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Jammu News: अब पूर्व आतंकियों के परिजन भी आरडीडी में कर सकेंगे ठेकेदारी

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हाईकोर्ट ने आयुक्त सचिव के आदेश को किया खारिज, जांच के आदेश दिए
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के आयुक्त सचिव के 15 मार्च, 2023 को जारी किए गए आदेश को खारिज कर दिया है। इसमें निदेशक आरडीडी जम्मू/श्रीनगर को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि विभाग में ठेकेदारों को कोई भी ठेका इस आधार पर आवंटित न किया जाए, जिनके चाचा या पिता के चाचा राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल थे।
न्यायमूर्ति संजीव कुमार की पीठ ने आयुक्त सचिव ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के खिलाफ दायर याचिकाओं को अनुमति देते हुए कहा, इन याचिकाकर्ताओं में योग्यता नजर आती है और तदनुसार, इन्हें काम करने की अनुमति दी जा रही है। कोर्ट ने आदेश जारी किया कि प्रतिवादी (अधिकारी) पात्र याचिकाकर्ताओं को निविदा प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति देंगे। 15 मार्च, 2023 के विवादित आदेश के बावजूद कोर्ट ने कहा कि वह नागरिकों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर मूकदर्शक नहीं बने रह सकते। यह बताना असंगत नहीं होगा कि पूर्व आतंकियों या आत्मसमर्पण करने वाले आतंकियों के पुनर्वास की दृष्टि से जम्मू-कश्मीर सरकार पुनर्वास नीतियों की घोषणा कर चुकी है।
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अदालत ने कहा, नीति का उद्देश्य उन पूर्व आतंकवादियों की वापसी की सुविधा प्रदान करना था, जो जम्मू-कश्मीर राज्य के थे और आतंकवाद में प्रशिक्षण के लिए पीओके/पाकिस्तान में चले गए थे, लेकिन बाद में हृदय परिवर्तन के कारण विद्रोही गतिविधियों को छोड़ दिया था। जो आतंकवाद में भटक गए थे, लेकिन उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ, वे मुख्यधारा में वापस लौट आए।
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अदालत ने कहा, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के तत्कालीन आयुक्त सचिव द्वारा जारी किया गया विवादित आदेश केंद्र शासित प्रदेश में शांति और सामान्य स्थिति लाने के लिए सरकार द्वारा लिए गए सुविचारित और बुद्धिमानीपूर्ण निर्णयों पर स्पष्ट हमला है। याचिकाकर्ताओं को इस मामूली आधार पर ग्रामीण विकास विभाग के कार्यों को निष्पादित करने से रोक दिया गया था कि उनके चाचा या अन्य पूर्वज राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल थे।
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