयानों पर आधारित थी। अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने घटना से पहले रेकी की थी।
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तीन साल से हिरासत में रहने का तर्क दिया
आरोपियों के वकील ने आरोपियों के तीन साल से अधिक समय से हिरासत में रहने का तर्क दिया। कहा कि आरोप पहले ही तय किए जा चुके हैं और अभियोजन पक्ष के सबूत दर्ज करने में देरी हुई है। आरोपियों को लगातार हिरासत में रखना गलत है। हालांकि कोर्ट ने पाया कि गवाहों को पेश न करने के बारे में दी गई दलील रिकॉर्ड से पूरी तरह साबित नहीं होती है। कोर्ट ने देखा कि अभियोजन पक्ष के गवाह कई तारीखों पर पेश हुए थे, लेकिन अलग-अलग कारणों से उनसे पूछताछ नहीं हो सकी थी। अभियोजन के गवाह से बीती सितंबर को पूछताछ की गई, जिसमें उनका मुख्य बयान लगभग पूरा हो चुका था। जेएनएफ
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- कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की जमानत पर रिहाई से गवाह प्रभावित करने की आशंका
जम्मू। जम्मू के दूसरे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनूप कुमार शर्मा ने 2022 के गांधी नगर डकैती मामले में सात आरोपियों की जमानत खारिज कर दी है। कोर्ट ने आरोपियों की जमानत पर रिहाई से गवाहों को प्रभावित करने और डराने-धमकाने की आशंका जताई। कहा कि मामला जमानत के सामान्य नियम का अपवाद है।
हरविंदर सिंह, कुलविंदर सिंह, हरप्रीत सिंह खालसा उर्फ अमित राणा, राजविंदर सिंह, मंजीत सिंह उर्फ फौजी, सतविंदर सिंह उर्फ प्रीत और गुरमनप्रीत सिंह कालसिया की ओर से ये अर्जियां लगाई गई थीं। उन पर भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 395, 342, 120-बी और 171 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत अपराध शामिल हैं।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार सात दिसंबर 2022 को लगभग नौ-दस हथियारबंद लोग, जिन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस की टोपियां और जर्सी पहनी हुई थीं, ग्रीन बेल्ट गांधी नगर स्थित एक घर में घुस गए। उन्होंने परिवार और घरेलू सहायकों को बंधक बना लिया और लगभग 12-15 लाख रुपये नकद और अन्य कीमती सामान ले गए। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि हरप्रीत सिंह उर्फ अमित राणा इस घटना का मास्टरमाइंड था।
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आदेश के अनुसार जांच सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, हथियार, गोला-बारूद, नकदी और गहनों की बरामदगी, पहचान परेड और गवाहों के बयानों पर आधारित थी। अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने घटना से पहले रेकी की थी।
तीन साल से हिरासत में रहने का तर्क दिया
आरोपियों के वकील ने आरोपियों के तीन साल से अधिक समय से हिरासत में रहने का तर्क दिया। कहा कि आरोप पहले ही तय किए जा चुके हैं और अभियोजन पक्ष के सबूत दर्ज करने में देरी हुई है। आरोपियों को लगातार हिरासत में रखना गलत है। हालांकि कोर्ट ने पाया कि गवाहों को पेश न करने के बारे में दी गई दलील रिकॉर्ड से पूरी तरह साबित नहीं होती है। कोर्ट ने देखा कि अभियोजन पक्ष के गवाह कई तारीखों पर पेश हुए थे, लेकिन अलग-अलग कारणों से उनसे पूछताछ नहीं हो सकी थी। अभियोजन के गवाह से बीती सितंबर को पूछताछ की गई, जिसमें उनका मुख्य बयान लगभग पूरा हो चुका था। जेएनएफ