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Jammu News: सतवारी के गांव में भूमि का खरीद मूल्य 1.45 लाख से बढ़ाकर 2.7 लाख प्रति कनाल तय
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हाईकोर्ट ने कहा - संदर्भ कोर्ट ने अधिगृहित भूमि की व्यावसायिक क्षमता पर विचार नहीं किया
जम्मू। सतवारी के एक गांव में बाजार से कम दर पर भूमि अधिग्रहण के मामले में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने भूमि का खरीद मूल्य 1.45 लाख से बढ़ाकर 2.7 लाख प्रति कनाल कर दिया है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा, संदर्भ कोर्ट ने अधिगृहीत भूमि की व्यावसायिक क्षमता पर विचार नहीं किया और सिर्फ अनुमान पर बाजार मूल्य तय किया है।
यह आदेश पारस राम व अन्य द्वारा दायर याचिका में 27 अगस्त, 2014 को जिला न्यायाधीश जम्मू (संदर्भ कोर्ट) की ओर से पारित फैसले के खिलाफ पारित किया गया है, जिसके तहत सतवारी के गांव में अधिगृहित भूमि की बाजार दर 1,45000 रुपये प्रति कनाल से बढ़ाकर 2,07500 रुपये कर दी गई है। न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने अपीलकर्ताओं के वकील जीएस ठाकुर, जबकि यूटी के लिए सीनियर एएजी मोनिका कोहली व भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के वकील यतिन महाजन के साथ इंद्रजीत गुप्ता को सुनने के बाद कहा कि मौजूदा मामले में निश्चित रूप से नौ साल का अंतर है, इसलिए उपरोक्त निर्णयों में निर्धारित दिशानिर्देशों और मौजूद विशेष कारकों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट का मत है की अधिगृहित भूमि की बाजार दर में 12% की वृद्धि उचित मुआवजा होगा।
भूमि शहरी क्षेत्र में थी और इसमें उच्च व्यावसायिक क्षमता थी। कोर्ट ने इस पर भी न्यायिक संज्ञान लिया कि आसपास के क्षेत्र में हवाई अड्डे के होने से पूरा क्षेत्र वाणिज्यिक केंद्र में बदल गया था, जिससे आसपास की जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इन कारणों से संदर्भ कोर्ट द्वारा पारित आदेश में संशोधिन किया गया है।
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हालांकि संदर्भ कोर्ट की ओर से पारित शेष पुरस्कार बरकरार रहेगा। बढ़ी राशि 15% की दर से हर्जाना और 6% प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ देय होगी, जिसकी गणना अधिगृहीत भूमि पर कब्ज़ा लेने की तारीख से एक वर्ष की अवधि के लिए की जाएगी। बढ़ी राशि प्राप्त होने तक 10% प्रति वर्ष की दर से देय होगी। जेएनएफ
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जम्मू। सतवारी के एक गांव में बाजार से कम दर पर भूमि अधिग्रहण के मामले में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने भूमि का खरीद मूल्य 1.45 लाख से बढ़ाकर 2.7 लाख प्रति कनाल कर दिया है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा, संदर्भ कोर्ट ने अधिगृहीत भूमि की व्यावसायिक क्षमता पर विचार नहीं किया और सिर्फ अनुमान पर बाजार मूल्य तय किया है।
यह आदेश पारस राम व अन्य द्वारा दायर याचिका में 27 अगस्त, 2014 को जिला न्यायाधीश जम्मू (संदर्भ कोर्ट) की ओर से पारित फैसले के खिलाफ पारित किया गया है, जिसके तहत सतवारी के गांव में अधिगृहित भूमि की बाजार दर 1,45000 रुपये प्रति कनाल से बढ़ाकर 2,07500 रुपये कर दी गई है। न्यायमूर्ति संजीव कुमार ने अपीलकर्ताओं के वकील जीएस ठाकुर, जबकि यूटी के लिए सीनियर एएजी मोनिका कोहली व भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण के वकील यतिन महाजन के साथ इंद्रजीत गुप्ता को सुनने के बाद कहा कि मौजूदा मामले में निश्चित रूप से नौ साल का अंतर है, इसलिए उपरोक्त निर्णयों में निर्धारित दिशानिर्देशों और मौजूद विशेष कारकों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट का मत है की अधिगृहित भूमि की बाजार दर में 12% की वृद्धि उचित मुआवजा होगा।
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भूमि शहरी क्षेत्र में थी और इसमें उच्च व्यावसायिक क्षमता थी। कोर्ट ने इस पर भी न्यायिक संज्ञान लिया कि आसपास के क्षेत्र में हवाई अड्डे के होने से पूरा क्षेत्र वाणिज्यिक केंद्र में बदल गया था, जिससे आसपास की जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इन कारणों से संदर्भ कोर्ट द्वारा पारित आदेश में संशोधिन किया गया है।
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हालांकि संदर्भ कोर्ट की ओर से पारित शेष पुरस्कार बरकरार रहेगा। बढ़ी राशि 15% की दर से हर्जाना और 6% प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ देय होगी, जिसकी गणना अधिगृहीत भूमि पर कब्ज़ा लेने की तारीख से एक वर्ष की अवधि के लिए की जाएगी। बढ़ी राशि प्राप्त होने तक 10% प्रति वर्ष की दर से देय होगी। जेएनएफ